शुक्रवार, जून 03, 2016

...अलिवदा कहना पड़ेगा गोल्डन भाई

courtsey-twitter.com/preeti_simoes से साभार
दुनिया में कई  कलाकार होते हैं, जो बड़े सितारे नहीं होते। कई कलाकार फिल्मों में छोटे-मोटे रोल करके चुपचाप दुनिया छोड़ देते हैं। कई कलाकार ऐसे होते हैं, जो कई छोटे-बड़े रोल करके भी अनजान रह जाते हैं। लेकिन कहते हैं कि कलाकार वो होता है जो छोटे रोल में भी जान डाल देता है। इन कलाकारों का स्क्रीन पर आना, चेहरे पर मुस्कान की गारंटी होता है। कल दिवंगत हुए अपने रज्ज़ाक खान भी ऐसे ही बेजोड़ कलाकार थे। कई छोटे, बड़े रोल में अपनी जानदार एक्टिंग के कारण रज्जाक खान कभी अनजान चेहरा नहीं रहे। फिल्मी पर्दे पर बादशाह शाहरूख की फिल्म से लेकर टीवी के कॉमेडी किंग कपिल शर्मा के शो तक, गोल्डन भाई का जलवा कायम रहा। 
   रज्जाक खान की खासियत एक और रही। उनको उनके असली नाम से कम, फिल्मी किरदारों से लोग ज्यादा जानते थे। कम से कम मैं तो ये कह सकता हूं। कभी मुन्ना मोबाईल, तो कभी गोल्डन भाई। इन्हीं किरदारों की बदौलत सिनेमा के बड़े पर्दे से लेकर, टेलीविजन के स्क्रीन तक वो दर्शकों के चहेते किरदार बने रहे। क्या ये ही वो प्रशंसा के बोल नहीं होते, जिनके लिए कलाकार जीता है। क्या ये हर एक्टर की दिल्ली ख्वाहिश नहीं होती? कोई अथाह पैसा कमा ले, अगर दर्शक उसके किरदारों को याद न रख पाएं, तो क्या एक्टिंग। बताइए अपने काम से लोगो के चेहरे पर मुस्कुराहट ला देना क्या आसान है? किसी दुखी को हँसाना इबादत से कम नहीं। तभी तो निदा फाजली कहते हैं-
घर से मस्जिद है बहुत दूर, 
चलो यूं कर लें,
किसी रोते हुए बच्चे को हंसाया जाए
तो निंजा चाचा, बाबू बिसलरी अब खुदा के दरबार में अपनी महफिल सजाने चल दिए है। सच में, मुन्ना मोबाइल भाई....आपने बड़ा काम किया है....दुनिया आखिर पर सफर अकेले जाती है, पर आपके साथ हमारे जैसे लाखों दर्शकों की दुआएं हैं....आमीन

मां..काश कुछ फिल्मी फरिश्ते मिलते

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