बुधवार, नवंबर 04, 2015

हबीब साहब, ऐसी घटिया बात तो न करो

     आखिर इतिहासकार इरफान हबीब को हो क्या गया है? क्या उनको मतिभ्रम हो गया है? एक सम्मानित, पढ़े-लिखे इंसान होकर आखिर वो कैसी भाषा बोल रहे हैं? मैं आरएसएस का कट्टर समर्थक नहीं हूं। न ही बीजेपी का अंधभक्त। बाबजूद इसके जिसतरह से मोदी के सत्ता में आने के बाद से उनपर सिर्फ हिंदू होने के कारण निशाना साधा जा रहा, उसे देखकर मैं हैरत में हूं। लगता है जैसे किसी खालिस हिंदी बोलने वाले हिंदू के प्रधानमंत्री बनते ही, विरोधियों को धतूरे का नशा हो गया है। विरोधी बौरा कर पिछले डे़ढ़ साल से अनर्गल प्रलाप करने लगे हैं। 
    आखिर प्रोफेसर हबीब को किस नजर से आरएसएस मुस्लिम आतंकवादी संगठन आईएसएस के समकक्ष लगने लगा है? हबीब साहब जरा बताएंगे कब आरएसएस ने बच्चियों से बलात्कार किया है? कब किसी दूसरे धर्म की औरतों को बाजार लगाकर नीलाम किया है? कब दूसरे धर्म के मर्दों और बूढों को जलाकर मारा है हबीब साहब जरा आरएसएस के पूरे इतिहास को भौंडा सेकुलर चश्मा उतारकर खंगालिये। आरएसएस ने कभी अपने प्रचारकों को बलात्कार की शिक्षा नहीं दी है, न ही किसी को जिंदा जलाने की घुट्टी पढ़ाई है। हां, आरएसएस एक हिंदू संगठन जरूर है, लेकिन पढ़े लिखों की जमात है। हबीब साहब, लगता है कि आरएसएस के बहाने आपने मेरे जैसे हिंदूओं को गाली दी है, जो बीजेपी के अंधभक्त न होने के बावजूद तुष्टीकरण की नीति के सख्त खिलाफ है। आपने हमारे जैसे हिंदूओं को आतंकी संगठन के दरिंदों के बराबर खड़ा कर दिया है।        हबीब साहब, आईएसएस एक खालिस इस्लामिक आतंकवादी संगठन है। जो अपने ही धर्म के लोगो का सगा नहीं है। आईएसएस के 50-50 बहादूर लड़ाके मिलकर 5 से 10 साल की बच्चियों के साथ सामूहिक बलात्कार करते हैं, वो भी लगातार, कई दिन तक। फिर जब उस बच्ची को पूरी तरह से नोच खसोट लेते हैं, तो भेड़-बकरियों की तरह बेच देते हैं। हबीब साहब, आईएसएस वाले दूसरे धर्म के मर्दों को जिंदा जला देते हैं, या गला रेतकर उनकी हत्या कर देते हैं। हैरत है हबीब साहब, कैसे आपको आरएसएस की सोच और आईएसएस के जंगली, लूटरे, हत्यारे, बलात्कारी, आतंकवादियों की सोच एक जैसी लगने लगी है?
     हबीब साहब आपको बलात्कारियों और आरएसएस के प्रचारक एक जैसे कैसे लगने लगे हैं? जरा बताएंगे? मैं आरएसएस का सदस्य नहीं हूं, लेकिन मैं ये बात अच्छी तरह जानता हूं कि आरएसएस के प्रचारक लंगोट के पक्के हैं। ऐसे एक नहीं, कई प्रचारकों से मेरा पाला पड़ा है। अगर, एक बार फिर कह रहा हूं कि अगर, चंद पथभ्रष्ट लोग आपकी नजर में गुजरे हों, तो भी आपको कोई हक नहीं कि आप पूरे हिंदू संगठन को चरित्रहीन, हत्यारा कहने लगें, ठीक उसी तरह जैसे आईएसएस के बलात्कारियों को आपसे या सारे मुसलमानों से नहीं जोड़ा जा सकता। हबीब साहब भारत के नब्बे फीसदी मुसलमान शुद्ध भारतीय नस्ल के है, कृपया करके उनको बरगालिये नहीं।  हबीब साहब सिर्फ विरोध के नाम पर कुछ भी प्रलाप करना नहीं चाहिए। 
        सम्मान लौटाना विरोध का एक असरदार तरीका होता है, पर अफसोस कि इसको भी सो कॉल्ड सेकुलरों ने तुष्टीकरण का साधन बना लिया है।। कश्मीर में महज 3 हज़ार 445 कश्मीरी बचे हैं। उनपर जो हमला हुआ, क्या उससे भी बदतर हालात है देश में? क्या कश्मीरी पंडितों पर हुआ अत्याचार पुरस्कार लौटाने वालो को नजर नहीं आया? लानत है ऐसे विरोधियों पर। 

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