बुधवार, मार्च 26, 2014

सादगी भरा सौंदर्य - एक थी 'नंदा'

एक औऱ फिल्मी सितारा अनंत आकाश में चमकने के लिए चला गया। खूबसूरत आंखों वाली नंदा(Nanda) ने दुनिया को अलविदा कह दिया। मुझे नंदा जब भी याद आती थीं..तो सीधा ध्यान आता था गाना..न न करके...प्यार तुम्हीं से कर बैठे....करना था इनकार..पर प्यार तुम्हीं से कर बैठे....। बचपन में खूबसूरत औऱ आधुनिक लड़की के तौर पर हमारे सामने सिर्फ फिल्म स्टार ही हुआ करते थे। दूरदर्शन और ब्लैक एंड व्हाइट टीवी के दौर के साथ गुजरा था मेरा बचपन....जाहिर है उस समय हर हीरोइन का खूबसूरत लगना लाजिमी ही था। सालो बाद जब रंगीन टीवी आम होने लगा औऱ घऱवालों से छुपकर सिनेमा हॉल के गलियारों में जाना नसीब हुआ, तब रंगीन परदे पर बचपन में देखे हसीन चेहरे औऱ भी हसीन हो उठे।
 शायद मैं तब 15-16 साल का रहा होउंगा, जब सिनेमा के बड़े पर्दे पर फिल्म देखी जब जब फूल खिले....। न न करके, प्यार तुम ही से कर बैठे(Na Na Karke), “परदेसियों से न अंखियां मिलाना”,(pardesio) एक था गुल, एक थी बुलबुल(Ek Tha Gul)_ सारे गाने ऐसे लगते थे जैसे मेरे लिए ही लिखे गए हों। ऱफी साहब की पुरकशिश आवाज, खूबसूरत शशि कपूर और साथ में आधुनिक और शोख चंचल हसीना नंदा, सबने मिलकर दिल को एक मखमली अहसास औऱ मासूम खूबसूरती से भर दिया था। फिल्म में छाई हरियाली औऱ पहाड़ की खूबसूरती सीधे दिल में उतर गई थी। मेरे जीवन में ये असर इतना गहरा रहा है कि आज भी जब कहीं घूमने जाता हूं तो ये मखमली अहसास से भरी खूबसूरती अपने साथ अपने दिल में लिए चलता हूं। वैसे इस फिल्म का गाना ये समा, समा है प्यार का(Ye Shama, Shama hai) नंदा जी का सबसे पंसदीदा गीत था।
      बचपन मासूम औऱ खूबसूरत होता है। बालमन पर जो सुखद और सहज छाप पड़ती है उसका असर ताउम्र रहता है। ऐसे ही बचपन में मेरे दिल में खूबसूरत फिल्मों का मखमली अहसास जो फिल्म  जब-जब फूल खिलेने जगाया, उसके करीब कम ही फिल्में पहुंच पाई हैं। ऐसे ही एक फिल्म थी तीन देवियां....जिसमें कवि देवानंद का दिल अंत में पहुंचा है सादगी भरे सौंदर्य की मल्लिका नंदा के पास। ये कहना गलत न होगा कि सिनेमा के परदे पर नंदा जगत प्रसिद्ध सादगी भरे भारतीय सौंदर्य की एक पहचान थीं।
      मेरे जैसे आपके तमाम फैन आपके शुक्रगुजार रहेंगे सादगी भरे प्यार के सुखद अहसास से हमारा परिचय कराने के लिए। है शांत, सौम्य और सादगी भरे सौंदर्य की मल्लिका नंदा अलविदा...नीली छतरी वाला आपको सुकुन औऱ शांति दे....हमारी ये ही दुआ है।

मां..काश कुछ फिल्मी फरिश्ते मिलते

   पुरानी फिल्मों में फैमली डॉक्टर के हाथ में एक जादू का बक्सा होता था। कैसी भी बीमारी हो , एक गोली देता था , या इंजेक्शन लगाता था और ब...