मंगलवार, जुलाई 28, 2015

न तू ये बनेगा, न वो बनेगा, तू कलाम बनेगा

     इस वक्त अजीब मनोस्थिती है। कुछ घंटे पहले तक पंजाब के आतंकवादी हमले की वजह से मन में काफी गुस्सा था। साथ ही भारत के शहीद वीर सपूत बलजीत सिंह की बहादूरी पर फक्र भी। इसबीच अचानक खबर आई कि भारत रत्न कलाम साहब ने भी दुनिया को अलविदा कह दिया है। अजीब बात रही कि आज एक साथ कई मिसालें सामने आई जो साबित करती हैं कि गद्दारों पर, आतंकवादियों पर, हमलावरों पर देशभक्त हमेशा भारी रहेंगे। 
     एक तरफ सुबह पश्चिमी सीमा पर आतंकवादियों से लोहा लेते हुए एसपी शहीद हुए, तो शाम को पूर्वी छोर पर भारत रत्न ने अलविदा कह दिया। कलाम साहब 100 किलोमीटर सड़क की यात्रा करके छात्रों के बीच पहुँचे थे। वो लेक्चर देने के लिए खड़े हुए, पर बीच में ही उनकी तबीयत बिगड़ गई। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, पर मिसाइल मैन अपनी आखरी उड़ान भर चुके थे। यानि आखिर समय तक वो देश के भविष्य को सुधारने के लिए ही काम करते रहे। कलाम साहब एक ऐसे इंसान थे, जिसको देखकर भारतीय शब्द की परिभाषा को गढ़ा जा सकता है। उनसे बेहतर भारतीय शब्द का जीता-जागता उदाहरण कल तक फिलहाल कोई नहीं था।  कलाम साहब ऐसे इंसान रहे, जिनके पास हर समस्या का वैज्ञानिक समाधान होता था। कोई ऐसा इंसान मिलना मुश्किल है जो एक साथ कई क्षेत्रों में सक्रिय रहा हो। जब वो राष्ट्रपति बने तब एक्सिडेंटल उन्हें राष्ट्रपती कहा गया, पर जल्दी ही उन्होंने साबित कर दिया वो छुद्र राजनीति से ऊपर की चीज हैं, और सही मायने में जनता के राष्ट्रपति हैं।  
    पंजाब के गुरदासपुर में पाकिस्तानी आंतकवादियों की फायरिंग में पूर्व हॉकी खिलाड़ी और वर्तमान में पंजाब पुलिस के एसपी बलजीत सिंह शहीद हो गए। उनके साथ ही तीन और पुलिसवाले और नागरिक शहीद हुए। शहीद बलजीत सिंह के आखिर शब्द थे 'मैं उनको खदेड़ कर ही दम लूंगा, कहकर शहीद हो गए। साथ ही उन्होंने अपने पिता की गौरवशाली परंपरा को भी निभा दिया। उनके पिता भी पुलिस में थे औऱ आतंकवादियों से जंग के दौर में शहीद हुए थे।इस सबके बीच बहादूरी और सजगता की मिसाल बस ड्राइवर नानकचंद ने पेश की। आंतकवादियों ने जब चलती बस में जा रहे नगारिकों पर फायरिंग शुरू की, तो सतर्क ड्राइवर नानकचंद ने असधारण साहस का परिचय दिया। उन्होंने बस की स्पीड बढ़ाने के साथ ही बस को आतंकियों की कार की तरफ भी मोड़ने कि कोशिश की। नानकचंद तेजी से बस को सीधे अस्पताल ले गए, ताकि घायलों को जल्दी से इलाज मिल सके। उधर अत्याधुनिक हथियारों से लैस पाकिस्तानी आतंकी सुअरों से सधारण हथियारों के साथ ही बहादूर पंजाब पुलिस के जवान भिड़ गए। आतंक का ये नजारा 12 घंटे बाद पाकिस्तानी आतंकी सुअरों की मौत के साथ खत्म हुआ। 
    इस वक्त ये सोचने का मन नहीं कर रहा कि पंजाब में सुरक्षा चूक हुई है। बस दिमाग में ये घूम रहा है कि कैसे सबसे ज्यादा धर्मनिरपेक्ष, सबसे बड़ा राष्ट्रभक्त आखिर क्षण तक देश के भविष्य के लिए काम करते-करते ही सबके बीच में ही अलविदा लिया। सच है कि ऐसी ऐसी शानदार मौत विरलों को ही मिलती है। अनवरत देश के लिए काम करते हुए, मानवता के लिए काम करते हुए आखिरी सांस निकले, इससे  बढ़कर सच्चे देशभक्त के लिए बड़ी बात क्या होगी? सच में नियती अपने सपूतों को ऐसी ही गौरवशाली मौत बख्शती है। 

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