Thursday, February 16, 2012

ये इश्क और मेरा आवारापन

इस वैलेंटाइन डे पर काफी अवारागर्दी की...क्या देखा..क्या पाया..ये तो बता नहीं सकता..पर प्यार के आवरण में ढका मैं अवारगी करता रहा...औऱ जो रंग दिखा...उसे कुछ कुछ आपके संग बांटने चला आया........................


http://tomodacy.com/views/love-pictures-for-valentines-day.html
’सर हम दिया तो रोज ही जला सकते हैं...फिर दिवाली पर ही खास क्यों...जैसे दिवाली खास दिन होता है न...बस सर ऐसे ही आज प्यार का खास दिन है....”.कुछ ऐसा ही था संवाद यानि डॉयलॉग ..सोनी टीवी के सीरियल ‘कुछ तो लोग कहेंगे’ में....कितना आसान कितना सिंपल.....अक्सर ऐसे ही जवाब मिल जाते हैं कई बेसिर पैर सवालों के...। प्यार कितना पवित्र औऱ आसान होता है....जो आसानी से खुद की व्याख्या कर देता है....पर हम समझ कर भी समझने को तैयार नहीं होते....वैसे इस डॉयलॉग को सुनकर लगा जैसे मेरी उस सारी कवायद का उपसंहार हुआ जो अनायास शुरु हो गया था...
      वेलेंटाइन से एक दिन पहले अखबार में एक खबर पढ़ी...एक समारोह में ४० ऐसे जोड़े बुलाये जा रहे थे...जिन्होंने अपने जीवनसाथी को अंगदान किया हो। मगर एक अजीब सा संयोग था इन सभी जोड़ों में...इन सभी जोड़ों में पत्नी ने ही लीवर या किडनी देकर अपने पति का जीवन बचाया था...। खबर के मुताबिक कार्यक्रम से जुड़े डायरेक्टर डॉक्टर सिंह का कहना था कि पत्नियां हमेशा पहल करती हैं अपने पती को बचाने के लिए।.....जाने क्यों ये खबर औऱ डॉक्टर के कहे शब्दों को दिल ने कबूल नहीं किया। लगा जैसे वेंलेटाइन डे पर अनजाने में पती का प्यार नज़रअंदाज हो गया हो....। लगा की इस खबर में प्यार को लिंगभेद में बांट दिया गया है.....ख़ैर  मैने सोचा जरा वैलेंटाइन डे पर देंखूं कि कौन करता है प्यार सबसे ज्यादा...।
        पहली बार संयोग से प्यार के दिन छुट्टी थी। सो दिन में बारह बजे तक बिस्तर तोड़ता रहा... लेकिन दुपहरिया की गुनगुनी धूप में निकल पड़ा बाजार कि तरफ कुछ किताबें खरीदने के लिए...या शायद जवाब तलाशने.....। बाहर हर तरह का जोड़ा था..हर समय का जोड़ा था....आज का जोड़ा...होने वाले कल का जोड़ा...बीते कल का जोड़ा..। जोड़ों के बीच मस्ती से टहहता हुआ....मैं कभी किसी रेस्तरां में बैठा..तो कभी  बाहर किसी पार्क में...। हर तरफ प्यार फैला था...जिनको ठीक से पता नहीं था वो भी आज सेलिब्रेट कर रहे थे..। इसी तरह टलहते हुए एक जोड़े से टकराया....ऐसा जोड़ा जो उम्र के बंधन को तोड़कर साथ हुआ। दस साल पहले 20 साल की लड़की और 33 साल का पुरुष...हमराही बने...आज भी 13 साल का फासला नजर नहीं आता। मेरी अवारगी रवानगी पर थी..सो मैं आगे चल पड़ा....शाम गहराने लगी था...और प्यार के जोड़े हर जगह छाने लगे थे।
     प्यार की इस बयार के बीच पहली बार ऐसा हुआ जब पूरे समाचार जगत से दूर रहा। कहां प्यार पर पहरा पड़ा..कहां प्यार पर हमला हुआ..इससे कोई मतलब नहीं रखा। खजुराहो और मदोनोत्सव के देश में पोगापंडितों और कट्टरवादियों का जोर..कैसा विरोधाभाष। ये संयोग था या नियति... जो मैं दूर की खबरों से दूर रहकर अपने आसपास की बयार के बीच टहल रहा था।
         मैं टहलता रहा..चलता रहा...इस बाजार से उस बाजार..एक रेस्तरां से दूसरे रेस्तरां...। कहीं कोई टकराया..कहीं कोई...इसी अवारगी में  मैं मुस्कुराती नाज़िया और उसके पति हेमंत से टकरा गया....ये जोड़ा आज से चार साल पहले धर्म के बंधन को तोड़कर एक हुआ था..औऱ जल्दी ही दोनो के परिवार ने इस रिश्ते को मंजूरी दे दी। मैं सोच रहा था कि इस जोड़े में पति-पत्नी दोनो ही मध्यमवर्गीय...छोटे शहर से निकले हुए। फिर कैसे इनके परिवारों के दिल इतने बड़े निकले। मुस्लिम लड़की के माता पिता को हिंदू दामाद अपनाने में कोई समस्या नहीं। आगे स्कूल और कॉलेज के प्यार को देखते हुए बढ़ता रहा...तभी दिखा प्यार का एक नया रंग.....पारिवारिक प्यार....एक रेस्तरां में बैठा हुआ था...तभी साथ के टेबल से अचानक थोड़ी तेज लेकिन हैरत भरी आवाज आई ‘’’सर आप’’’’...देखा तो चमकीली आंखों वाली दीप्ती थी.....पूरे परिवार के साथ....पती, बच्चे, सास-ससुर..सभी...पता चला सब मिलकर वेलेंटाइन डे सेलिब्रेट करने आए हैं....वहीं पर वो मुझे भी प्यार  बांटने लगे...मुझे अकेला समझ कर अपने साथ खाने की दावत में शामिल होने का न्यौता दे बैठे...पर अपन तो अवारगी में रमे थे....आवारगी में कभी कोई अकेला नहीं होता...सो मैं फिर निकल पड़ा। 
        दिन बीता..रात गई..सुबह हुई...फिर समाचार पत्र हाथ में.....एक नई खबर से रुबरु हुआ। एक दिन पहले अंगदान करने वाले जोड़ों की खबर का छुटा हुआ हिस्सा नजर आ रहा था अखबार के पेज पर...दो दिन पहले पढ़ी खबर की कसक दूर होने वाली थी...खबर थी अंगदान करने वाले तीस के लगभग परिवार एक समारोह में जुटने की...। इसमें 16 जोड़ो में पति था जिसने अपनी पत्नी को अंगदान करके प्यार की परिभाषा साकार की।  सच में प्यार करने वाला कोई भी हो सकता है...आदमी-औरत...कोई भी..बस प्यार करना आना चाहिए। चाहे.कितनी भी आधुनिकता आ जाए..सुपर फास्ट प्यार हो जाए....पर बिना किसी आशा के, बिना किसी शर्त के ही प्यार होता है..औऱ यही प्यार होता है जो हर सवाल को बौना कर देता है..हर दीवार को गिरा देता है...।

जैसा कि गालिब.....बुलाते हैं..प्यार वालों को निमंत्रण देते हैं...

ये इश्क नहीं आसां
एक आग का दरिया है
और डूब के जाना है...

औऱ अगर ये प्यार न होता....तो न तो हमारे हाथ में मोबाइल होता...न ही एनी टाइम मनी यानि एटीएम मशीन होती....। कई लोग जानते होंगे इस बात को...। अगर नहीं..तो कोई बात नहीं अगली पोस्ट में दोनो की कहानी ... पढ़ना न भूलना..। यानि प्यार की पोस्ट का सिलसिला जारी है।

20 comments:

  1. प्यार की आवारगी बस प्यार देखती है, और कुछ भी नहीं...

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  2. लास्ट में सस्पेंस बढ़ा गये गुरू, ’बोले तो बिंदास’ बोले तो इंडिया टी.वी. के कदमों पर:)
    सिलसिला\सिलसिले जारी रहें।

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  3. आवारगी, यायावरी और फकीरी जिस जगह जाकर मिलते हैं उसे ही तो मोहब्बत कहते हैं.. यौमे मोहब्बत की रूदाद अच्छी लगी रोहित बाबू!! "जारी है" शब्द से तो अमूमन कोफ़्त होती है मुझे, पर यहाँ प्यारा लगा!!

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  4. प्यार में अकभी कोई शर्त नहीं होती बस यही बात समझ आजाए तो समझ लीजिये सच्चा प्यार है। सार्थक आलेख...

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  5. आवारगी ने कई बातों की जानकारी मिली आगे आगे क्या होता है यह भी देखेंगें :)

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  6. उत्तर
    1. इस गड़बड़झाले का उत्तरदायी गूगल है....मैं नीर-क्षीर विवेक वाला ज्यादा नहीं जानता.....पर दुबारा टिप्पणी जरुर दें......

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  7. आपकी आवारगी में हमें तो प्रेम ही प्रेम दिखा।

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  8. वी डे पर दिलचस्प लेख ।
    लेकिन कब तक आवारागर्दी करते रहोगे मियां ! :)

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    1. सर यह आवारागर्दी नहीं आवारगी है...जो मेरे जीने का अंदाज़ है...यह आवारगी ही है जो कई चीजों के साथ बिना लाग लपेट के रूबरू कराता है....और उस तटस्थ होकर मूल्यांकन करने के ताकत देता है...

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  9. कई महत्त्वपूर्ण 'तकनिकी जानकारियों' सहेजे आज के ब्लॉग बुलेटिन पर आपकी इस पोस्ट को भी लिंक किया गया है, आपसे अनुरोध है कि आप ब्लॉग बुलेटिन पर आए और ब्लॉग जगत पर हमारे प्रयास का विश्लेषण करें...

    आज के दौर में जानकारी ही बचाव है - ब्लॉग बुलेटिन

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  10. बहुत बढ़िया प्रस्तुति
    --
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल सोमवार के चर्चा मंच पर भी लगा रहा हूँ! सूचनार्थ!
    --
    महाशिवरात्रि की मंगलकामनाएँ स्वीकार करें।

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  11. दिलचस्प .... प्यार तो सब कुछ है पर सादगी और त्याग भी है ... ये पता नहीं कब समझेंगे १४ फरवरी वाले ...

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  12. बहुत ही सुन्दर भाव| धन्यवाद।

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