सोमवार, अप्रैल 13, 2015

खौफनाक लाइफ का मजा लीजिए-पधारिए अपनी राजधानी

    अगर आप एडवेंचर इन लाइफ के शौकिन हैं, तो बिना देर किए आ आइए धीमी मौत के शहर में। दुनिया में प्रदूषित शहरों में नंबर वन...अपने देश की राजधानी दिल्ली में आपका स्वागत है। घबराइए मत यहां मौत आपको एकदम से नहीं दबोचेगी। आप जैसे जिंदगी में हंसी-खुशी से रहते हैं, मौत भी वैसे ही आपके साथ हंसी-खुशी रहेगी। इसलिए बिन देर किए बोरिया बिस्तर समेटिए और पहुंच जाइए बड़ी बीमारी की नगरी, देश की राजधानी में।
    अगर आप ये सोच रहे हैं कि आप करोड़पति नहीं हैं, तो घबराइए नहीं। आप इसके आसपास के शहरों में भी डेरा डाल सकते हैं, यथा गाज़ियाबाद, फरीदाबाद, गुड़गांव...यानी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के किसी हिस्से में। ठीक दिल्ली की तरह इन शहरों में भी खौफनाक बीमारियों के अनुकुल व्यवस्था की गई है। जैसे बिल्डरों ने यहां मकान बनाए हैं, उसी तरह यहां प्रशासन के साथ मिलकर जनता ने अनुकुल वातावरण बनाया है।
     ये वो ही दिल्ली है, जो यमुना के किनारे बसती है। वही दिल्ली जिसे कहते हैं कि पांडवों ने बसाया था। जो कई बार बसी, कई बार उजड़ी। इसी यमुना नदी को आज के हालात में पहुंचाने के लिए, हम सब पिछले 35-40 साल से मेहनत कर रहे थे। दरअसल इतने ही साल हुए हैं मुझे होश संभाले हुए और तमाम योजनाओं की जानकारी के बारे में। बड़े नालों और सीवर को इतने साल रवानगी के साथ बहते रहने देने के बाद जाकर, हम इस हालात में पहुंचे हैं कि नाले और नदी के फर्क को पाट सके। आखिर हम भेदभाव के खिलाफ जो हैं। 
   आप आइए गार्डन सिटी दिल्ली में। यहा आपको हर तरफ बसाई हुई दिल्ली में पार्क मिल जाएंगे। अगर कुछ कमी रह जाए तो किताबों में देख लेना। तीस साल पुराने हवाई जहाजों से खींचे चित्रों में देख लेना। कसम से जो हरियाली दक्षिण दिल्ली औऱ गुड़गांव के इलाकों में देखने को मिलती थी, वो ही तीस साल पुराने चित्रों में मिलेगी। घबराइए नहीं, गुड़गांव और दिल्ली के आसपास वाली बाकी हरियाली को भी जल्दी ही हम पन्नों में समेट कर ही दम लेंगे।

     वैसे आपको प्राइवेट कोलोनाइजर की बसाई दिल्ली में पार्क ढूंढने कि हिमाकत न करें। अब ये बेचारे दिल्ली पहुंचे लोगो को बसाते या पार्क के साथ घर वाली जैसी लग्जरी पर ध्यान देते। एकाध पार्क अगर दिख जाए तो समझ जाइए कि कौलोनाइजर लापरवाह था, जो जमीन का सदुपयोग नहीं कर पाया। आखिर ये नहीं होते तो दिल्ली में फैले बड़े सारे प्राकृतिक तालाब बेकार ही पड़े रहते। आखिर इन लोगो ने सरकारी अधिकारियों और नेताओं के साथ मिलकर बड़ी मुश्किल से इन्हें पाट कर इन पर घर बसवाए है।  
    अब आप सोच रहे होंगे कि कौन-कौन सी बीमारी से आपका मिलना होगा। तो इतने बेसब्रे क्यों हो रहे हैं? अरे कुछ तो सप्राइज गिफ्ट रहने दो यार। वैसे ज्यादा ही जी मचल रहा हो जानने को तो इतना बता देता हूं ये वो ही महान बीमारियां हैं जो आपको अंतिम समय में लटका-लटका कर मारेंगी। नहीं तो, कम से कम करोड़पति से खाकपति बना देंगी। नहीं तो कम से कम करोड़पति से खाकपति तक का सफर कैसा हो सकता है,इसका अहसास जरुर करा देंगी। इसमें आपका साथ यहां के मंहगे अस्पताल बाखूबी देंगे। बाकी जो सिसक सिसक कर जिंदगी काट रहे हैं उनके लिए बोझ से दबे सरकारी अस्पताल हैं ही।
    ये बीमारियां आपके आसपास के गांवों में डेरा तो डाल ही चुकी हैं। फिर भी शहर में झप्पी लेने का मन हो तो चले आइए देश की राजधानी में। देश के कई जिलों में इन भयानक बीमारियों ने डेरा डाला हुआ था, अब इनके नुमाइंदे पूरी पलटन के साथ दिल्ली भी पहुंच चुके हैं। आखिर देश की राजधानी में पूरे देश के साथ-साथ दुनिया के कई देशों के नुमाइंदे हैं, तो इन बीमारियों के नुमाइंदे भी तो होने चाहिए थे। चलिए कोई नहीं, देर आयद, बेदुरूस्त आयद। तो क्या सोच रह हैं? अरे फिर छोड़िए सब कामधाम और आ धमकिए अपने देश की राजधानी दिल्ली में। 

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