सोमवार, दिसंबर 17, 2012

बड़े भोले हैं बंटवारे वाले भाई(????)..। हां नहीं तो....


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 पाकिस्तान के गृहमंत्री आए औऱ चले गए। उनके आने से पहले ही लोग पूछ रहे थे कि वो आ क्यों रहे हैं? यहां तक की भारत सरकार भी इसी सवाल का जवाब जानना चाहती थी...राजनीतिक शिष्टाचारवश चुप रही...यही शिष्टाचार विपक्ष ने भी दिखाया। अब मलिक साहब के जाने के बाद सब पूछ रहे हैं इससे भारत को क्या मिला? लोग हमेशा ही नकारात्मक बातें करते हैं...अरे इंसानियत कहती है कि हमारा नुकसान हो तो हो..मेहमान को फायदा होना चाहिए। पाकिस्तान के नगारिकों को वीजा नियमों में ढील देकर हमने इंसानियत की लाज रख ली है। अब वो हमारे यहां चाहे आतंकवाद फैलाये या मुंबई हमला करवाए....। हां नहीं तो....

   वीज़ा नियमों में बदलाव पर बेकार ही सब हल्ला मचा रहे हैं..।  पहले ही कई पाकिस्तानी बिना वीज़ा के भारत को अपने बाप-दादा का घर समझ कर रह रहे हैं। बाप-दादा का न सही..अपना ससुराल समझ कर तो रह रहे हैं। कुछ दिन पहले ही तो दिल्ली में नाती-पोतो वाली एक अम्मा मिली हैं। किसी बीते समय में कुछ तकनीकि कारणों के बाद वो अम्मा नेपथ्य में चली गईं थीं। वो उनके मियां ने भी मारे मुहब्बत के शायद चुप्पी साध ली थी। वो तो जाने किसकी बुरी नजर लग गई जो दिल्ली पुलिस उन तक पहुंच गई..वरना वो तो युवती से दादी-नानी बन ही चुकी हैं औऱ पकड़े जाने पर उनके मियां उन्हें भारत का नागरिक बनवाने की गुहार लगा रहे हैं।  आखिर गलत तो कुछ नहीं कर रहे हैं...अब बीबी भले ही सरहद पार से मिली उनको...प्यार के लिए तो कुछ भी किया जा सकता है....। वैसे भी करगिल वार औऱ मुंबई हमला हो तो हो...वो तो इन अम्मा जैसे लोगो ने नहीं कराए हैं न। उसमें मरे लोग इनके खानदान के थोड़ी न थे....हां नहीं तो?

मासूम हैं पाकिस्तानी गृहमंत्री रहमान मलिक
    वैसे भी ऐसे जाने कितने सारे मामले हैं...अब पिछली सीरिज में पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के साथ आए कई दर्शक नेपथ्य में जाकर आखिर किसी न किसी के सहारे यहां टिके हुए हैं कि नहीं। भले ही सुरक्षाकर्मी उन्हें ढूंढती रहे....उन दर्शकों के प्यार के मारे लोग उनका सहारा तो बने हुए हैं ही। ऐसे भलेमानुष(??) पाकिस्तानी दर्शक जानते हैं कि कोई उनतक  कोई पहुंचेगा नहीं..और अगर सुरक्षाकर्मी उनतक पहुंच भी गए तो सियासत वाले भाई-बंधु और वो उनके आश्रयदाता लोग तो हैं ही मदद करने के लिए....और वो ये भी जातने हैं कि उनके पकड़े जाने पर ये सभी लोग रंग बदलकर मानवता की दुहाई देने लगेंगे जिससे भारत सरकार का दिल पसीज ही जाएगा...और दूसरी बात ये कि अदालती कार्रवाई खत्म होते-होते वो दूसरी दुनिया में जाने लायक हो जाएंगे..फिर उनपर तरस खाना ही पड़ेगा........हां नहीं तो.....

कैप्टन सौरभ..जय हिंद
      वैसे भी हम कोई ऐरेगैरे थोड़ी न हैं...हम दक्षिण एशिया के सबसे बड़े मुल्क हैं यारों....अब भले ही पाकिस्तानियों के बाप-दादा अपना हिस्सा लेकर 65 साल पहले मुल्क के दो टुकड़े कर चुके हों.... पह हम तो बड़े भाई की तरह हैं न....भले ही दूसरा हर बार पीठ में छूरा घोपता हो...कनॉट प्लेस में बम रखता हो....मुंबई में ट्रैन में ब्लास्ट करवाता हो....हम तो भई हर बार गुहार करते रहेंगे कि हे सरहद पार के भाई ऐसा न करो..ऐसा करने वाले को सजा दो....वगैरह वगैरह.. हम तो संयम बरतेंगे आखिर हम बड़े मुल्क हैं.....हमेशा ही शिकायत न किया करो....कुछ तो बड़प्पन दिखाओ..हमेशा निराशावादी बातें न किया करो...स्वागत किया करो पाकिस्तान से आए ऐसे राजनीतिज्ञों का जो हाफिज सईद सरीखे भस्मासुर का बाल बांका न कर सकते हों...। वैसे भी मेहमान पाकिस्तानी गृहमंत्री रहमान साहब तो तो बेहद मासूम हैं....इतने मासूम हैं कि  उन्हें इसका फर्क भी नहीं पता कि करगिल की लड़ाई में शहीद हुए कैप्टन सौरभ कालिया के शरीर पर मिले जख़्म यातना देने से बने थे या मौसम की मार से.....
हां  नहीं तो.....

मां..काश कुछ फिल्मी फरिश्ते मिलते

   पुरानी फिल्मों में फैमली डॉक्टर के हाथ में एक जादू का बक्सा होता था। कैसी भी बीमारी हो , एक गोली देता था , या इंजेक्शन लगाता था और ब...