बुधवार, मार्च 21, 2012

सचिन .. दे दनादन...


सपने देखो..उनका पीछा करो....मंजिल मिलकर ही रहेगी... यही है सचिन के जीने का अंदाज...इसी सूत्र  पर अमल करके सचिन बने हैं एक क्रिकेटर से क्रिकेट के भगवान...क्रिकेट के इस भगवान के सौंवे महाशतक ने उनके करोड़ों प्रशंसको को खुशी से लबरेज कर दिया है...ये महाशतक बताता है कि सपने औऱ हकीकत में कोई अंतर नहीं होता...बशर्ते मेहनत से जी न चुराया जाए। आज की पीढ़ी अविभूत होकर देख रही है कि सपने सच भी होते हैं....साथ ही ये भी देख रही है कि किस तरह से सपने जीए जाते हैं..। वैसे भी जब देश का सबसे बड़ा रोल मॉडल कह रहा हो कि सपने देखते रहना चाहिए...तो सबको मानना होगा की सपने देखने चाहिए...सपनों को जीना चाहिए....चाहे कितनी भी दिल तोड़ने वाली बातें सुनने को मिले...चाहे कोई कितनी भी बकवास करे...बस अपने सपने को जीने और उसे सच करने के लिए जमकर मेहनत करो..हर हाल में सपनों का पीछा करो...इसके लिए लंबा इंतजार भी करना पड़े तो डरो मत...रुको मत...थको मत..सपने हकीकत में तब्दील होकर रहेंगे...। आखिरी सचिन ने भी बचपन से विश्वकप विजेता टीम का सदस्य होने का सपना देखा था.. 22 साल तक इंतजार भी किया..जमकर मेहनत की..साथ ही लोगो को प्रेरित भी किया...एक पल के लिए भी 22 साल में ये सपना सचिन की आंखों से ओझल नहीं हुआ..।
      कई लोगो का कहना है कि सचिन का महाशतक कोई चमत्कार नहीं है..सचिन के लिए एक खास उपलब्धी है...पर इससे समाज को क्या फायदा..? कई का आरोप है कि सचिन के लार्जर देन लाइफ इमेज (Larger then life Image ) के चक्कर में युवा लोग देश की बाकी सभी समस्याओं से मुंह रहे हैं। उनका ध्यान सिर्फ खेल पर हो रहा है। वहीं देश के दूसरे खेलों को लोग भूल जाते हैं..। देश में और भी बड़े खिलाड़ी हैं...वगैरह..वगैरह..।
      पर सचिन से क्या सीखा जा सकता है ये तो सचिन ने खुद ही महाशतक बनाने के बाद बता दिया। अब कोई न सीखे तो ये सचिन की गलती तो नहीं है। सचिन हर साल 200 बच्चों की जिम्मेदारी उठाते हैं।
      अब इस पर क्या कहा जाए....हंसने के अलावा कुछ किया भी नहीं जा सकता.... क्योंकि जश्न मनाने वाला युवा देश की बाकी समस्याओं को भूलकर सिर्फ महाशतक का जशन नहीं मना रहा..जैसा की आलोचकों का कहना है...पता नहीं इन लोगो की याददाश्त इतनी कमजोर क्यों हैं...ये क्यों भूल जाते हैं कि देश का युवा अपने देश को कभी भूलता नहीं...शायद करगिल की खून से सनी पहाड़ी इन लोगो को याद नहीं। ज्यादा पीछे न जाएं तो पिछले साल अगस्त में रामलीला ग्राउंड की ही याद कीजिए। जहां हजारों तिरंगे लहरा रहे थे... तिरंगों के नीचे हजारों चमकते चेहरे थे...हर उम्र के लोग वहां था..और वहां पहुंचा हर युवा किसी राजनीतिक दल का कार्यकर्ता नहीं था...
     रामलीला ग्राउंड में आधे से अधिक लोग वो थे जो खुली आंखों से सपने देखते हैं...भ्रष्टाचार से मुक्त भारत का सपना...। उसे हकीकत में तब्दील करने की जरा सी आशा बंधी और युवा एकजुट होकर रामलीला ग्राउंट पहुंच गए। अरे अगर इन युवाओं को नेताओं में रोल मॉडल नहीं दिखता तो ये नाकामी नेताओं की है...न की आज की युवा पीढ़ी की....। न ही ये नाकामी है सचिन की...न सचिन के महाशतक के आसरे मस्त होकर झूमते लोगो की...।   ऐसे ही 27 साल से आंखों में पल रहे विश्वकप विजेता होने का सपना जब सच हुआ तो जश्न तो बनता ही था...उस जश्न में भी बिना भेदभाव के लोग मौजूद थे...सड़कों पर हर जगह तिरंगा था..सिर्फ तिरंगा..। सचिन के  महाशतक के साथ भी एक ही रंग चारों तरफ लहराया और वो था तिरंगे का..।
     दरअसल कुछ सपने ऐसे होते हैं जो कोई सिर्फ अपने लिए देखता है..और उसकी पूरी खुशी उसे या उसके परिवार को होती है....। कुछ सपने ऐसे होते हैं..जो देखता तो कोई एक है..उसे पूरा करने की मेहनत भी सपने देखने वाला ही करता है...पर उसके साथ दुआ सिर्फ उसके परिवार की ही नहीं लगभग पूरे समाज की होती है.। उस सपने के पूरा होने का इंतजार पूरे समाज को होता है....। सचिन का महाशतक भी ऐसा ही सपना था..जिसके सच होने पर पर सामूहिक खूशी हुई...सामूहिक जश्न मना..। एक राष्ट्र का जश्न।
   वहीं कुछ सपने ऐसे होते हैं जो समाज सामूहिक रुप से देखता है....जिसे सच में तब्दील करने के लिए सामूहिक संघर्ष किया जाता है...और जिसके पूरा होने की खुशी भी सामूहिक होती है...और जश्न भी। भ्रष्टाचर मुक्त भारत का सपना भी वही सपना है...जो हाईफाई गैजेट से लैस पीढ़ी की आंखों से ओझल नहीं हुई है....जरा अगुवाई करने वाले ईमानदार कोशिश तो करें। जश्न मनाती ये पीढ़ी बदलाव की बयार के वाहक भी बन रहे हैं। जरा आंखें खोल कर देखिए तो सही कि किस तरह महज एक डॉक्टर पूरे इलाके का रहनुमा बन जाता है...कैसे महज 11 साल की बच्ची आज की पीढ़ी के साथ ही भविष्य की अगली पीढ़ी को लोकतंत्र का पाठ पढ़ाती है...जरा उठिए तो सही...आंखे खोलिए तो सही...बदलाव करने को आतुर लोगो से मिलिए तो सही...उनकी मदद का हौसला तो करिए...अगर ऐसा करेंगे तो शायद तमाम मुश्किलों के बाद भी चेहरे पर एक मुस्कान और दिल को कुछ सुकुन हासिल हो सकेगा.....। ये महाशतक भी वही सुकुन है..जरा महाशतक के पीछे बहे पसीने की झलक देखिए तो सही....खैर हम तो जश्न मना रहे हैं महाशतक का...पढ़ रहे हैं एक सपने के सच होने की दास्तां को...कोशिश कर रहे हैं सपने को सच करने के सूत्र को अपनाने की...। आपका क्या ख्याल है..? ये आप जाने..बस मेहरबानी करके ये न समझें कि हम देश की समस्या को भूल गए हैं।

16 टिप्‍पणियां:

  1. सौ शतक कभी एक स्वप्न भी शायद ही रहा हो,किंतु आज वह एक हक़ीक़त है। यह पल इतिहास-सृजन के साक्षी होने की खुशी में जश्न मनाने का है,तर्क-वितर्क का नहीं।

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  2. हर बात का महत्त्व होता है .
    सचिन की उपलब्धि पर सारे देश को गर्व होना चाहिए .
    बेशक सपने देखने वाला ही सपने को साकार कर सकता है .

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  3. आपकी पोस्ट कल 22/3/2012 के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें
    http://charchamanch.blogspot.com
    चर्चा - 826:चर्चाकार-दिलबाग विर्क

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  4. यह सब ऊपर से ही ठीक होगा. सिस्टम में गंभीर खामियां हैं. जो आज बूढ़े हैं वे कल युवा थे, जो आज युवा हैं कल बूढ़े होंगे.सपने देखने में और अच्छे सपने देखकर उन्हें पूरा करने के प्रयास करने में कोई हर्ज नहीं.

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    1. सवाल इस बात का है कि क्रिकेट के विरोधी ये क्यों समझते हैं महाशतक का जश्न मना रहे लोग देश की बाकी समस्याओं से अनजान है..जिस तरह त्यौहार मनाते हैं मगर जानते हैं कि हमें अगले दिन क्या करना है..ठीक उस तरह ही ये महाशतक भी था..औऱ फिर ये सामूहिक जश्न का काम है...पिछले कई सालों में सचिन के अलावा और कुछ अच्छा क्या दिया है किसी नायक ने हमें...जिस पर गर्व कर सकें।

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    1. आपको भी नववर्ष की शुभकामनाएं....मित्र

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  6. सचिन की यह उपलब्धि प्रेरणादायक है. हर गेंद आप पर आक्रमण करने के लिए आती है.. न कि आप को रन देने के लिए आती है.. अगर आपने उस आक्रमण से बचते हुए एक उपलब्धि हासिल करते हैं तो वह बहुत कुछ सिखा जाती है.. रोजमर्रा की जिन्दगी में विपरीत परिस्थिति गेंद है और उस दौरान आपने जो कुछ हासिल किया वह आपका रन.. विपरीत परिस्थिति में ज्यादातर लोग आउट भी हो जाते हैं.. यह कई बार का जीवन है जिसमें सचिन ने हर बार दूसरे छोर पर खड़े होकर सामना किया है.. यह हमारा सच्चा हीरो है.. इसने हर पल हमें जीना सिखाया है.. देश को कुछ लोगों को इसे हीरो मानने में आपत्ति होती है तो होने दीजिए..

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  7. सचिन भारतीय क्रिकेट का सिरमौर है । पर अब उनको निवृत्त हो जाना चाहिये । यश के शिखर पर ही निवृत्ती सरल होती है ।

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  8. नवरात्री और नव संवत्सर ( वर्ष ) की हार्दिक शुभकामनायें ...

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