रविवार, जुलाई 05, 2015

पत्रकारों की मौत का सिलसिला जारी

 
एक और कलम के सिपाही की मौत
आखिर ऐसा क्या हो गया है जो एक के बाद व्यापम घोटाले में मौत होती जा रही है। यही हाल रहा तो जल्दी ही मौत का आंकड़ा 50 पार कर जाएगा। आधिकारिक तौर पर 25 लोगों की मौत हो चुकी है। एक के बाद एक लगातार मौत के बाद भी राज्य सरकार मामले को सीबीआई को नहीं सौंप रही। ये वो घोटाला है जिसमें लोगो का जीवन बचाने वाले डॉक्टरी पेशे समेत कई सरकारी नौकरियों की परीक्षा में धांधली हुई है। किसी परिक्षार्थी के नाम पर किसी औऱ ने पेपर दे दिया। इन परिक्षाओं को आयोजित करने की जिम्मेदारी व्यापम नामक संस्था पर थी। अब इस घोटाले को कवर कर रहे एक युवा पत्रकार अक्षय सिंह की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है।
   अक्षय सिंह व्यापम घोटाले की मृतक नम्रता डामोर के घर मेघनगर गए थे। नम्रता का नाम भी व्यापम घोटाले में आया था, औऱ बाद में उज्जैन में रेलवे ट्रेक के पास उनकी लाश मिली थी। खबरों के मुताबिक इंटरव्यू करने के बाद अक्षय और दो अन्य लोग दोपहर में नम्रता के घर आए थे। इंटरव्यू खत्म होने के बाद उन्होंने किसी को कुछ कागज फोटोकॉपी करवाने भेजा था। इसके बाद अक्षय, डोमार के घर के बाहर इंतजार कर रहे थे, तभी उनके मुंह से झाग निकलने लगा और उनकी मौत हो गई। इसकी जानकारी नम्रता के पिता ने दी है।( नभाटा
   अब सवाल ये उठ रहा है कि क्या पत्रकार की मौत का राज खुलेगा? राज्य सरकार इस मामले को CBI को सौंपने की जगह मीडिया को ही निशाने पर ले रही है। इससे राज्य सरकार की छवि खराब हो रही है। देर-सबेर इसकी आंच मोदी सरकार पर पड़नी तय है। इस घोटाले में 2100 से ज्यादा आरोपी हैं, और 1900 से ज्यादा गिरफ्तार हो चुके हैं। 
  आज हालात ये है कि भारत दुनिया में पत्रकारों के लिए काम करने वाले खतरनाक देशों की लिस्ट में शुमार हो गया है। हो भी क्यों न, जब माफिया के बाद प्रशासन और सियासत पत्रकारों को अपना दुश्मन मानने लगे?नक्सल और माफिया प्रभावित इलाकों में पत्रकारों की जान हमेशा खतरे में रहती है।  
     पत्रकार खबरों को लोगो तक पहुंचाने की कोशिश में जान गंवा देता है। हत्यारों औऱ दरिंदों के संगठन आईएसआई के इलाके में पत्रकार होना सीधे मौत की गोद में जाकर बैठने के बराबर है। दरिंदों औऱ गंवारों की ये फौज कई विदेशी पत्रकारों का सिर कलम कर चुकी है। तो अब क्या ये मान लिया जाए कि भारत में भी अघोषित रूप से रूप बदले ऐसे दरिंदों का राज चलेगा?

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