रविवार, जुलाई 07, 2013

सफलता की कुंजी !!!!


अक्सर...अक्सर....पेशे से इमानदारी निभाना...सालों तक कहीं नहीं पहुंचना होता है....हर साल सैलरी में चंद रुपये बैंक के सधारण ब्याज की तरह जुड़ते रहेंगे...पर बढ़ती मंहगाई तुम्हें ये एहसास नहीं होने देगी की तुम्हारी तनख्वाह बढ़ गई है....शुरुआती दौर में तुम्हारे जोश औऱ सच्चाई की लोग तारीफ करते रहेंगे.....मगर कुछ साल बाद उन्हीं लोगो की नजर में तुम भाषण देने वाले होगे...तुम्हारी पीठ पीछे वही लोग तुम्हें असफलता के लिए दूसरों को दोष देने वाला शख्स कहेंगे....इसलिए मुंह पर कभी सच मत बोलो.....बोलो तो अप्रिय मत बोलो....आंधी में खड़े न रहकर बांस का झुरमुट बन जाओ...जो आंधी के समय झुक जाता है....यानि चुपचाप सब होते देखते रहो...गीता में जो भी कहा गया है वो अक्षरश: उतारने के लिए बड़ा कलेजा चाहिए....अन्याय देखते रहो औऱ बड़े अपराधी बन जाओ....अगर नहीं तो मैदान छोड़ना पड़ेगा....मैदान में खड़े रहे तो देखोगे लोग तुम्हारे इधर-उधर से निकल कर आगे बढ़ गए...तुम वहीं रह गए....सालो बाद तुम सोचोगे कि तुमने लोगो को पहचाने में सच में गलती की? फिर  ऐसा वक्त आएगा जब तुम अकेले खड़े रह जाओगे...तुम्हारे दोस्त भी तुम्हे झक्की समझने लगेंगे....तुमसे कन्नी काट लेंगे....इसलिए दोस्ती में भी सच न बोलो...ये ऐसा समय होगा जब तुम्हारे मन में कुछ भी न हो....फिर भी कोई तुम्हें गलत समझेगा...तुम गुस्से में कुछ दिन चुप रहोगे....फिर तुम्हें पता चलेगा जिनसे तुम नाराज थे..उन्हें तुम्हारी परवाह नहीं....इस वक्त तुम महसूस करोगे कि तुम महज उन अनेक लोगो में हो जिनकी कोई अहमयित नहीं....फिर तुम तन्हाई में अकेले खड़े रह जाओगे...ऐसी मरघट की शांति अंदर छा जाएगी जिससे पीछा नहीं छुड़ा पाओगे...अपने दुख को अपने ही कंधे पर सिर रखकर सहना होगा....इससे पहले की अपने सपनों की लाश अपने कंधे पर ढोने की नौबत आए....बदल जाओ....बेहतर है कि कुछ सबक सीखो...व्यवहारिक बनो...जितना करो..उससे कहीं ज्यादा दिखावा करो...जितना दिखावा करो उससे कहीं ज्यादा हल्ला करो...यानि अपनी मार्किटिंग खुद जमकर करो....यही सफलता की कूंजी है....और इसके  बाद भौतिक जगत में.....You Become Successful

मां..काश कुछ फिल्मी फरिश्ते मिलते

   पुरानी फिल्मों में फैमली डॉक्टर के हाथ में एक जादू का बक्सा होता था। कैसी भी बीमारी हो , एक गोली देता था , या इंजेक्शन लगाता था और ब...