बुधवार, जनवरी 29, 2014

सूरते-हाल-दिल्ली..AAP की सरकार पास

....लेकिन धरना प्रदर्शन न करो

दिल्ली में फिलहाल AAP की सरकार का मूल्यांकन करना बेहूदगी होगी। महज महीने भर में कोई भी चमत्कार भारत के सिस्टम में नहीं हो सकता। फिर भी AAP ने जो निर्णय अबतक किए हैं वो जनता के हित में हैं। AAP सरकार के बिजली और पानी पर लिए गए फैसले की नकल अब सब कर रहे हैं। मुंबई में हास्यापद तरीके से इसकी नकल कांग्रेसी सांसद संजय निरुपम कर रहे तो हरियाणा में हुड्डा महाराज बिजली के बिल कम कर रहे हैं।
   सत्ता संभाले महीना होने के बाद आरोपो की जोरादार बौछार भी केजरीवाल जी महाराज पर हो रहे हैं। लोग कह रहे हैं कि केजरीवाल और कांग्रेस नूरा कुश्ती कर रहे हैं। वैसे कई बार ये आरोप सच भी लगता है। जैसे चुनाव से पहले केजरीवाल शीला दीक्षित को भ्रष्ट बता रहे थे....औऱ अब इस मुद्दे पर वो सवाल करने वालों से ही सबूत मांग रहे हैं। उधर बीजेपी की हालत खिसयानी बिल्ली खंभा नोचे जैसी है। हाथ आई कुर्सी महज चार सीटों से रह गई। लोकसभा चुनाव चंद महीने दूर है...जिसके कारण जोड़तोड़ करके केजरीवाल की सरकार गिराने से दूर भाग रहे हैं।  
   जमीन पर AAP का असर हो रहा है। कई सरकारी कार्यालयों में बिना रिश्वत के काम होने लगे हैं। कुछ स्थानीय डिस्पेंरियों में डॉक्टर नजर आने लगे हैं। विश्वास होता नहीं है ऐसी बातों पर..लेकिन हकीकत यही है। स्थानीय डिस्पेंसरियों में डॉक्टर हैं....मशीनें काम कर रहीं हैं। वैसे ये उन डिस्पेंसिरियों कि रिपोर्ट है जहां AAP के विधायक अपने इलाके में गश्त पर रहते हैं। 400 यूनिट तक के बिजली बिल में छूट से अधिकांश लोग खुश हैं। हां मेनिफेस्टो में किए गए वादों के हिसाब से ये छूट कम है।
   इस एक महीने में केजरीवाल को दो मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। जिसमें पहली और सबसे बड़ी मुश्किल है उनके आपसपास अतिउत्साहित और धैर्यहीन लोगो का जमावड़ा। दिल्ली के कानून मंत्री सोमनाथ भारती महिला आयोग के नोटिस की धज्जियां उड़ाते हैं। उनके पास पतंग उड़ाने का टाइम होता है..लेकिन महिला आयोग के सामने पेश होने का टाइम नहीं है। दूसरी तरफ AAP पार्टी में मौजूद पूर्व राजनीतिक खिलाड़ी दांव-पेंच चल रहे हैं। पार्टी के पहले से ही राजनेता रहे एकमात्र विधायक बिन्नी विद्रोह कर चुके हैं। नतीजतन पार्टी से उनको निकाला जा चुका है। यानि राजनीति के पुराने खिलाड़ी केजरीवाल जी की पार्टी में उठा-पठक मचा रहे हैं।
   केजरीवाल जी कि दूसरी मुसीबत है प्रशासन में कॉन्ट्रेक्ट पर लगे लोग। सरकार बने जुम्मा-जुम्मा चार दिन हुए है...पर कॉन्ट्रेक्ट पर लगे हर महकमे के कर्मचारी धरना दे चुके हैं। ये सभी केजरीवालजी के मुख्यमंत्री बनने के दूसरे दिन ही उनके गाजियाबाद वाले घर के बाहर प्रर्दशन करने पहुंच गए थे। लानत है ऐसे प्रर्दशन करने वालों पर। वैसे इन प्रर्दशनों के पीछे विरोधी दलों का हाथ हो...तो कोई हैरानी नहीं होनी चाहिए।
    कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि महीने भर में केजरीवाल सरकार ने कुछ ऐसे काम किए हैं जिससे जनता को फायदा हो रहा है। फिलहाल जनता इससे ज्यादा कुछ मांग भी नहीं रही औऱ उन्हें पूरा समय देने के मूड में है। वैसे भी दिल्ली की जनता पढ़ी-लिखी है। अब तक के रिकॉर्ड को देखते हुए यहां कि जनता AAP की सरकार को 10 में से 8 नंबर देकर पास कर चुकी है। जो 2 नंबर कटे हैं उसका कारण धरने की राजनीति से लोगो को हुई परेशानी है। यानि आप कह सकते हैं कि केजरीवाल एंड कंपनी की सरकार का अब तक का प्रर्दशन उम्दा है।

मां..काश कुछ फिल्मी फरिश्ते मिलते

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