सोमवार, मार्च 02, 2015

एक ब्लॉगर का कत्ल

  दिल्ली में होली से पहले की बारिश ने दस्तक दे दी है। रात भर हो रही बूंदाबादी ने ठंड को कुछ दिन और रोक दिया है। मैं बारिश से बढ़ी गुलाबी ठंड और हवा के बीच सुबह सड़क पर टहल रहा था। दोनो हाथ जेब में थे। ठीक सामने चाय वाला गर्मागर्म चाय लोगो को दे रहा था। उसे फीकी चाय(बिना चीनी वाली चाय) बनाने को कहकर मैं चलहकदमी करने लगा। बस स्टैंड के नीचे सहयोगी बात कर रहे थे। जैसी बारिश हो रही थी उससे मौसम और मूड दोनों अक्सर रोमांटिक हो जाते हैं।
     खुशगवार मौसम के बावजूद मैं शांत नहीं था। दिमाग में बांग्लादेश में हुआ एक कत्ल उथलपुथल मचा रहा था। वहां अमेरिकी नागरिक और बांग्लादेशी मूल के ब्लॉगर, इंजिनियर और लेखक अविजीत रॉय की सरेआम हत्या कर दी गई थी।(ब्लॉगर की हत्या) उसका सिर्फ इतना दोष था कि वो बांग्लादेश में मुस्लिम कट्टरपंथियों के खिलाफ आवाज उठा रहा था। उसका दोष था कि वो बांग्लादेश की धर्मनिरपेक्ष छवि की वकालत कर रहा था। कोई बड़ी बात नहीं कि ब्लॉगर अविजीत रॉय का एक मुस्लिम लड़की से शादी करना भी इस्लामिक आतंकवादियों को अखरा हो। 
    देश की राजधानी दिल्ली में मुंहअंधेरे ठंड के बीच सड़क पर टहलते हुए मेरे माथे पर पसीना आ गया। बांग्लादेश की राजधानी ढाका में बुकफेयर से लौटते हुए अविजीत रॉय को सरेआम सड़क पर चाकू मारकर कत्ल कर दिया जाता है। उसकी पत्नी को बुरी तरह घायल कर दिया जाता है। वो बेचारी लोगो से मदद की गुहार करती रहती है, लेकिन तमाशबीनों को कोई फर्क नहीं पड़ता।  
    असल में हिंदूओं के लिए बांग्लादेश और पाकिस्तान में हालात बदतर हैं। मुक्तिवाहिनी से मिली हार को मुस्लिम कट्टरपंथी पचा नहीं पाए। नतीजा मुस्लिम कट्टरपंथियों ने बांग्लादेश में हिंदूओं की हत्या करनी चालू कर दी। यानि वही जो पाकिस्तान में हिंदूओं के साथ हो रहा है। 1971 से लेकर आजतक हर अमन पंसद नागरिक उनके निशाने पर है। हर हिंदू उनके निशाने पर है। 
        सवाल है कि जंगलियों, जाहिलों और इस्लामिक आतंकवादियों से क्या पाकिस्तान औऱ बांग्लादेश मुक्त हो पाएंगे? कभी वहां अमन पसंद लोग शांति से सांस ले सकेंगे? पाकिस्तान औऱ बांग्लादेश में हिंदुओ के हालात सुधरेंगे? सड़क पर बूंदाबांदी के बीच टहलते हुए इन सवालों का मेरे दिमाग में एक ही जवाब गूंज रहा था..अंसभव..असंभव....फिलहाल आने वाले सालों में असंभव। आखिर भारत की जमीन पर बने ये दोनो मुल्क हिंदूओं से नफरत करके मुल्क के टुकड़े करके ही बसे हैं। मुल्क से गद्दारी की नेताओं ने, पर उसकी सजा जाने कितनी पीढ़ियों को, जाने कबतक भुगतनी प़ड़ेगी?

मां..काश कुछ फिल्मी फरिश्ते मिलते

   पुरानी फिल्मों में फैमली डॉक्टर के हाथ में एक जादू का बक्सा होता था। कैसी भी बीमारी हो , एक गोली देता था , या इंजेक्शन लगाता था और ब...