सोमवार, मार्च 18, 2013

....जाओ हम नहीं खेलेंगे

हमारे कूटनीतिज्ञों और बुद्धिजीवियों का तेज दिमाग !

पाकिस्तान की जनता की चुनी हुई संसद ने भारत के गद्दार अफ़ज़ल गुरु की फांसी को गलत बताया।
प्रस्ताव सांसद फर्जुररहमान ने पेश किया।
कश्मीर में CRPF कैंप पर हमला हुआ जिसमें 5 जवान शहीद हो गए।
पाकिस्तान ने कैदी चमेल सिंह का शव दिल और शरीर के कई हिस्सों को निकाल कर भारत को सौंपा।
इटली ने हमारे मछुआरों के हत्यारों को वापस देने से मना कर दिया है।
हमने पाकिस्तान के साथ हॉकी-सीरिज रद्द की।

ये वो चंद सुर्खियां हैं जो इन दिनों भारत में छाई हुई हैं। हम इसपर काफी सख्त प्रतिक्रिया दे रहे हैं। हम गुस्से में हैं। हमने पाकिस्तान को कह दिया है कि जाओ हम तुम्हारे साथ नहीं खेंलेंगे। इसलिए हमने हाकी सीरिज रद्द कर दी।
""अरे हां याद आया...पिछले साल हमने पाकिस्तान के साथ क्रिकेट सीरिज खेली थी..ताकि पाकिस्तानी बोर्ड की कंगाली दूर हो सके''''''

हमारे यहां एक लॉबी है..जो कहती है कि पाकिस्तान की नागरिक सरकार हमारे से दोस्ती चाहती है। वो शायद सुन नहीं सके कि पाकिस्तान की नागरिक सरकार यानि संसद ने हमारे गद्दार की तरफदारी की है। ये लॉबी फिलहाल चुप है। पर ज्यादा चुप रहना इसने बस की बात नहीं है। 
""अरुंधती राय बयान दे चुकी हैं अफजल गुरु की फांसी के ख़िलाफ''"

इटली के राजदूत के भारत छोड़ने पर सुप्रीम कोर्ट ने पाबंदी लगा दी है..क्योंकि उन्होंने ही सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दिया था कि चुनाव में वोट डालने के बाद दोनो आरोपी भारत को सौंप दिए जाएंगे। ये अलग बात है कि इटली सरकार वोट डालने का इंतजाम दिल्ली में अपने दूतावास में करवा सकती  थी.....पर हम अपनी अच्छी औऱ भोली भाली छवि कैसे टूटने देते। सो उनके आश्वासन को आंख बंद कर मान लिया। 
''''जैसे आंखें बंद करके कबूतर मान लेता है कि बिल्ली गायब हो गई है।'''''

अब इटली अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति के जरिए मामले के हल की बात कर रहा है। मजेदार बात ये है कि अंतर्रराष्ट्रीय कूटनीति का पाठ इटली से ही शुरु होता है। 
'''''इसी का पाठ भारत को पढ़ा इटली अपने  सैनिकों ले गया।'''''

वैसे इटली की मीडिया में भारत के प्रधानमंत्री के सख्त बयान सुर्खियों में हैं। इधर भारत में सभी एयरपोर्ट अलर्ट पर हैं कि इटली के राजदूत बाहर नहीं जा पाएं। वैसे वियना समझौते के तहत राजदूत को कूटनीतिज्ञ अधिकार प्राप्त हैं और हम उन्हें जाने से नहीं रोक सकते। 
'''''हमारे कूटनीति के धुरंधर राजदूत के हलफनामा देते वक्त जिनेवा समझौते को भूल गए थे'''''

वैसे इटली की सरकार का पूराना यूरोपिय घमंड भी सिर चढ़कर बोल रहा है। उनकी नजर में भारत  एक गरीब देश है..तभी तो मारे गए मछुआरों के बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाने की बात कह रहा है इटली। 

इतनी चीजों के बाद हमारी आंखें खुली हैं...(अधमूंदी यानि निर्लिप्त अवस्था में)....कटूनीति के हमारे महारथी परदे के पीछे बैठ कर करारा जवाब देने की तैयारी कर रहे हैं। वैसे कूटनीति भी यही कहती है। अब ये बात अलग है कि वो करारा जवाब क्या होगा....ये जनता को पता नहीं चलेगा....
'''''और बिना करारा जवाब देखे जनता संतुष्ट भी नहीं होगी.....पर जनता की संतुष्टी की परवाह भी किसे है? होती तो ये न होता....वो न होता....ऐसा न होता.....वैसा न होता'''''


मां..काश कुछ फिल्मी फरिश्ते मिलते

   पुरानी फिल्मों में फैमली डॉक्टर के हाथ में एक जादू का बक्सा होता था। कैसी भी बीमारी हो , एक गोली देता था , या इंजेक्शन लगाता था और ब...