मंगलवार, मई 21, 2013

ये क्या कर डाला श्रीशंत

इज्जत...रास न आई ..श्रीशांत
श्रीशांत के फिक्सिंगकांड में फंसने से करोड़ों लोग स्तब्ध हैं। लोग अबतक समझ नहीं पा रहे कि ऐसा खिलाड़ी जो स्टार है..जो करोड़ो कमा चुका है...वो मैच फिक्सिंग जैसे घिनौने काम से क्यों जुड़ गया? आज की तारिख में किसी खिलाड़ी के लिए मैच फिक्सिंग शब्द गद्दार शब्द से कम नहीं है। मगर कई लोगों पर इसका कोई असर नहीं पड़ता औऱ वो जानते हुए भी इस दलदल में कूदने को तैयार रहते हैं। अब तक मिल रही खबरों के अनुसार श्रीशांत भी चंद मिनटों में लाखों रुपये कमाने के लालच से बच नहीं सके।  
    ये वो ही श्रींशांत हैं जो सचिन तेंदुलकर के साथ ड्रेसिंग रुम शेयर करते हैं.....द्रविड़ की कप्तानी में राज्स्थान रॉयल्स के लिए खेल रहे थे। इतने बड़े खिलाड़ियों की शालीनता और खेल के प्रति ईमानदारी औऱ श्रद्धा श्रीशांत को कुछ नहीं सिखा सकी। श्रीसंत के साथ ही खेल रहे दो अन्य खिलाड़ी अजित और अंकित भी द्रविड़ के  साथ खेलकर भी कुछ न सिख सके। श्रीसंत अगर करोड़ो कमा रहे थे...तो इन बाकी खिलाड़ी भी इतना कमा रहे थे जितना हमारे देश का एक बड़ा तबका जीवन भर नहीं कमा पाता। रणजी और IPL में इन खिलाड़ियों को इतना मिल रहा था जिसमें वो आराम से जिंदगी गुजार सकते थे। बावजूद इसके ये खिलाड़ी करोड़ों फेंस के  साथ धोखा करने से नहीं चूके। 

   
द्रविड़ की शालीनता से भी नहीं सीखा कुछ
नब्बे के दशक में बड़े खिलाड़ियों के फिक्सिंग में फंसने से
भारतीय क्रिकेट की प्रतिष्ठा को धक्का पहुंचा था...लोगों में क्रिकेट की विश्वसनीयता कम हुई थी...उस स्थिती से भारतीय क्रिकेट को सचिन औऱ द्रविड़ सरीखे खिलाड़ियों ने अपने शानादर खेल...संयम औऱ शालीनता से उबारा था। ये इन दो बड़े खिलाड़ियों की बदकिस्मती है कि उनके मैदान में होते हुए.... उनके साथ ही ड्रेसिंग रुम शेयर करते लोग उनके किए कराए पर पानी फेरने की कोशिश कर रहे हैं।
   हालात ये हो गई है कि अगर अब कोई खिलाड़ी गलती से भी कैच छोड़ेगा...कोई खिलाड़ी गलती से नोबॉल करेगा...कोई बल्लेबाज रन आउट होगा..तो भी लोगो को विश्वास नहीं होगा....सब यही मानेंगे कि ये सब फिक्स है। अनिश्चताओं के खेल को लोग अब फिक्सिंग का खेल कहने लगे हैं।

     इस कांड का खुलासा करने वाली दिल्ली पुलिस बधाई की पात्र है। दिल्ली पुलिस आतंकवादियों की कॉल्स का पीछा करते हुए अचानक मैच फिक्सिंग के अपराधियों तक जा पहुंची। ये वही दिल्ली पुलिस है जो 16 दिंसबर से लगातार अदालत और लोगो के गुस्से को झेल रही थी। पुलिस कमिश्नर के चेहरे से जो हंसी गायब हो गई थी...वो मैच फिक्सिंग के खुलासे के बाद उनके चेहरे पर लौट आई है। शायद लोगो में फिर से विश्वास हासिल कर सकने पर भगवान को धन्यावद करने के लिए ही दिल्ली पुलिस कमिश्नर साहब साईं को मत्था टेकने शिरडी पहुंचे। इससे एक बार साबित होता है कि दिल्ली पुलिस मुस्तैद है...बस ये मुस्तैदी दैनिदिन में भी दिखाई दे।

जैंटलमेन गेम हुआ क्लीन बोल्ड
   पकड़े जाने के बाद श्रीशांत जीजू जनार्दन नाम के खिला़ड़ी को इसके लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं...पर ये हकीकत है कि किसी ने उन्हें मैच फिक्सिंग के कीचड़ में कूदने को नहीं कहा था। श्रीशांत के साथ एक लड़की भी थी...वो भी पुलिस की पकड़ मे है। जिससे शायद अय्याशी का एक नया चैप्टर खुलेगा। हालांकि पुलिस इस मसले पर खुलकर कुछ नहीं कह रही..पर मुंबई के होटल के उस कमरे में  मिले कंडोम..जिसमें श्रीशांत ठहरे थे...अपनी कहानी खुद बयां कर रहे हैं। श्रीशांत अय्याशी करना चाहते थे तो करते....कोई फैन उन्हें रोक नहीं रहा था...पर कम से कम लोगो के साथ धोखा तो नहीं करते।
   श्रीशांत ने उन लोगो को धोखा दिया है जो अपना सब कामधाम छोड़कर कर क्रिकेट देखते हैं...लहराते तिरंगे को देखते हैं....जरुरी नहीं कि वो श्रीशंत के प्रसंशक हों...पर ये वो लोग हैं जो क्रिकेट ही खाते हैं..क्रिकेट ही पीते हैं..क्रिकेट ही ओढ़ते हैं...। जो इमानदारी से खेले गए खेल को देखने स्टेडियम जाते हैं या टीवी से चिपके रहते हैं.....ऐसे फैन्स से धोखा देने वाले खिलाड़ियों को किसी भी तरह से माफ नहीं किया जा सकता..ये सभी सजा के हकदार हैं..। 

मां..काश कुछ फिल्मी फरिश्ते मिलते

   पुरानी फिल्मों में फैमली डॉक्टर के हाथ में एक जादू का बक्सा होता था। कैसी भी बीमारी हो , एक गोली देता था , या इंजेक्शन लगाता था और ब...