सोमवार, जून 22, 2015

....और सूर्य नमस्कार सांप्रदायिक हो गया!


योग दिवस पूरी दुनिया में मनाया गया, लेकिन इससे पहले सूर्य नमस्कार आसन को लेकर काफी उलट-पलट आसन और बकबक आसन हुए। होना ये चाहिए था कि योग को इंटरनेशनल डे बनने की खुशी में पूरे देश के लोगो को बिना विरोध के एकजुट होना चाहिए था, लेकिन इसपर जमककर सियासत हुई। सियासत सिर्फ इस वजह से कि योग को बीजेपी सरकार और खासकर मोदी ने इंटरनेश्ल योग डे बनाने की वकालत की थी, औऱ इसमें उन्हें कामयाबी मिली। बस इसी वजह से सूर्य नमस्कार के बहाने पीएम मोदी और बीजेपी को अल्पसंख्यक विरोधी साबित करने कि कोशिश की गई। 
योग पर पलटीमार आसन 
      सबसे बड़ी हैरत तो ये रही कि सूर्य नमस्कार को जैसे ही इस्लाम विरोधी साबित करने के लिए अनपढ़ो ने टर्र-टर्र शुरू  की, सरकार समेत स्वामी रामदेव जैसे कई दिग्गज साधु भी दवाब में आ गए। कई संत भी कहने लगे कि योग सिर्फ स्वास्थ से संबंधित आसन ही है। जबकि कहा ये जाना चाहिए कि योग पूरी तरह से सनातन धर्म से जु़ड़ा है, मगर इसे हर धर्म का इंसान कर सकता है। योग के सभी आसनों को सनातन यानि हिंदू धर्म के ऋषियों ने ही विकसित किया था। हमारे ऋषियों ने भगवान से आत्मा के साक्षात्कार के तरीकों में योग को शामिल किया था। 
योग में धर्म औऱ स्वास्थ समाहित
  योग के बारे में हम सब बचपन से पढ़ते आ रहे हैं कि भगवान से साक्षात्कार के लिए योग आसन में संत बैठते हैं। योग से मन संयमित होता है और एकाग्र होकर ईश चिंतन में सहायता मिलती है। कई योग आसनों के साथ मंत्र भी जुड़े हुए हैं। बचपन में ये भी पढ़ा था कि अगर भगवत चिंतन न भी कर पाएं, तो भी योग से कोई नुकसान नहीं, क्योंकि योग से स्वास्थ बेहतर होता है। ऐसे में सूर्य की तरफ करके किए जाने वाले आसन के दौरान आप अगर मंत्रों का उच्चारण नहीं करते हैं, तो भी प्रातःकाल में सूर्य किरणों से नहाए शरीर को कई फायदा होता है। दिनभर घर के अंदर या एसी में रहने वाले लोगों को सूर्य किरण के संपर्क में आने का मौका मिलता है। जाहिर है योग बिना मंत्र के भी असरदार है। इतने स्पष्ट तरीके से योग के बारे में जो बात आम लोग जानते हैं, उसे बड़े आराम से खारिज करने कि कोशिश की गई। 
सूर्य नमस्कार हो गया सांप्रदायिक
   जाहिर है कि इस्लाम औऱ वोट की राजनीति करने वालों ने सूर्य नमस्कार को बड़ी आसानी से सांप्रदायिक घोषित करवा दिया। सूर्य नमस्कार पर इस्लाम के ठेकेदारों ने भी जमकर अपने लोगों को बरगलाया। नतीजा ये हुआ कि सूर्य की तरफ मुंह करके किया जाने वाला योगासन सांप्रदायिक हो गया, इस्लाम विरोधी हो गया। यानि धर्म के इन ठेकेदारों ने जमकर चांदी काटी, औऱ सियासत का शिकार अनपढ़ गंवारों के साथ ही पढ़े लिखे लोग भी हो गए और कई साधु-संत दवाब में आकर पलटीमार आसन करने लग गए। 

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