रविवार, सितंबर 06, 2015

जय कन्हैया लाल की

     
आप सभी दोस्तों को जन्माष्टमी की शुभकामनाएँ। श्री राम और श्री कृष्ण दो नाम, भारत की सनातन परंपरा को चालयमान रखने वाले दो अवतार। हमारे लिए भगवान और दुनिया के लिए कर्म की शिक्षा देने वाले सबसे बड़े गुरू। ऐतिहासिक तौर पर 5000 साल गुजर गए, लेकिन न तो हमारी श्रद्धा बदली, न ही हमारी परंपरा। दुनिया के हर कोने में भगवान ने अपने दूत भेजे, लेकिन भारत में खुद आए। ऐसे ही कर्मभूमि नहीं कहा जाता है भारत को। जब कर्मभूमी भारत है, तो कर्मयोगी भी जाते कहां।   
  आधी रात को कंस के कारागार में जन्म लेकर  नंद बाबा के घर जा पहुंचे कान्हा का पूरा जीवन एक शिक्षा है। कान्हा ने हर अन्याय के खिलाफ जंग की। लगा जब ताकत की अधिकता के कारण योद्धाओं का घमंड पराकाष्ठा पर है, तो उन्होंने महाराभारत रच डाली। नीति और कर्म का ऐसा ज्ञान दिया जो कहीं और नहीं मिलता। 5000 साल पहले कुरूक्षेत्र के मैदान में युद्ध के बीच मोह में फंसे अपने सखा अर्जुन को माध्यम बनाकर कान्हा ने दुनिया में जीने का मंत्र दिया। 
  जीवन का हर रंग कान्हा ने जिया। मथुरा छोड़कर रणछोड़ कहलाए, गोपियों से अठखेलियां की, रासलीला रचाई, राधा से अमर प्रेम किया, कंस का वध किया। योगीराज, कर्मयोगी, गिरिधरनागर जैसे हजारों नाम दिए भक्तों ने। जरासंघ ने 16,000 राजकुमारियों को कैद कर रखा था। जरासंघ के वध के बाद उन्होंने सबको अपनी पत्नी का दर्जा दिया, ताकि लोग उनको लेकर तरह-तरह की बात न करें। 
       आज भारत के दो तरफ दुनिया के सबसे अराजक देश मौजूद हों। एक तरफ अपने ही लोगो की लाश पर चढ़कर परमाणु बम की गीदड़ भभकी देने वाला पाकिस्तान है, तो दूसरी तरफ हजारों अवैध घुसपैठियों को हमारे देश में धकेलने वााला बांग्लादेश है। इन दोनों देश में हिंदु होना मौत की गारंटी है। ऐसे में ये जरूरी हो जाता है कि हम श्रीकृष्ण और श्रीराम के आर्दशों के साथ-साथ उनके कर्म को अपने जीवन में उतारने की कोशिश करें। न तो श्रीराम ने धनुष छोड़ा, न ही श्री कृष्ण ने अपना चक्र छोड़ा। यानि जीवन जिओ खुलकर, हर रंग जियो, बांसुरी बजाओ, प्रेम करो, पर जब जरूरी हो तो महाभारत में उतरने से न डरो। धर्म की स्थापना के लिए अपनों की भी परवाह न करो। 
             मेरी यही दुआ है कि हर भारतवासी चाहे जिस भी धर्म का हो, कान्हा की बात को अपने जीवन में उतार ले। दुनिया को शांति का संदेश भारत ही देगा, मगर उसके लिए हमें खुद भी सशक्त होने पड़ेगा। ताकतवर मगर शांतिप्रिय भारत ही दुनिया का भविष्य है। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो दुनिया में सीरिया की तरह लाशें बिछती रहेंगी। आईएस जैसे हत्यारों और दरिंदों की फौज तैयार होती रहेगी। पैसा कमाने के लिए ऐसे आंतकवादी संगठनों को पैदा किया जाता रहेगा। पढ़ेलिखे अनपढ़ इन संगठनों में मासूमों का खून पीने वाले दरिंदे बनने के लिए तैयार होते रहेंगे। 
  भगवान श्री राम और श्री कृष्ण का जीवन एक शिक्षा है। उसमें छिपे कुछ गूढ़ बातों के अर्थ हमें समझना  होगा। दूसरे धर्म के लोगो को खुले दिल से अपनाना होगा कर्मयोगी के जीवन के संदेश को। तभी भारत एक बार फिर सिरमौर होगा दुनिया का। 

मां..काश कुछ फिल्मी फरिश्ते मिलते

   पुरानी फिल्मों में फैमली डॉक्टर के हाथ में एक जादू का बक्सा होता था। कैसी भी बीमारी हो , एक गोली देता था , या इंजेक्शन लगाता था और ब...