बुधवार, अप्रैल 20, 2016

लड़की छेड़ें मनचले, दोष सेना पर...जनाब यही कश्मीर है

      दुनिया में कई देशों में लड़कियों से छेड़छाड़ होती है। कई इसे नजरअंदाज कर देती हैं, तो कई बार छेड़खानी करने वाले सरेआम पीटते हैं। मनचले जब भीड़ के हाथ चढ़ते हैं तो भीड़ हाथ के हाथ न्याय कर देती है। कई बार लड़कियां भी मनचले की जूतियों से आरती उतार देती हैं। सरेआम ऐसा न्याय मिलने के बाद लड़कियां भी मामले को तूल नहीं देतीं। मामला रफादफा हो जाता है। कई बार मामले थाने तक पहुंचते हैं। मनचलों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई भी होती है। सारी दुनिया में लगभग ऐसा ही होता है, लेकिन कश्मीर में ऐसा नहीं होता। कश्मीर में छेड़छाड़ से लेकर, किसी को छींक भी आती है, तो उसकी जिम्मेदार सेना होती है। ठीक उसी तरह जैसे अगर कोई दलित या अल्पसंख्य समुदाय का आदमी मरता है तो दोषी पीएम नरेंद्र मोदी होते हैं। 
        हर बात के लिए सेना को जिम्मेदार ठहराना गद्दारों के साथ-साथ वहां के कई स्थानीय नेताओं का पुराना शगल है। हिंदवाड़ में हुई छेड़छाड़ की घटना भी इसी का एक उदाहरण है। हिंदवाड़ में एक लड़की से छेड़छाड़ स्थानीय आवारा लड़ते करते हैं। वो कई दिनों से उस लड़की से दोस्ती करना चाहते थे। उसके मना करने पर आवारा लड़कों ने लड़की से छेडछाड़ और मारपीट की। लड़की के जोरदार विरोध के बाद, शायद सच्चाई छुपाने के लिए, लड़को ने सेना को इसमें घसीट लिया। पिटने के डर से सारी तोहमत वहां मौजूद सेना के जवान पर मढ़ने की कोशिश होती है। मिनटों में आवारा लड़कों के हिमायती जमा हो जाते हैं। भीड़ उस आवारा को पीटने की जगह हिंसक तरीके से प्रदर्शन करते हुए सेना पर हमला करने की कोशिश करती है। ऐसे में सेना भीड़ को तीतर बीतर करने के लिए फायरिंग करती है, जिसमें कुछ लोग मारे जाते हैं।
    बस यहीं से पाकिस्तान के खरीदे गुलामों और आतंकियों की कठपुतली बने नेताओं का हल्ला-गुल्ला शुरू हो जाता है। सच्चाई दबाने की कोशिश होती है, मगर छेड़छाड़ का शिकार हुई लड़की दबने से इनकार कर देती है। वो पुरजोर आवाज में सेना का समर्थन करती है। वो सच बताती है कि छेड़छाड़ सेना के जवान ने नहीं की थी, बल्कि स्थानिय आवारा लड़कों ने की थी। वो उसपर उनसे दोस्ती करने का दवाब बना रहे थे। जब उसने विरोध किया तो आवारा मनचले लड़कों ने उससे मारपीट की। उसने कहा कि 12 अप्रैल को उससे तब छेड़छाड़ हुई थी, जब वह हंदवाड़ा शहर के एक सार्वजनिक शौचालय से बाहर आ रही थी। तमाम दवाब के बाद भी लड़की ने अपना बयान नहीं बदला। पुलिस और फिर मजिस्ट्रेट के सामने लड़की सच पर कायम रही। इतना हंगामा मच जाने के बाद जम्मू-कश्मीर की पुलिस ने दो आरोपियों में से एक हिलाल अहमद को गिरफ्तार किया।  
     दाद देनी होगी उस लड़की की बहादूरी की। जिसने इतने दवाब के बाद भी झुकने से इनकार कर दिया। अब सवाल ये है कि क्या नई मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती उस बयान के लिए खेद प्रगट करेंगी, जो उन्होंने जांच से पहले ही दे दिया था। क्या राज्य सरकार उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करेगी जो सेना को बदनाम करना चाहते थे? वैसे सब जानते हैं कि इन सवालों का जवाब है-नहीं। 

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