शनिवार, नवंबर 08, 2014

दिग्गज कांग्रेसियों को क्या सांप सूंघ गया है?..... Rohit

     
लगता है कि कांग्रेस को सांप सूंघ गया है। दिग्गज कांग्रेसी लापता हो गए हैं। लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद से ही कांग्रेस के बड़े नेता कम ही दिख रहे हैं। अगर इसकी बानगी देखनी हो तो न्यूज चैनलों पर चल रही बहसों को देखिए। जो कांग्रेसी नेता टीवी चैनलों पर दिख रहे हैं, उनमें से आप कितनों को पहचाने हैं? क्या उनकी कोई राष्ट्रीय पहचान है?  चंद नेताओं को छोड़ दें, तो अधिकतर दिग्गज कांग्रेसी गायब हैं।   
    दिग्गज कांग्रेसी नेताओं के बयान अखबारों मे जरुर छप रहे हैं, मगर उससे ऐसा लगता है कि वो बीजेपी की जगह अपनी ही पार्टी से लड़ रहे हैं। जो बात पार्टी फोरम मे होनी चाहिए, वो मीडिया में उठ रही है। हालांकि लोकतंत्र में ये बातें होती रहती हैं। वैसे कहीं ऐसा तो नहीं कि पार्टी फोरम में मौका न मिलने के कारण ये दिग्गज मीडिया का सहारा ले रहे हों?
     जरा कुछ साल पहले का समय याद कीजिए जब बीजेपी में काफी उठापठक चल रही थी। उसवक्त तत्कालिन कांग्रेसी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि लोकतंत्र में मजबूत विपक्ष का होना जरुरी है। आज स्थिती पलही हुई है। बीजेपी कांग्रेस की जगह राष्ट्रीय स्तर पर काबिज होती जा रही है। 
   मीडिया में नजर आ रहे कांग्रेस के गैर अनुभवी युवा नेता कार्यकत्ताओं में जोश नहीं जगा पा रहे हैं। जनार्दन द्विवेदी, सत्यव्रत चतुर्वेदी, सीपी जोशी सरीखे नेताओं के फिर से बागडोर संभालनी चाहिए। इन लोगों के अनुभव का फायदा कांग्रेस के युवा नेताओं को पहुंचेगा। बाद में यही युवा नेता कांग्रेस में जान फूंकेंगे। 
     ऐसा नहीं है कि केवल दिग्गज कांग्रेसी ही लापता से हैं। कांग्रेस की अगली पीढ़ी के फायरब्रांड नेता की पहचान बना चुके नेता भी राष्ट्रीय पटल से गायब से हैं। सचिन पायलट औऱ अजय माकन जैसे नेता भी नदारद दिख रहे हैं। यही हालत कांग्रेस की महिला नेताओं की भी है। रेणुका चौधरी-अंबिका सोनी सरीखी नेताओं का भी कोई अता-पता नहीं है। कांग्रेस को फिर से युवा औऱ महिलाओं में अपनी पैठ बनानी होगी 
      कांग्रेस किसी विपक्षी एकता की धूरी के तौर पर भी नजर नहीं आ रही। बीजेपी के विरोध के नाम पर स्थानीय पार्टियां जितनी भी एकता दिखा लें, हकीकत यही है कि राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस की अगुवाई जरुरी है। खराब हालत के बाद भी कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर की पार्टी है। फिलहाल कांग्रेस अपनी इस ताकत का इस्तेमाल करती नजर नहीं आ रही। अगर पर्दे के पीछे आने वाले समय के लिए कोई रणनीति बन रही हो तो अलग बात है। इस वक्त जनता औऱ कांग्रेसी कार्यकत्ताओं के बीच कांग्रेसी दिग्गजों का गायब रहना चर्चा का विषय बना हुआ है।
       कमजोर विपक्ष सत्ताधारी पार्टी के लिए भी फायदेमंद नहीं होता। मजबूत विपक्ष सरकार को भी सजग रखता है। विपक्ष परिपक्व लोकतंत्र की एक अहम पहचान भी है। कांग्रेस को नहीं भूलना चाहिए कि 2009 में जनता ने राहुल गांधी की युवा छवि औऱ सोनिया और मनमोहन सिंह के अनुभव को देखते हुए कांग्रेस को 200 से ज्यादा लोकसभा सीटें दी थी। अब 2014 में जनता का ये समर्थन बीजेपी औऱ मोदी के पास है। मोदी का जादू लोगो के सिर चढ़कर बोल रहा है। उनके सामने कोई नेता नजर नहीं आ रहा। यानि फिलहाल मोदी बढ़त बनाए हुए हैं, और कांग्रेस दूर-दूर तक नजर नहीं आ रही। देखना ये है कि कांग्रेस कब तक कोमा वाली स्थिती में रहती है।

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