शुक्रवार, जुलाई 13, 2012

तालीबानी साये में महिलाओं की बगावत

  अफगानिस्तान से एक और तालीबानी वीडियो रिलीज.....एक असहाय, कमजोर महिला पर एके-47 से गोलियों की बौछार....गोली चलाने वाला उसका पति....महिला को मौत की सजा दी गई अवैध संबंधों रखने के आरोप में। एक घंटे तक न्याय की नौटंकी हुई....उसके बाद महिला को सुनाई गई सजा-ए-मौत। महिला से अवैध संबंध रखने वाले दोनों तालिबानी कमांडर सलामत है।
     दरअसल अफगानिस्तान की पहाड़ियां में...जहां काबूल की सीमा खत्म होती है..वहां से शुरु होता है जंगली और बर्बर तालिबानियों का राज....जिनके राज में इंसानियत दम तोड़ देती है....महिलाएं इंसान नहीं....महज एक उपभोग की वस्तु बन जाती है..जिसका काम होता है सिर्फ मर्दों का बिस्तर गर्म करना।
      अफगानिस्तान में महिलाओं की स्थिती बदतर है। इस वीडियो को समझने के लिए जानना होगा वहां महिलाओं की स्थिती के बारे में। अगर कहा जाए कि महिलाओं के लिए कहीं अगर नर्क है तो वो तालिबानियों के कब्जे वाला अफगानिस्तान है तो कोई अतिश्योक्ती नहीं होगी। वहां मर्द जब चाहे वो किसी भी उम्र की महिला को अपने हवस के लिए चुन सकता है, मगर महिलाओं की स्थिती उलट है। वहां लड़कियों को जवानी में जीवनसाथी मिलता है कोई अधमरा बूढ़ा...या फिर परिवार के सम्मान और वादे के नाम पर 16-17 साल की लड़की ब्याह दी जाती है 4-5 साल के बच्चे से।
    कम उम्र की लड़कियों का निढाल बूढ़ा पति हवस पूरी करके जल्दी सो जाता है, पर इन अभागिनों की रातें बैचेन शरीर के साथ जागी रहती हैं। वहीं बच्चे के साथ ब्याही गईं मजूबर लड़कियों का सारा दिन नन्हें पति को खिलाने-पिलाने....नहाने में बीत जाता है। फिर जब रात आती है...पांच साल का पति उसकी छाती पर सिर रख कर चैन की नींद सो जाता है...उस वक्त इन मजबूरों की आंखों से नीद कोसो दूर होती हैं। अपनी किस्मत को कोसती..खून के आंसू रोती....इन लड़कियों को समझ नहीं आता कि नन्हें पति की वो क्या हैं..आया, मां या पत्नी.।
     इसी दर्द और बेबसी भरे दिल से निकलती हैं चंद लाइनें जिन्हें लांदे कहा जाता है। जिनमें अक्सर लड़कियां पूछती हैं कि जब ये नन्हा बालक बड़ा होकर जवां मर्द बनेगा..तब तक ये बूढ़ी हो चुकी होंगी....तब उनका क्या होगा। इन लांदे में शायरी वाली नफासत नहीं होती.....शब्दों का जादू भी नहीं होता...पर होती है दिल की चीत्कार....कैद सांसों की तड़प....घुट-घुटकर जीने का दर्द....पुरुषों के खिलाफ नारी देह की खुली बगावत...प्रेमी को पुकारती दिल से निकली आवाज।
      पर हाय री किस्मत....अफगानिस्तान में लड़कियों को लांदे भी गाने की इजाजत नहीं....अगर पता चल जाए कि कोई लड़की लांदे लिखती है...तो उसे मिलती है ऐसी सजा..जिसे सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं....। सोचिए जिस पर गुजरती है उसका क्या हाल होता होगा। पहले उस लड़की या औरत के साथ किया जाता है खुलेआम बलात्कार....कई बार सामूहिक बलात्कार...फिर दी जाती है मौत की सजा। कभी पत्थर मार-मार कर मौत की नींद सुलाया जाता है..तो कभी एके-47 की गोलियों की बौछार। यानि जिल्लत भरी मौत....आज अफगानिस्तान वो देश बन चुका है जहां औरत को मोहब्बत का हक नहीं है। अपनी मर्जी से खुली हवा में सांस लेने की इजाजत नहीं है। जाहिर है दुनिया बदल गई, पर हिंदुकुश पर्वत पर या उसके आसपास रहने वाले कई जंगली कबीले आज भी जंगली ही हैं। ऐसे में जहां इन कबीलों का राज हो वहां महिला होना किसी अभिशाप से कम नहीं। कंधार के आसपास के कुछ शहरों के पास तो कई ऐसे गांव हैं जहां भाड़े के हत्यारे रहते हैं...जो धर्म के नाम पर खून बहाने की आदिम परंपरा जिंदा रखे हुए हैं।
  वैसे भी पुरुषों को जब भी हैवानियत का नंगा नाच करना होता है ..या झूठी श्रेष्ठता और ताकत का प्रदर्शन करना होता तो औरत ही उनका पहला शिकार बनती है......और ये कड़वा सच दुनिया के हर कोने का सच है।

मां..काश कुछ फिल्मी फरिश्ते मिलते

   पुरानी फिल्मों में फैमली डॉक्टर के हाथ में एक जादू का बक्सा होता था। कैसी भी बीमारी हो , एक गोली देता था , या इंजेक्शन लगाता था और ब...