गुरुवार, सितंबर 20, 2012

कांग्रेस के मनमोहनी वार से सब धड़ाम

ममता दी ने कांग्रेस को एक और धोबीपाट की कोशिश की है.....मगर कांग्रेस पर इसका ज्यादा असर होता नहीं दिख रहा है। सहयोगी पार्टियों के नेताओं की बयानबाजी से साफ है कि फिलहाल सरकार को कोई खतरा नहीं है। हालांकि इसका पता तब ही चल गया था जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपनी अंतर्राष्ट्रीय छवि बिगड़ती देख बोल्ड फैसले लिए थे। उस वक्त समाजवादी पार्टी और बसपा सुप्रिमो के बयानों से साफ था कि मनमोहन सिंह एंड पार्टी जानती थी कि मुलायम और मायावती सरकार का साथ छोड़ने से रहे। सपा-बसपा की मजबूरी है कि वो अभी सरकार का दामन नहीं छोड़ सकते। भले ही बाद में इसकी कीमत के तौर पर सपा अपने चुनावी वादों को पूरा करने के लिए केंद्र से पैसा झटक लें।

जांची-परखी चाल
यूपीए-1 के समय अमेरिका के साथ परमाणु करार के मुद्दे पर जब मनमोहन सिंह अड़ गए थे...तब कांग्रेस ने कामरेडों को गच्चा देकर मुलायम सिंह को साध लिया था। इस बार भी ठीक वही होता दिख रहा है। यानि इतिहास अपने को दोहरा रहा है या कहें कि कांग्रेस परखी हुई सफल चाल फिर चल रही है। इसलिए इस बार कोलकाता में ममता दी की धमाचौकड़ी के बावजूद दिल्ली में सरकार में कोई हड़बड़ी नहीं दिखाई दी। कॉमरेड गुरुदास दासगुप्ता ने ठीक कहा है कि ममता के समर्थन वापसी से कांग्रेस को कोई फर्क नहीं पड़ेगा, क्योंकि कांग्रेस को पता है कि कैसे अल्पमत की सरकार बचाई और चलाई जाती है।

मुलायम...मायावती पर भाजपा का हौवा
बाहर से समर्थन दे रहे मुलायम सिंह की मजबूरी है कि वो कांग्रेस का साथ दें। भले ही बहाना बीजेपी विरोध का हो और हकीकत में मुस्लिम वोट बैंक की चिंता। यही बात घूमाफिरा कर बसपा पर भी लागू होती है। दोनो ही पार्टीयां भले ही यूपी में आमने-सामने हों...कांग्रेस से टकराती हों...पर केंद्र में कांग्रेस के साथ हैं। यही सियासत है..सियासत की मजबूरी है। दोनों पार्टियां कांग्रेस का विरोध कर भाजपा के साथ खड़े होना नहीं दिखना चाहतीं। साथ ही कांग्रेस के फैसलों से मुलायम सिंह पूरी तरह से सहमत होते नहीं दिखना चाहते जिस कारण उनको भारत बंद का आह्वान भी करना पड़ा।

कांग्रेस -एक तीर कई निशाने
इन फैसलों से कांग्रेस ने एक तीर से कई निशाने भी साध दिए हैं। कोयला घोटाला से जनता का ध्यान डीजल औऱ सिलेंडर की तरफ मोड़ दिया है। मनमोहन सिंह की अतंर्राष्ट्रीय छवि बच गई है। ममता से लगभग छुटकारा मिल गया है। ज्यादा से ज्यादा अब ये होगा कि सरकार सब्सिडी वाले सिलेंडर की संख्या को 6 से बढ़ाकर 10 कर देगी...वैसे कांग्रेस की सरकारों को सोनिया गांधी ने 9 सिलेंडर तक देने का आदेश दे दिया है। जिससे कांग्रेस अपनी छवि भी कुछ हद तक सुधारने में कामयाब होगी।

जनता फिर बनेगी घनचक्कर
इस सब के बीच जनता एक बार फिर ठगी जाएगी। सरकार का सीधा फंडा है कि सिलेंडर की ब्लैकमार्किंटग से हो रहे नुकसान की भरपाई ईमानदारी से सिलेंडर खरीदने वाली जनता से वसूलो। घोटाले से खाली खजाने को ईमानदार जनता पर टैक्स थोप कर कर भरो। मतलब साफ है कि डीजल पर दाम बढ़े या घटे हर दो घंटे में किसान आत्महत्या करते रहेंगे। मध्यमवर्ग इंटरनेशनल ब्रैंड और सिलेंडर के चक्कर में घनचक्कर बनता रहेगा...यानि चोर चैन की बंसी बजाते रहेंगे...औऱ ईमानदार लूटते-पिटते रहेंगे।

मां..काश कुछ फिल्मी फरिश्ते मिलते

   पुरानी फिल्मों में फैमली डॉक्टर के हाथ में एक जादू का बक्सा होता था। कैसी भी बीमारी हो , एक गोली देता था , या इंजेक्शन लगाता था और ब...