रविवार, फ़रवरी 24, 2013

Madhubala - हे मेरे खुदा ये बेमिसाल सौंदर्य और दर्द की इतंहा

मधुबाला यानि हिंदी फिल्मों की वीनस की कल जयंती थी....वैलेंटाइन डे को जन्म दिन...और जन्मदिन के महज 9वें दिन जंयती। ये अजीब इतफाक है कि खूबसूरती की इस मूर्ती के जन्मदिन पर पिछले बीस साल से भारत में भी वैलेंटाइन मनाया जाता है...पर उस दौर में दूर-दूर तक कोई इसके बारे में नहीं जानता था। सच में नीली छतरी वाला ऐस-ऐसे करिश्मे दिखाता है जिस देख-पढ़-सुन कर हम लोग हैरत में पड़ जाते हैं।
   ये एक अजीब बात है, या जाने कैसा श्राप रहा उस दौर की अभिनेत्रियों पर...जो जितनी बड़ी स्टार बनी...जितना उसने प्रशंसकों के दिल पर राज किया....उसे निजी जीवन में उतना ही दर्द मिला। भारतीय फिल्मों कि इस वीनस का जीवन भी शोहरत की बुलंदियों और दर्द की गहराइयों के बीच झूलता रहा। जितनी तेजी से लोकप्रियता का ग्राफ चढ़ा, उसी तेजी से निजी जिंदगी में मोहब्बत का दर्द उनके जीवन को नरक बनाता रहा। दिलीप कुमार से मोहब्बत टूटी...किशोर कुमार से प्यार न मिला...भारत भूषण, प्रेमनाथ, मिस्टर लतीफ जैसे प्रेमी मिले...और भी जाने क्या-क्या हुआ उनके जीवन में? वो सब भी सामने आ जाता, अगरचे मधुबाला की लिखी डायरी उनके अब्बा हुजुर औऱ उनके पति किशोर कुमार ने उनके साथ ही सुपुर्द-खाक नहीं कर दी होती।  
   
     ये भी विंडबना है कि मधुबाला को उनके अभिनय से ज्यादा उनके सौंदर्य के लिए ही जाना जाता है। ये भी हैरत कि बात है कि उन्हें अभिनय के लिए कोई अवार्ड नहीं मिला। जबकि मुगले-आजम में तो मधुबाला नायिका अनारकली के किरदार में सम्माहित ही हो गईं थीं...पर ये भी सच है कि दर्शकों का प्यार ही किसी कलाकार के लिए सबसे बड़ा होता है...औऱ ये प्यार उन्हें बेशुमार मिला। मधुबाला को दुनिया से गए 43 साल हो गए हैं...पर दर्शकों के दिलों में आज भी मधुबाला सबसे उपर हैं। प्रशंसकों ने आजतक मधुबाला से ज्यादा किसी हीरोइन को खूबसूरत नहीं माना है। वैसे भी मधुबाला जैसी सादगी, सहजता, भोलापन, मासूमियत, मोहनी मुस्कान और अल्हड़पन किसी हीरोइन में नहीं है। सिर्फ माधुरी दीक्षित की मुस्कान को कुछ-कुछ मधुबाला की तरह माना गया है। 
    आज भी जब बारिश में भीगी किसी लड़की का तसव्वुर किया जाता है तो मधुबाला याद आती हैं। ""आज भी जब कोई लड़की अपनी खूबसूरती पर इतराती है तो तंज कसा जाता है कि देखो छोरी अपने आप को मधुबाला समझ रही है..। अगर कोई लड़का शादी के लिए नखरे करता है तो उसे ताना दिया जाता है भई अब मधुबाला आने से रही..तेरे से शादी करने...।"" उधर सात समंदर पार 1952 में ही हॉलीवुड ने अफसोस जताते हुए कहा था...The Biggest Star in the World, And She's Not in Beverly Hillsमधुबाला की खूबसूरती का आलम ये था कि भारत के पहले रॉकस्टार का तमगा लिए उकने साथी कलाकार शम्मी कपूर उनके सामने अपना संवाद भूल जाते थे। एक साथी कलाकार ने कहा कि दुनिया में ऐसा को कोई कैमरा नहीं जो मधुबाला की खूबसूरती के साथ न्याय कर सके। दूसरे साथी का कहना था कि मेकअप..या बिना मेकअप..या कैसा भी एंगल हो...हर एंगल में मधुबाला की खूबसूरती बेमिसाल है....।
   दिल में छेद की बीमारी के बावजूद हंसते हुए दुनिया का सामना करते रहना आसान नहीं होता। हालांकि एक किताब का दावा है कि जब वो नर्वस होती थीं तो हंसने लगती थीं, मगर इसका मतलब तो ये ही होगा कि वो हमेशा नर्वस रहती होंगी। ये एक कड़वी हकीकत है कि अपने आखिरी 9 सालों में बीमारी के दौरान वो सिर्फ अपने परिवार के बीच एकांत में सिमट कर रह गई थीं। यहां तक कि अंतिम सांस के समय उनके पति किशोर कुमार भी उनके साथ नहीं थे। मुझे हैरत होती है अपने पसंदीदा गायक कलाकार के इस व्यवहार पर। 
    कहते हैं कि बांद्रा के उनके घर अरेबियन विला में आज भी उनकी आवाज गूंजती हैं। असल में मधुबाला जीना चाहती थीं, दुबारा जन्म भी भारत में लेना चाहती थी...दूसरे जन्म में भी अभिनेत्री ही बनना चाहती थीं...शायद ये इतनी अधूरी इच्छाएं ही हों जो आज भी उनके घर में गूंजती हों। खैर जो सच था वो मधुबाला के साथ उनकी डायरी के रुप में दफ़न कर दिया गया। हम तो बस उनकी खूबसूरती...परदे पर उनके अल्हड़पन भरे अभिनय के लिए उनको सदा याद करते रहेंगे....और दुआ करेंगे कि उनकी आत्मा को भगवान शांति दे...आमिन।

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