शुक्रवार, मई 30, 2014

मोदी और इकोनॉमी


तस्वीर नंबर दो-
नरेंद्र मोदी के  गुजरात मॉडल पर अखबारों औऱ टीवी में तीखी बहस चली...विरोधी लगातार मोदी के गुजरात मॉडल पर हमला बोलते रहे..
"गुजरात मॉडल देश भर में लागू नहीं हो सकता..."
"गुजरात मे पिछली सरकारों के काम का श्रेय मोदी ने लिया है ..."
मोदी ने चुनाव के आखिरी चरण में टीवी को धड़ाधड़ इंटरव्यू दिए...उन्होंने इकोनॉमी पर अपने नजरिए को सामने रखा-
"गुजरात का ढोकला हर जगह चले, जरुरी नहीं"
"हर इलाके की खासियत अलग-अलग होती है..इसलिए उस जगह के हिसाब से डेवलेपमेंट होना चाहिए."
"सरकार कम दिखे, उसके काम ज्यादा दिखने चाहिए"
"युवाओं के हाथ में काम होना चाहिए"
इन लाइनों ने साफ संकेत दे दिया था कि मोदी देश की आर्थिक दशा सुधारने के लिए क्या करना चाहते हैं। दरअसल पिछले कुछ साल से यूपीए-2 सरकार में किसी तरह का कोई स्पष्ट संकेत लोगो को नहीं मिल रहा था। जो काम हुए भी थे, उसका किसी को पता नहीं चल रहा था।
सेकूलर इकोनोमिस्ट को मोदी ने करारा जवाब दे दिया था कि वो गुजरात मॉडल देशभर में लागू नहीं करने जा रहे। बल्कि वो सिर्फ इतना चाहते हैं कि गुजरात की तरह विकास सारे देश का हो। वैसे भी जो एक फॉर्मूले से सफलता पा चुका हो उसे उसपर दुबारा काम करके देखने का हक तो है ही।
अब इसके बाद हमें इतंजार करना चाहिए कि आखिर मोदी इकोनोमी को आगे ले जाने के लिे क्या कदम उठाते हैं? 1991 में लागू हुई मनमोहन सिंह की नीतियां के नतीजे उफान के बाद काफी लंबे समय से थमे हुए थे। उनमें परिवर्तन की जरुरत थी। अब उसमें किस तरह का बदलाव करते हैं मोदी, औऱ बदलाव किस दिशा में इकोनॉमी को ले जाते हैं इसके लिए इंतजार तो करना ही होगा। 

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