सोमवार, अगस्त 17, 2015

मुझे तो घमंड हैं भारतीय होने पर..आप डूब मरिए

courtsey-http://pib.nic.in
    देश की 68वीं स्क्तंत्रता दिवस की सबको बधाई। ये देश हमारा है, हम हर जाति और धर्म के बाद भी पहले भारतीय हैं। ये हम सब का मानना है। हमें भारतीय होने पर गर्व भी है, लेकिन कई लोगों के लिए भारतीय होना ज्यादा गर्व की बात नहीं है। ऐसे लोगों कई स्तर पर, खासकर सोशल मीडिया पर टिका-टिप्पणी भी कर रहे थे। कुछ वेबसाइट पर सीधे-सीधे सवाल पूछा जा रहा था कि क्या आपको भारतीय होने पर गर्व है? आप भारतीय होने के तौर पर कैसा महसूस करते हैं? क्या आप भारतीय होने पर शर्मिंदा हैं? आपको क्यों लगता है कि आपको अपने पर गर्व होना चाहिए? 
      कमाल के सवाल पूछे जा रहे थे। हैरत होती है कि इनका जवाब देने वालों को इसमें कुछ भी गलत नहीं नजर आ रहा था। हमारे देश में कई लोगो को तकलीफ होती है कि भारत में क्रिकेट इतना लोकप्रिय खेल क्यों हैं? कई लोगों का सवाल था कि भारतीयों में फिल्मों का, फिल्मी हस्तियों का इतना क्रेज क्यों हैं? एक से एक ऐसे सवाल पूछे रहे थे, जिनसे सिर्फ भारत की नकारात्मक छवि पेश हो रही थी। खासकर अंतर्रराष्ट्रीय वेबसाइट इस तरह के सवालों से भरे थे। ऐसा लग रहा था जैसे सबका वन प्वाइंट ऐजेंडा था कि हमें भारतीय होने पर शर्मिंदा होना चाहिए। अफसोस ये था कि कई भारतीय इस तरह के सवाल पूछ रहे थे।
     हर देश में अच्छी-खराब बातें होती है। उनको हमें उजागर करके उन्हें दूर करने कि कोशिश भी की जानी चाहिए। न कि इन कमियों की बात की आड़ में हम अपने ही देश को दुनिया में बदनाम करें। चलिए ऐसे ही कुछ सवालों पर, जिनपर लोग भारतीय होने पर शर्मिंदा थे, मैं अपनी बात कहता हूं।  
  • पहला सवाल- क्या मुझे भारतीय होने पर गर्व होना चाहिए?
     दोगले औऱ एहसान फरामोशों का तो पता नहीं, पर मुझे गर्व है कि मैं भारतीय हूं। मैं सिर्फ इसलिए शर्मिंदा नहीं हो सकता कि हमारे देश में जुगाड़ से बहुत काम होते हैं। असल में जुगाड़ से कई बार ऐसे काम हो जाते हैं जो आसानी से संभव नहीं। साइंस एग्जबिशन में जाकर देंखे, ऐसी कई लोग मिल जाएंगे आपको, जिन्होंने रोजमर्रा की जिंदगी में आने वाली मुश्किलों का हल जुगाड़ से निकाला है। हां, मुझे दिक्कत होती है, जब कोई गलत काम को करने का जुगाड़ निकाला जाता है।

  •   दूसरा सवाल-चंद देशों में खेले जाना वाला क्रिकेट इतना लोकप्रिय क्यों है?
courtsey-https://wallpapers99.com
     मुझे ये सवाल ही बड़ा अटपटा लगता है। मुझे क्रिकेट पर गर्व हैं, गर्व क्या, सीधे-सीधे कहूं तो मुझे घमंड हैं। आखिर एक तो खेल है, जिसमें हम सिरमौर रहते हैं। फिर भी जिसमें हम बेहतर हैं, उसपर भी हमें शर्म आनी चाहिए। क्यों भई? यानि जो अच्छा है, उसपर तुम्हारे कहने पर हम मिट्टी डाल दें। कई लोग क्रिकेट को औपनेविशक खेल कहकर नाक-भौं सिकोड़ते हैं। ऐसा तो अंग्रेजी में क्यों बोलते हैं? पता नहीं, इसमें शर्म क्यों आती है इन बेशर्मों को। जरूरी तो नहीं कि जो तुम लोगों को नापंसद हो, उसे कोई पसंद न करें। दुनिया में कई देश शतरंज खेलते हैं। मार्शल आर्ट तो पूरे चीन और जापान में लोकप्रिय है। पोलो भी दुनिया खेलती है। अब जब वो हमारे शुरु किए खेल को खेल सकते हैं तो हम क्रिकेट क्यों नहीं? 
courtsey-tweeter of BigB@SrBachchan
 तीसरा सवाल - भारतीयों में बॉलीवुड क्रेज क्यों है?
    कमाल है यार। तो क्या हॉलीवुड का क्रेज होना चाहिए हमारे यहां?माना हम तकनीकी तौर पर हॉलीवुड के बराबर नहीं हैं, लेकिन हमारी फिल्मों ने परदे पर हमेशा देश की बदलती तस्वीर को जिया है हमारे देश में दिल की भावनाओं को महत्व दिया जाता है। इन्हीं उच्च भावनाओं को हमारी फिल्मों संगीत में पिरोकर दुनिया को समझाया। भले पूरी दुनिया इसे समझने कि कोशिश कर रही हो, पर पूरा एशिया इसे अपना चुका है। आजाद भारत के बाद नेहरू के सपनों का सामजवाद फिल्मों में था। इमरजेंसी के बाद सामजवाद के टूटते सपनों के बीच सबकुछ बदलने कि इच्छा ने ही तो बीसवीं सदी के दुनिया के सबसे बड़े सितारे अमिताभ बच्चन को जन्म दिया था। तो भई मुझे तो बॉलीवुड पर बड़ा गर्व है। हालांकि मैं जानता हूं कि मेगास्टार अमिताभ बच्चन बॉलीवुड शब्द से चिढ़ते हैं। पर क्या करूं, अभी इसके लिए कोई छोटा प्रचलित नाम नहीं गढ़ सके हैं हम। 
  • चौथा सवाल-भारत में महिलाओं पर बहुत अत्याचार होते हैं, क्या हमें शर्म आती है इसपर
        मैं मानता हूं कि महिलाओं पर अत्याचार बहुत होता है। निर्भया कांड पर शर्मिंदा भी होता हूं, कि हमारे यहां दरिंदे भी रहते हैं। साथ ही इसपर गर्व भी होता है कि हमारे पास निर्भया के मित्र के तौर पर ऐसे लड़के हैं, जो लड़ना जानते हैं। दरिंदे तो पूरी दुनिया में हैं। औरतों के मामले में दुनिया के हर विकसित देश में दरिंदों कि कमी नहीं। सबसे बड़ी ताकत के यहां राष्ट्रीय खिलाड़ियों का अपहरण करके बलात्कार होता है।  इराक और सीरिया के रेगिस्तान में वहशी-दरिंदों की फसल ही उगती है। ये दरिंदे 5-5 साल की बच्ची से सामूहिक बलात्कार करते हैं, धर्म के नाम पर। इन दरिंदों को दुनिया की कोई ताकत सजा नहीं दे पाती। हमारे यहां न्यायिक प्रक्रिया में देर जरूर होती है, पर यही  हमारी न्यायिक प्रक्रिया है, जो दुनिया में लोकतंत्र की शान भी है।
  • पांचवा सवाल-हमारे लोकतंत्र में कई खामियां हैं, नेता महाभ्रष्ट हैं

       ठीक है कि लोकतंत्र में भीड़तंत्र हावी होकर बदमाशों को सत्ता में पहुंचा देती है। धर्म के नाम पर इकतरफा वोटिंग भी कई जगह होती है। पर ये हकीकत है कि हम ऐसे लोकतंत्र में रहते हैं, जहां हम अपने मन की बात कह सकते हैं, और जिंदा रह सकते हैं। समस्याएं बहुत हैं हमारे यहां, लेकिन ये सच है कि इसी लोकतंत्र में जीने का सपना दुनिया के कई लोग देखते हैं। हमारे यहां इतनी ताकत है कि हम हर पांच साल में सत्ताधिशों को को हर पांच साल में गद्दी से उतार फेंकते हैं। आखिर लंबे समय से तुष्टिकरण की पैरोकार सरकार को हमने बदला कि नहीं। आखिर दिल्ली में भी भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की बात करने वाले को हमने सत्ता दी। अब अगर विकास के नारे की जगह फिर कोई सरकार धर्म-धर्म जपेगी तो वो भी जनता से मात खाएगी।   
  • छठा सवाल-हमारे यहां नौजवान विदेशी सभ्यता में डूबे हुए हैं
         इस बात को नक्कारा नहीं जा सकता कि हमारे यहां भ्रष्टाचार बहुत है। हमारे देश में भ्रष्टाचार चरम पर है. मगर इससे लड़ने वाले आरटीआई एक्टिविस्ट भी तो हमारे ही देश में हैं। देश के लिए कुछ कर-गुजरने का माद्दा रखने वाले नौजवान देश में है। जरा बाहर निकल कर देखिए, हमारे देश में हजारों नौजवान ऐशोआराम छोड़ कर गांवों की तरफ कूच कर चुके हैं। आप एक ढूंढिए, देश की तस्वीर बदलने में लगे हजारों नौजवान आपको मिल जाएंगे। कमाल है फिर भी आप शर्मिंदा हैं।
      दुनिया में बहुत ही कम देश हैं जिसपर प्रक़ति ने अपना हर रंग उड़ेला हो। अगर आप अमीर नहीं हैं तो भी आपको स्विटजरलैंड न जाने पाने का गम नहीं सताएगा। हिमालय की गोद में प्रकृति ने जी खोलकर अपना प्यार लुटाया है। अगर आपका मन बदले तो उतरिए पहाड़ से और चंद घंटे में पहुंच जाइए जैसलमेर के रेगिस्तान में डिजर्ट सफारी का मजा लेने। रेगिस्तान में रहते-रहते पानी की याद आए, तो निकल पड़िए किसी भी दिशा में।मारे देश को तीन-तीन तरफ से समुद्र ने बेमिसाल सौंदर्य वाले बीच का तोहफा दे रखा है। लेट जाइए कहीं भी समुद्र तट पर जाकर। चाहें तो रामेश्वरम में जाकर तीन समुद्र का मिलन देखिए।
          आजादी के इस पर्व पर इतना ही कहूंगा हजारों परेशानियों के बीच भी हम डटे हैं, दुनिया में प्यार बांटने के लिए। दुनिया को अगर कहीं आशा कि किरण दिखती है, तो भारत में ही दिखती है। शांति की खोज जब भी कि जाती है, दुनिया एकबार भारत की तरफ जरूर देखती है। इसपर आप गर्व कर सकते हैं।

  • अगर आपको फिर भी शर्म आती है भारतीय होने पर, तो एक बार फिर कहूंगा, जाइए और डूब मरिए। 

मां..काश कुछ फिल्मी फरिश्ते मिलते

   पुरानी फिल्मों में फैमली डॉक्टर के हाथ में एक जादू का बक्सा होता था। कैसी भी बीमारी हो , एक गोली देता था , या इंजेक्शन लगाता था और ब...