रविवार, जनवरी 05, 2014

WELCOME 2014...खुशियां बांटते चलो

नए साल के पहले वीकेंड की रात को आप सभी को नए साल की शुभकामनाएं....वैसे ये सब आप तो जानते ही हैं कि मैं देर करता नहीं ..देर हो जाती है। इस बार मैं नए साल का स्वागत ऑफिस में कर रहा था। लगभग 5-6 साल बाद मेरा नया साल ऑफिस में बीत रहा था...वैसे 21 वीं सदी की शुरुआत अपन ने ऑफिस में ही की थी...कहते हैं कि जो पहले दिन किया जाए तो वो साल भर होता है...औऱ हमने तो सदी की शुरुआत ही ऑफिस से की थी। खैर इस बार मैं दुनिया भर में हो रहे नए साल के स्वागत की खबर देने के साथ-साथ देख भी रहा था। न्यूजीलैंड से लेकर भारत तक घड़ी की सूईयां जैसे-जैसे 12 बजाती गई हर जगह haapy new year का शोर मचता रहा....पांच सितारा होटलों से लेकर क्लबों में जहां एक तरफ कमसिन जवानियां अंगड़ाई ले-लेकर जलवा बिखरेती रहीं...तो दूसरी तरफ दुनिया भर के लोग अपने-अपने शहरों के सबसे happening place यानि शहर के दिल में जमा होकर ठंड को अपने जोश से धता बताते रहे...जहां जहां दिल में उमंग थी वहां-वहां हंसी खुशी लोग बांटते रहे।
         
  नए साल की शुरुआत के बाद अपने साथ ऑफिस की कैब में लौटते लोगो के चेहरे पर खुशी थी...पर एक शख्स के मुंह से निकल गया  "यार अपन तो ऐसी तैसी कराकर लौट रहे हैं"...तो दूसरे साथी के मुंह से निकला ""देखो दुनिया मजे ले रही है औऱ हम ऑफिस से लौट रहे हैं।"" ये सुनते ही मुझे लगा कि क्यों न इन लोगो को खुशी की एक छोटी सी डोज दी जाए। बस अपन ने तय कर लिया कि इंडिया गेट के आसपास आइसक्रीम खाई जाएगी। इंडिया गेट के पास के रास्ते पर आइसक्रीम वाला दिखते ही हमने गाड़ी रुकवाई औऱ हल्ला-गुल्ला करते हुए टूट पड़े आइसक्रीम पर। कड़कड़ाती ठंड के बावजूद किसी ने भी आइसक्रीम खाने से इनकार नहीं किया। कोई दस मिनट रुक कर, फोटो खिंचवा कर हमने कैब कनॉट प्लैस की तरफ मुड़वा दी...वहां की रंगत देखकर हमारे दिल ने कहा क्यों न यहां भी फोटो सेशन किया जाए..परंतु हम में से एक शख्स के दिल में उमंग पूरी तरह से लौटी नहीं थी। इसिलए गाड़ी को वहां नहीं रुकवाया गया। जब मैं अपने घर के पास तिलक नगर पहुंचा, तो देखा कि यहां रात दो बजे भी नए साल की रंगत मौजदू थी। ये देखकर मेरे चेहरे की रंगत दोगुनी हो गई। 
   अगले दिन यानि एक जनवरी को फिर सब लोग   ऑफिस में मौजूद थे...शाम को रात की टोली के एक शख्स ने कहा कि रात आइसक्रीम खाकर मजा आ गया औऱ फोटो देखकर पता लगा कि हम लोग नए साल में दुखी नहीं थे। (मैने फोटो को Facebook पर शेयर करते हुए लिख दिया था कि ये गैंग है हिंदुस्तान के उन लोगो का जो देश की होप हैं.मेरी तरह अनेक लोग काम करते हैं ..त्यौहार पर भी औऱ नए साल पर भी ) यही बात जब रात के उदास लोगो ने भी  कही..तो उसे सुनकर अपन हल्के से मुस्कुरा दिए। आखिर अपन की एक छोटी सी कोशिश से नए साल के स्वागत के लम्हों में कुछ साथियों के चेहरे पर चंद लम्हों के लिए ही सही...खुशी तो आई। 
    
   ये ठीक है कि नए साल की रात में कनॉट प्लेस की गलियों में कई लोग रतजगा करते हैं क्योंकि उनके पास ठंड से बचने के साधन के नाम पर सिर्फ अलाव होता है। वहां से कुछ ही दूर रेलवे स्टेशन के पास भी गरीब लोग सड़क किनारे ठंड से जूझते हुए मिल जाते हैं....मगर इससे दिल छोटा करके खुशी को दुख में नहीं बदलना चाहिए। उल्टा अपने दिल की खुशी को अपनी ताकत बनाते हुए छोटी सी ऐसी कोई कोशिश करनी चाहिए जिससे ऐसे लोगो के दिलों में भी खुशी के क्षण पैदा हो सकें....उनमें जिंदगी जीने का हौंसला पैदा हो। नए साल पर कोई बड़ा संकल्प न लेकर हमारी यही छोटी सी कोशिश होनी चाहिए। जाहिर है कि जब दिल में उमंग हो तो खुशियां दौड़ी चली आती हैं...जिंदगी जीने कि हिम्मत बढ़ जाती है। तो दोस्तो नए साल की शुभकामना देते हुए मैं यही दुआ करुंगा कि आप सभी के दिल में उमंग बरकरार रहे....कोई भी काम हो...उसे करते वक्त सबके दिल में खुशी हो...और ये खुशी आप सब में बांटते रहें। आमीन....

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