रविवार, जनवरी 03, 2016

2016 की शुरूआत, पाकिस्तानी कुत्तों के आतंकी हमले के साथ

      नया साल शुरू हो गया है। सारी धमाचौकड़ी मचाने के बाद फिलहाल ऑफिस के रूटिन में लौट आया हूं। कुछ लोगो का नया साल अभी चालू है। आखिर वीकेंड बाकी है। लोग परिवार के साथ बाहर गए हुए हैं। पहाड़ों पर बर्फ से बात कर रहे हैं। तीर्थस्थल पर बच्चों को देश की आध्यात्मिक विरासत से परिचत करा रहे हैं। एक साथ अपनी विरसात और ग्लोबल होते भारत का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। भले ही कूपमंडूक नए साल के नाम पर नाक भौं सिकोड़ें। भले वो कहें कि नए साल का फंडा सिर्फ कंपनियों की सामान बेचने की मार्कंटिंग है।
   हर नई चीज का स्वागत करना भारत की परंपरा रही है। हम भारत के लोग उत्सवधर्मी होते हैं। इसलिए संभवत: हमारे यहां इतने त्यौहार हैं, जितने दुनिया के किसी देश में नहीं। हमारे यहाँ हर चीज को जीवन से जोड़ कर रखा गया। भारत का हर त्यौहार अर्थशास्त्र और जीवन को आगे बढ़ाते रहने वाला इंजन है। प्राचीन काल से राजनीतिक बाधाओं के बाद भी भारत में उत्तर से दक्षिण तक तीर्थ यात्राएं बेरोक-टोक जारी हैं। इसी बहाने लोग पूरे जम्बूदीप की खबर रखते थे। उन्हें भले दुनिया के सम्राटों-अमीरों की खबर न हो, पर उन्हें ये पता रहता था कि अमुक साधु कहां निवास करते हैं।  
          इसी परंपरा को निभाते हुए नए साल की शुरूआत भारत में शांति से हो रही थी, पर सरहद पार के सुअरों को शांति पसंद नहीं। नए साल की पहली रात को ही पाकिस्तानी आतंकियों ने पठानकोट एयरफोर्स के अड्डे पर हमला कर दिया। हमले में हमारे कई जवान शहीद हो गए। इस हमले के दौरान एक पाकिस्तानी सुअर अपनी मां से बात भी कर रहा था। जो कह रही थी कि बेटा मरने से पहले खाना खा लेना।  हैरत है कि कैसे एक मां अपने बेटे को नीच दरिंदा, हवसी बना सकती है। ये एक दुखद संयोग है कि दो आतंकी हमलों में हमने दो खिलाड़ी सुरक्षाकर्मि खो दिए। गुरदासपुर में हॉकी खिलाड़ी पुलिस आफिसर बलजीत सिंह सीनियर, और अब पठानकोट हमले में कॉमनवेल्थ गोल्ड मेडलिस्ट शूटर सूबेदार मेजर फतेह सिंह शहीद हुए हैं।
     हमले से अभी हमारे जवान निपटे भी नहीं हैं कि विपक्षी नेताओं को सियासत का मौका भी मिल गया। हमले की आड़ में विरोधी नेता पीएम मोदी के कूटनीतिक पाकिस्तानी दौरे को निशाने पर ले रहे हैं। राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, पर उसका भी कोई समय होता है। हमारे विपक्षी नेताओं पर पाकिस्तानी ही हंस रहे हैं। विरोधियों का तर्क है कि विपक्ष में जब भाजपा थी, तो वो भी यही करती थी। यानि कि अगर वो गलती करती थी, तो आप भी करें। कमाल का तर्क है ये!!!!
       दुनिया जानती है कि कूटनीतिक कदमों का खुलासा नहीं किया जाता। पीएम मोदी ने लोकसभा चुनाव से पहले ही कह दिया था कि आतंकवादियों पर कार्रवाई ढिंढोरा पीट कर नहीं की जाएगी। अब उनके विरोधी पूछ रहे हैं कि अबतक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? पर वो ये नहीं बताते कि 25 साल में वो पाकिस्तान में छुपे अपराधियों को क्यों नहीं मार पाए? खबरों के मुताबिक तो दाऊद कब का मारा जाता, मगर कई बार खुफिया एजेंसियों के निशान पर आने के वावजूद वो इसलिए बच गया, क्योंकि ऐन वक्त पर किसी न किसी आका ने ऑपरेश्न रूकवा दिया था।   
    पीएम मोदी का पाकिस्तान जाना उनकी दिलेरी दर्शाता है। मोदी इस्लामिक आतंकियों के निशाने पर हैं, फिर भी उन्होंने पाकिस्तान का दौरा किया। पीएम के इस स्ट्रोक से आतंकवादियों और आतंकियों के हिमायती पाकिस्तानी फौजियों में खलबली है। पीएम मोदी के दौरे से हाफिज सईद जैसों की रूह कांप गई। जब मोदी ने चुनाव से पहले कहा था कि कई बातें प्रेस को बताने की नहीं होती, तब उनके इस बयान मात्र से आतंकियों की रीढ़ की हड़़्डी में पसीना आ गया था। 
       कोई माने न माने, मोदी के पीएम बनते ही दुनिया में भारत का रूतबा बढ़ा है। इसलिए राजनीति को सिर्फ घरेलू मोर्चे पर ही रहने दिया जाए तो बेहतर है। वैसे हकीकत यही है कि मोदी का पीएम बनना इन्हें अबतक पचा नहीं है। पहले साल ये रंगे सियार कठमुल्ले और कथित सेकुलर चुप रहे। फिर जैसे ही दिल्ली और बिहार में बीजेपी चुनाव हारी, ये कठमुल्ले और सेकुलर मोदी पर निशाना साधने लगे। बिहार में बीजेपी की हार के बाद एक मौलवी साहब गरज-गरज कर कहने लगे कि देख ली हमारी ताकत। सच है की उन्होंने अपनी औकात दिखा दी, लानत है ऐसे लोगो पर। जब ये कठमुल्ले अपने धर्म की बात करें, तो कोई आफत नहीं आती, लेकिन एक पीएम ने अपने को हिंदू क्या बोल दिया, इनके पेट में मरोड़े उठनी लगी। लानत है ऐसी सोच वाले लोगो पर। इन सबको चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए, पर ऐसे लोगो को देखकर चुल्लू भर पानी भी शर्म के मारे सुख जाएगा।
     चिंता की बात ये है कि दोगले कठमुल्लों के प्रोपगेंडे में पढ़े-लिखे लोग भी आ गए हैं। सच है कि जबतक मुहम्मद बिन कासिम और सोमनाथ मंदिर को तोड़ने वाले महमूद गजनवी को हीरो मानने लोग हमारे मुल्क में है, गद्दार हमारे मुल्क में हैं, पाकिस्तानी आतंकियों को मदद मिलती रहेगी। आईएस जैसे दरिंदे हत्यारों की फौज को लड़ाके मिलते रहेंगे। 

मां..काश कुछ फिल्मी फरिश्ते मिलते

   पुरानी फिल्मों में फैमली डॉक्टर के हाथ में एक जादू का बक्सा होता था। कैसी भी बीमारी हो , एक गोली देता था , या इंजेक्शन लगाता था और ब...