शुक्रवार, नवंबर 09, 2012

50 करोड की गर्लफ्रेंड? सांप्रदायिक ठाकरे? औऱ हमारी बक-बक?

      हम बचपन में एक कहानी सुना करते थे....। एक बार दुनिया के एक ताकतवर कम्यूनिस्ट देश से एक हट्टा-कट्टा कुता भारत भ्रमण पर आया। जाहिर है विदेश से आया कुता था..इसलिए उसकी जबरदस्त आवाभगत हुई। मेहमान कुते का जादू कुछ इस तरह से भारत के मरघिले कुतों की पर चला कि पुछिए मत। देश के हर शहर से लेकर हर गली से विदेशी मेहमान को न्योता भेजा गया। हर जगह मेहमान विदेशी कुत्ते की जमकर खातिरदारी हुई। विदेशी मेहमान का प्रभाव इतना ज्यादा था कि अपनी कभी एकजुट न रहने की अपनी परिपाटी तोड़ते हुए भारत के कुतों ने एक सभा की।

    सभा में सभी ने एक सुर में मिलकर तय हुआ कि भारतीय कुत्तों का एक प्रतिनिधि मेहमान के साथ उनके देश भेजा जाए.....जो विदेश जाकर वहां के कुत्तों की खुशहाली का राज जानेगा। विदेशी मेहमान औऱ भारतीय कुत्तों का प्रतिनिधि विभिन्न स्थलों का दौरा करते हुए उसके देश के लिए रवाना हुए। बतियाते, खाते-पीते दोनों सीमा पर पहुंचे। सीमा पर पहुंचते ही जाने भारतीय कुते के मन में क्या आया कि उसने अपने मेहमान से पूछ लिया “आपके देश में कितनी ऊची अवाज में भौंक सकते है..कितनी देर तक भौंक सकते हैं””

     ये सुनकर मेहमान कुता बड़े अदब से बोल “’’बंधु आपको हमारे देश में बढ़िया खाना-पीना मिलेगा....बढ़िया घऱ मिलेगा....अच्छे-अच्छे कपड़े मिलेंगे....बस भौंकने की आज़ादी नहीं मिलेगी?”” इतना सुनते ही भारतीय कुत्ते ये कहते हुए वापस मुड़ गया कि “’मित्र हमें सब मंजूर है..पर भौंकने की आज़ादी से हम कोई समझौता नहीं कर सकते””
  
      कहानी भले ही पुरानी हो....पर आज भी हम आज़ादी से समझौता नहीं करते। ये अलग बात है कि इसी कारण बिन बात खटराग फैलाना हमारी राष्ट्रीय फितरत बन चुकी है। मुद्दा कुछ होता है और हम कुछ और मुद्दा बना देते हैं। इसकी बानगी हाल की दो घटनाओं में दिखी।

     कुछ दिन पहले नरेंद्र मोदी हिमाचल गए हुए थे। वहां एक चुनावी रैली में नरेंद्र मोदी के मुंह से एक जुमला निकला ”50 करोड़ की गर्ल फ्रैंड"....बस फिर क्या था...सभी चिल्ला पड़े कि मोदी को महिलाओं की इज्जत करनी नहीं आती....वगैरह..वगैरह। बात ठीक भी थी...इस तरह किसी की पत्नी को निशाना नहीं बनाना चाहिए....पर जुमले पर मचे बवाल ने बात घूमा दी...मोदी का कांग्रेस से पूछा था कि जिस आरोप के चलते थरुर साहब कि कुर्सी गई थी....वो आरोप खत्म हुए बिना कैसे उन्हें दोबारा मंत्री बना दिया गया है...इसके बाद 50 करोड़ की गर्लफ्रेंड के जुमले पर सबने मोदी को तो घेरा.....पर किसी ने कांग्रेस से ये नहीं पूछा कि आरोपमुक्त हुए बिना थरुर साहब को कैसे दुबारा मंत्री बना दिया गया।

     ठीक यही हाल बाला साहब ठाकरे का भी हुआ।  पत्रकारों से बातचीत में केंद्रिय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने पाकिस्तान क्रिकेट टीम के भारत दौरे पर हुए सवाल के जवाब में कह दिया कि पिछली बातों को भूलकर क्रिकेट का लुत्फ उठाया जाए। बाला साहब ठाकरे इसी बयान पर भड़के थे। उन्होंने धमकी देते हुए कहा कि शिंदे इस बयान के लिए देश से माफी मांगे....वरना पाकिस्तानी क्रिकेट टीम को भारत में खेलने नहीं दिया जाएगा। आखिर इसमें ऐसा क्या गलत कहा था बाला साहब ठाकरे ने? एक अंसवेदनशील बयान पर ऐतराज हर कोई उठा रहा था। मगर ठाकरे साहब की बात अलग थी...उन्होंने धमकी क्या दी, विरोधी चिल्लाने लग गए। सवाल होने चाहिए थे शिंदे साहब से..पर लोग बाल ठाकरे से पूछने लगे कि क्या वो पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के बहाने अपनी राजनीति चमकाना चाहते हैं....जबकि शिंदे साहब से पूछा जाना चाहिए था कि उन्होंने ऐसा गैर-जिम्मेदाराना बयान क्यों दिया?
             क्या 26/11 के हमले के शहीदों के परिजनों या शहीद कमांडों पी उन्नीकृष्णण के माता-पिता के सामने देश के गृहमंत्री ये बयान दे सकते थे?...क्या इस बयान पर शिंदे साहब को माफी नहीं मांगनी चाहिए थी? मगर अफसोस ऐसा कोई सवाल शिंदे साहब से नहीं किया गया..बस हल्ला मचाए जाओ...हल्ले औऱ हल्ले की आड़ में असली बात दबाए जाओ....ऐसे ही हालात राजनीतिक नेताओं को भाते हैं....और अफसोस की इस फितरत का शिकार आजकल मीडिया हो रहा है.....साथ ही इसी फितरत की शिकार जनता भी हो रही है।

मां..काश कुछ फिल्मी फरिश्ते मिलते

   पुरानी फिल्मों में फैमली डॉक्टर के हाथ में एक जादू का बक्सा होता था। कैसी भी बीमारी हो , एक गोली देता था , या इंजेक्शन लगाता था और ब...