सोमवार, अप्रैल 15, 2013

Pran - The Born Villan .. बरखुरदार..नाम तो सुना ही होगा

 बेरहमी...मक्कारी...कुटलिता...अय्याशी....एंड प्राण....बरखुरदार..नाम तो सुना ही होगा...50 से 70 के दशक तक फिर्ल्मी पर्दे पर बुराई का मतलब प्राण था...परदे पर जितनी शिद्दत से प्राण बुरे काम करते दिखते थे...उसी शिद्दत से परदे के आगे बैठे दर्शकों के दिलो-दिमाग में दहशत छाती थी.. दहशत भी ऐसी की उन दो दशकों में प्राण नाम के किसी बच्चे ने शायद जन्म ही नहीं लिया..यानि लोगो ने बच्चों का नाम प्राण रखना छोड़ दिया। 
      किसी कलाकार की अदाकारी को इससे बढ़ा सम्मान और क्या होगा...पर सरकार अब जागी है.. औऱ 93 साल की उम्र में प्राण साहब को फिल्मी दुनिया के सर्वोच्च सम्मान दादा साहब फाल्के पुरुस्कार से नवाजाने की घोषणा हुई...चलिए कम से कम जीते जी ही उन्हें ये सम्मान तो मिल गया...देर आयद दुरुस्त आयद।
    फिल्मी दुनिया में तीन बड़ों राज कपूर...देवानंद..दिलीप साहब...से लेकर शम्मी कपूर जैसे रॉक स्टार तक के सामने बुराई का पहाड़ कोई था तो वो थे प्राण...प्राण साहब जब खलनायक थे...तो उन्होंने लोगो को इतना डराया कि पूछिए मत....पर्दे पर प्राण साहब को देखते ही औरतें बद्दुआ देने लगतीं थीं....पर जब इन्हीं प्राण साहब ने अपना चोला बदला औऱ चरित्र अभिनेता का रुप धरा..तो हर दिल अजीज मंगल चाचा बनते उन्हें देर नहीं लगी...प्राण साहब ने परदे पर दोस्ती का किरदान निभाया...तो शेरखान बनकर पहले यंग एंग्री मैन अमिताभ बच्चन को संभाला....यानि जितना बड़ा स्टार उतने ही बड़े कद में नजर आए प्राण साहब।  कहते हैं कि प्राण साहब ने किसी किरदार को  कभी दोहराया नहीं....यानि परदे पर जिस भी रुप में वो नजर आए.....उनका अंदाज हहर बार जुदा रहा...दोस्ती हो या दुश्मनी..हर बार स्टाइल अलग...
    भारतीय दर्शकों ने जैसा अनूठा सम्मान प्राण को दिया....उसके आगे कोई भी पुरुस्कार मायने नहीं रखता...हते हैं कि एक ही रावण था...उसी तरह 50 से 70 तक के दशक में परदे पर एक ही विलेन था...Born Villan....प्राण। उस दौर में दर्शकों पर फिल्म स्टार की इमेज सिर चढ़कर बोलती थी। लोग फिल्मी इमेज को स्टार के रियल लाइफ से जोड़कर देखते थे। इस कारण प्राण को पर्दे पर देखते ही लोग नाक-मुंह सिकोड़ने लगते थे...रील लाइफ को देखकर लोगो ने रीयल लाइफ में बच्चों नाम प्राण रखना छोड़ दिया..अनजाने में लोगो ने प्राण के अभिनय को अनूठे ढंग से सम्मानित कर दिया..आज तक ऐसा अनूठा सम्मान पूरी दुनिया में किसी अन्य कलाकार को नसीब नहीं हो सका है।
     कहा जाता है कि कई बार कोई चीज मुकर्रर वक्त पर ही किसी को मिलती है..न उससे पहले न उसके बाद...शायद ये प्राण साहब के लिए भी सच बन गया है....शायद समय इस बात का इंतजार कर रहा था कि दादा साहेब फाल्के के पहले कदम के निशान के 100 साल पूरे हों...औऱ वो अपने सबसे प्यारे विलेन को  भारतीय फिल्मों के सबसे बड़े सम्मान से नवाजे.....। 
     हिंदी फिल्मों के विलेन की दुनिया के इतिहास का सबसे सुनहरा पन्ना हैं प्राण साहब। फिल्मी परदे पर बिना किसी लागलपेट और गेटअप के सहारे सबसे खूंखार विलेन प्राण साहब के स्वस्थ औऱ लंबे जीवन की कामना करते हुए उन्हें बधाई सबसे बड़े फिल्मी सम्मान की। 

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