सोमवार, अक्तूबर 08, 2012

अरे वाह हो चुकी है Century (100 Post) Woww

पूरे 2 साल 11 महीने के बाद अपुन की भी पोस्टों का शतक पूरा हो चुका है। ये सेंचुरी टेस्ट मैच की है या वनडे की ये तो पता नहीं... लेकिन 75 पोस्ट तक एक मजेदार बात होती रही थी.....75 पोस्ट लिखे जाने तक उससे ज्यादा लोग मुझसे ब्लॉग पर जुड़े हुए थे। हैरानी थी कि इतना स्लो लिखने के बाद भी लोग जुड़ गए। वैसे ये पेशे की मजबूरी है जो हर बात पर लिख नही सकता....वरना कई बार तो ऐसा होता है कि चार-चार मुद्दों पर एक साथ लिखने का मन करता है...पर हर पेशे की कुछ मर्यादा होती है...और उसी का पालन करने की कोशिश करता हूं। वैसे इतना है कि अपना सफर जारी रहेगा..रुकेगा नहीं। वैसे मैं भले ही रोज नहीं लिखता...पर ब्लॉग की दुनिया में कई पन्नों पर विजिटर के तौर पर लगभग रोज ही हाजिरी लगाता हूं। कहीं-कहीं टिप्पणी के तौर पर नजर भी आता हूं।    
इस 102वीं पोस्ट के साथ बापू की तस्वीर के साथ कविता दोबारा पोस्ट कर रहा हूं....हालांकि मैं कवि नहीं हूं। दरअसल पिछली पोस्ट पर कुछ दोस्तों ने शिकायत की थी कि बापू की तस्वीर के साथ लिखी कविता पढने में परेशानी हो रही है। ऐसी ही शिकायत मित्रजनों को कुछ औऱ पोस्टों पर भी हुई थी...मगर जिन पर मैं ध्यान नही दे पाया था। फिलहाल तो ये गलती सुधार रहा हूं और कविता को कुछ तब्दीली के साथ दोबारा पोस्ट कर रहा हूं। आइंदा इस तरह की शिकायत किसी को नहीं होगी....।

मां..काश कुछ फिल्मी फरिश्ते मिलते

   पुरानी फिल्मों में फैमली डॉक्टर के हाथ में एक जादू का बक्सा होता था। कैसी भी बीमारी हो , एक गोली देता था , या इंजेक्शन लगाता था और ब...