रविवार, दिसंबर 30, 2012

दामिनी .. समझ नहीं आ रहा

आज कुछ कहना बेकार है या कुछ न कहना बेकार..समझ नहीं आ रहा.. दामिनी कहूं या तुम्हें सही नाम से पुकारुं समझ नहीं पा रहा...नेशनल ब्राडकास्टर ने कहा है कि तुम्हारे अंतिम संस्कार को न दिखाया जाए..तो क्या उसे नेताओं के लिए आरक्षित छोड़ दे हम, समझ नहीं आ रहा दामिनी....जो  सड़कों पर उतर आए क्या उन सभी को नहीं है तुम्हें अंतिम विदाई देने का हक..समझ नहीं पा रहा हूं...

एक चुटकुला चल रहा है कि एक कुतिया के पीछे चल रहे कुतों ने उससे कहा कि घबराओ मत हम कुत्ते हैं भारतीय मर्द नहीं...ये पढ़कर शर्म से सिर झुकाउं कि भारतीय मर्द हूं, या ये सोच कर गर्व से सिर उठाउं कि एक मर्द जो तुम्हारा साथी था, उसने तुम्हें बचाने की भरपूर कोशिश की, पर तुम्हें न बचाने का दर्द लिए अब तक बदहबास है,, ये समझ नहीं आ रहा है दामिनी....और तुम अपनी इज्जत और अपने साथी की जान बचाने दरिंदों से भिड़ी औऱ मर्मांतक पीड़ा आखिरी सांस तक झेली....अब ऐसी बहादूर लड़की कि बहादूरी पर गर्व करुं या सिर्फ आंसू बहाता रहूं. ये समझ नहीं पा रहा हूं दामिनी....

दिल्ली पुलिस आतंकवादियों से लोहा लेते हुए शहर को बचाती है ये सोच कर गर्व से सिर उठा कर चलूं..या नहीं सोच कर सिर शर्म से झुकाए रहूं कि अगर सुप्रीम कोर्ट के काले शीशों वाली बसों और गाड़ी पर पाबंदी के आदेश का दिल्ली पुलिस ठोस कार्रवाई करके सुप्रीम कोर्ट के आदेश का इमानदारी से पालन करती तो तुम बच सकती थी पर ऐसा न हुआ, ये समझ नहीं पा रहा हूं....दामिनी

दामिनी तुम तो चली गई....तमाम कष्ट में भी जीने की चाह होने के बाद भी....पर हम तो चोराहे पर खड़े हैं..समझ नहीं पा रहे कि जाएं तो कहां जाए....आज जाकर पता चला कि तुम एकदम करीब ही रहती थी दिल्ली में...अब ये जानने के बाद शर्म से सिर झुकाउं या नहीं ये भी समझ नहीं आ रहा है दामिनी.....

देखा दामिनी न समझते हुए भी कितना बक दिया है मैने ....अब समझ नहीं पा रहा हूं कि औऱ बकबक करुं या न करुं दामिनि.....?????????????

मां..काश कुछ फिल्मी फरिश्ते मिलते

   पुरानी फिल्मों में फैमली डॉक्टर के हाथ में एक जादू का बक्सा होता था। कैसी भी बीमारी हो , एक गोली देता था , या इंजेक्शन लगाता था और ब...