गुरुवार, अक्तूबर 23, 2014

शुभ दीपावली मित्रों

सभी दोस्तों को दीवाली की शुभकामनाएं। रोशनी का त्यौहार दीवाली हर घर में खुशियां लाए यह प्रार्थना है हमारी। मां लक्ष्मी सब पर कृपा करें। रोशनी का ये त्यौहार काफी महत्वपूर्ण होता है हमारे जीवन में। अगर धर्म से इतर होकर देंखे तो सारे भारतवंशियों के लिए दीवाली सबसे बड़ा त्यौहार माना जाता है। दीवाली के समय मां लक्ष्मी का आगमन बताता है कि जीवन में सफाई, अनुशासन औऱ कर्म काफी अहम है। जिनमें ये गुण होते हैं उनके यहां मां लक्ष्मी मौजूद रहती हैं। । जहां मां लक्ष्मी की पूर्ण कृपा होती है, वहां धन के साथ-साथ सुख औऱ शांति, प्रेम भी होता है। जहां सिर्फ धन हो, वहां मां लक्ष्मी का अंश हो सकता है, पर पूर्ण मां लक्ष्मी नहीं। मां लक्ष्मी ने उन भगवान विष्णु का  वरण किया है जो धैर्यवान हैं, शक्तिशाली हैं, सहनशील हैं, कर्मयोगी हैं। क्या हममें ऐसा कोई गुण है? थोड़ा बहुत गुण हम सब में होता है, जाहिर है उसी तरह से हमें शांति, सुख और धन की प्राप्ति होती है। 
   दीवाली का त्यौहार मेरे अराध्य भगवान राम की घर वापसी का त्यौहार भी है। ये अलग बात है कि गुणों औऱ सामर्थ्य के इस पुरषोत्तम का कोई भी अंश मुझमें नहीं। जीवन में कितने आदर्श हो सकते हैं, कितने कर्तव्य होते हैं, ये भगवान राम के जीवन से सिखा जा सकता है। हर रिश्ता एक मर्यादा में बंधा हुआ। दुश्मन भी दुनिया का सबसे शक्तिशाली औऱ विद्दानों का विद्वान। भक्त भी तो सर्वगुण संपन्न हनुमान।  
    हमारे पूर्वजों ने हर त्यौहार को हमारे जीवन से जोड़ दिया था। दीवाली का त्यौहार ये बताता है कि संसार माया है, बावजूद इसके इस मायावी संसार में अर्थ की उपयोगिता है। इसलिए हमारे पूर्वजों ने जीवन के चारों आश्रम में गृहस्थ आश्रम को सबसे कठिन आश्रम बताया है। गृहस्थ ही संसार की धूरी को आगे बढ़ाता है। इस धूरी में धन भी अहम है। इसलिए संसार मिथ्या कहने वाले देश में धन को खारिज नहीं किया गया। साथ ही धन का सदूपयोग करने के लिए सूझबूझ और  बुद्भी भी काफी जरुरी होती है। इसलिए मां लक्ष्मी के साथ-साथ भगवान गणेश औऱ मां सरस्वती की पूजा दीवाली वाले दिन की जाती है। जाहिर है कि धन होना जरुरी है, धन के साथ बुद्धि होना औऱ भी जरुरी है, बुद्धि सही दिशा में लगे इसके लिए शिक्षा भी जरुरी है। यानि तीनों देवता इंसान को आगे बढ़ने की शिक्षा देते हैं। पूजा करना, एक तरह से अनुसरण करना होता है। 
     
    दीवाली का ये त्यौहार मेरे लिए रोशनी का त्यौहार है, उम्मीदों का त्यौहार है। मैं आजकल तमाम परेशानियों में घिरा हुआ हूं। निराशा के घेरे में भी घिरा हुआ हूं। लोगों की छोटी ओछी हरकतें भी झेलनी पड़ रही हैं। इससे काफी कष्ट भी हो रहा है। हालात ऐसे हैं जैसे हंसने पर पहरा लग गया हो। मैं इतना जानता हूं कि रूपी अंधेरे रूपी निराशा में में उम्मीदों की रोशनी का दिया अंधकार को दूर भगा देता है। यही मेरी क्षमता भी रही है। हालात कितने भी प्रतिकूल हों, कहीं न कहीं आशावाद मेरा साथ नहीं छोड़ता। कहने वाले कहते हैं कि आशा ही निराशा का कारण है। बिना आशा के रहना आम इंसान के लिए संभव नहीं है। एक आम इंसान की हार तबतक नहीं होती जबतक वो आशा करना नहीं छोड़ता। और मैं पूरी तरह से खम ठोक कर कहता हूं कि मैं आम इंसान हूं। ऐसा ही बना रहना चाहूंगा। 
     मेरी प्रार्थना अपने दोस्तों के लिए भी है कि उम्मीदों का दिया उनके जीवन में जलता रहे। जब घमंड रावण का नहीं रहा, तब इस नश्वर दुनिया में हमारे आसपास के कंटकों कि बिसात क्या है। आखिर कुछ तो हमारे अराध्य अपना आशिर्वाद हमें देते ही रहेंगे। मां लक्ष्मी भी अभयदान देंगी ही। आखिर उनका त्यौहार है आज। तो जय श्रीराम दोस्तो, आपको दीवाली की हार्दिक शुभकामनाएं। 

मां..काश कुछ फिल्मी फरिश्ते मिलते

   पुरानी फिल्मों में फैमली डॉक्टर के हाथ में एक जादू का बक्सा होता था। कैसी भी बीमारी हो , एक गोली देता था , या इंजेक्शन लगाता था और ब...