गुरुवार, अक्तूबर 02, 2014

बापू-मोदी-सफाई औऱ हम बेशर्म

   बापू का सपना अपना...मोदी की आवाज हमारी। कहते हैं सदियां गुजर जाती हैं...मगर आदते नहीं...कुछ यही हाल है हमारा। साफ सफाई हमारी सनातन परंपरा का हिस्सा थी। 2400 साल पहले चाणक्य ने लिखा मुझसे सदियों पहले हुए ऋषियों की वाणी दोहराता हूं..जिस देश में स्वच्छ पानी, हवा न हो, वहां से प्रस्थान कर जाएं’’। सदियां गुजर गई...हमारी चिंतन परंपरा चोटी बचाने की चिंता में बदल गई। नतीजा हम धर्म से गए...देश से गए। बरसों के बाद फिर से याद आई...धर्म को याद कराने भक्त कवि चैतन्य महाप्रभू आए....धर्मों के मिलन से संत कबीर सरीखे फकीर आए। तीन सदी बाद सुधार के लिए राजा राममोहन राय औऱ ईश्वरचंद विद्यासागर सरीखे सुधारक आए....और आखिर में आए राजनीतिक चिंतक बापू। बापू भारतीयतता की निरंतरता के प्रतीक हैं। 
    बापू ऐसी विशाल छतरी थे, जिसके तले कई विचार इक्ठठे हुए। नतीजा हमारे देश में बिखरी ताकतें एकजुट हुईं। बापू की धूरी के इर्दगिर्द एक समय नेहरू, पटेल, सुभाष, शास्त्री, राजेंद्र प्रसाद जैसे व्यक्तित्वों का विकास हुआ। बाद में इन्हीं लोगो ने अपनी-अपनी अलग लकीरें खींची। सभी में एक बात समान थी, वो ये कि बापू की छाया में ही इन महान लोगो ने अपनी ताकत को पहचाना। बापू के जन्मदिन के ही दिन पैदा होने वाले लाल बहादूर शास्त्री तो सरलता कि मिसाल थे। बिना लावलश्कर औऱ दिखावे के रहने वाले वो इकलौते प्रधानमंत्री रहे हैं। उनसे ज्यादा मितव्ययी प्रधानमंत्री भी देश ने नहीं देखा है। 
      अब भारत इक्सवीं सदी में पहुंच गया है....पर अबतक समाजिक तौर पर हम सफाई पसंद नहीं बने है। इसका उदारहण दिखा देश की राजधानी दिल्ली के राजपथ पर। आज प्रधानमंत्री सफाई कार्यक्रम के बाद राजपथ से निकले ही थे, कि वहां पहुंची जनता गंदगी फैलाते में लग गई। पिकनिक मनाने के बाद कूड़ा पास पड़े कूड़ेदान में डालने तक की जहमत कोई नहीं उठा रहा था। दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका में गदंगी फैलाने पर एक साल तक चक्की पिसनी पड़ जाती है। तो ब्रिटेन में ढाई लाख रूपए तक जुर्माना हो जाता है।
   ये ठीक है कि हमारे यहां सार्वजनिक शौचालय की कमी है। मगर पिकनिक बनाने के बाद कूड़ा फेकने के लिए कूड़ेदान का प्रयोग हम क्यों नहीं करते? हम बड़े बेशर्म हैं। उपर से प्रधानमंत्री स्वच्छता की बात करते हैं, तो नाकभौं सिकड़ोते हैं।  
      हर बात पर सरकार को कोसने वाले लोग खुद कितना सफाई पसंद है। ये तो हर बाजार, पार्क में दिख ही जाता है। हां एक अच्छी बात जरुर हुई है अब गांवों में जिन घरों में शौचालय नहीं होते, वहां लड़कियां शादी करने से इनकार करने लगी है। ये एक कड़वा सच है कि देश में बलात्कार का शिकार होने वाली महिलाओं में खुले में शौच जाने को मजबूर औरतों की तादाद काफी है। जाहिर है कि बापू के कई सपने महाशक्ति बनने को आतुर भारत की राह में महत्वपूर्ण पड़ाव है। 

मां..काश कुछ फिल्मी फरिश्ते मिलते

   पुरानी फिल्मों में फैमली डॉक्टर के हाथ में एक जादू का बक्सा होता था। कैसी भी बीमारी हो , एक गोली देता था , या इंजेक्शन लगाता था और ब...