शनिवार, फ़रवरी 21, 2015

अंडे का दानी फंडा

कितने फंडे हैं एक अंडे में?

क्या शीर्षक पढ़कर चक्कर में पड़ गएकोई बात नहीं खबर पढ़कर मैं भी चक्कर खा गया था। असल में अंडा बेचारा है एक, लेकिन फंडे इसके अनेक हैं। फंडे भले अनेक हों पर एक भी फंडा बेचारे अंडे के हाथ में नहीं होता। उस बेचारे को तो ये भी पता नहीं होता कि उसके अंदर से चूजा निकलेगा या वो फ्राई होगा(पता है फिल्म थ्री ईडियट के गाने की लाइन है ये) या जमीन पर गिर कर फुट जाएगा। कहते हैं कि जब से दुनिया है, तब से दुनिया अंडे का फंडा समझने में लगी है। सवाल वही पुरातन कि पहले कौन आया अंडा या मुर्गी। वैसे सवाल ये भी हो सकता था कि पहले कौन आया अंडा या मुर्गी के साथ मुर्गा। मगर सवाल से मुर्गा इसलिए गायब हो गया, क्योंकि उसकी बिसात कुछ नहीं। दारू पीकर मुर्गा चाहे शेर बन जाए, चाहे जितना मर्जी बेचारी मुर्गी को मार-मार कर उसका भुर्ता बना दे, सिर पर कलगी लगाकर जितना चाहे इतराए (भाई शादीशुदा दोस्तों तुम्हें ही कह रहा हूं), फिर भी अंडा मुर्गी ने ही देना है
मुर्गा-मुर्गी से आगे बढ़ते हैं। हम बात कर रहे थे अंडे के फंडे की। तो भैया अंडे के इतने फंडे की पूछो नहीं। इसके चक्कर में बड़े-बड़े फंसे जाते हैं। अब नार्वे के वैज्ञानिकों को ही लें। वो बेचारे अंडे के फंडे में फंसे तो उसमें से उन्होंने दानी बनाने वाले एक अजीबोगरीब रसायन को ढूंढ लिया। है न हैरतअंगेज बात। मगर बात इतनी सीधी भी नहीं है। असल में इस रसायन के काम करने का फंडा भी अजीब है। शोध के अनुसार ट्रिप्टोफेन नाम के ये रसायन महाश्य पेट में पहुंकर ऐसा लोचा करते हैं कि इंसान का मिजाज दोस्ताना हो जाता है। बंदे में मदद करने की भावना हिलोर लेने लगती है। वैसे ये रसायन महाराज इतनी आसानी से चालू नहीं होते। जबतक नाश्ते में बंदा तीन अंडा न खाए, ट्रिप्टोफेन रसायन का चक्कर शुरू नहीं होता। 

अंडा मुर्गी ने ही देना है

समझ गए न दोस्तो। पोस्ट पढ़ने के बाद अगर आप किसी की जेब ढीली करने की सोच रहे हैं तो उस बंदे को पहले नाश्ते में कम से कम तीन अंडे खिला देना। पर सावधान...!! अंडा बेचारा किसी महाकंजूस को दानवीर कर्ण नहीं बना सकता। वैसे भी जब ईसा मसीह कह गए हैं कि सुई के छेद से हाथी निकल सकता है, पर स्वर्ग के दरवाजे से महाकंजूस पार नहीं हो सकता, तो फिर बेचारे अंडे की क्या बिसात।
अब पोस्ट पढ़कर शाकाहारी लोग वैज्ञानिकों को कोसने न लगना, क्योंकि वैज्ञानिकों ने ये भी बताया है कि दिमाग का दही करने वाला, परोपकार का भाव जगाने वाला ट्रिप्टोफोन रसायन सिर्फ अंडे में ही नहीं, दूध, दही और सोयाबीन में भी विराजमान रहता हैं। अब ये आपकी मर्जी है कि आप सोयाबीन खाकर अपने अंदर सोई हुई परोपकारी भावना को जगाओ या...या किसी को नाश्ते में तीन अंडे खिला कर उसकी जेब ढीली कर दो। 
अब जब इतना पता चल गया तो इसका फायदा उठाना ही होगा। चलो मैं तो चला किसी बकरे को ढूंढने जिसे नाश्ते में तीन अंडे खिला संकू और ....!!!!! 

मां..काश कुछ फिल्मी फरिश्ते मिलते

   पुरानी फिल्मों में फैमली डॉक्टर के हाथ में एक जादू का बक्सा होता था। कैसी भी बीमारी हो , एक गोली देता था , या इंजेक्शन लगाता था और ब...