शुक्रवार, अगस्त 12, 2016

शांति..शांति..ये कैसी है पहेली

    कई बार जीवन में आसपास की घटनाओं पर इतना शोरगुल मचता है कि कुछ कहना-सुनना बेकार होता है। इन हालात में इंसान की समझ में नहीं आता की वो बोले या चुप रहे। कई बार बंदा बातें तो बहुत करता है, पर जो कहना होता है, वो कह नहीं पाता। असली बात इधर-उधर हो जाती है। कई बार तो बात का उल्टा मतलब निकल जाता है। फिर समझ नहीं आता कि हर हर बात पर प्रतिक्रिया दी जाए या नहीं।
  इन हालात में बेहतर है कि चुप ही रहा जाए। करना ये चाहिए की दिमाग में चल रहे विचारों के अंधड़ को चलने दो। उसे शांति से देखते रहो, बिना कुछ सोचे विचारे। ये विचार धीरे-धीरे रूक कर आकार लेने लगते हैं। बाद में आपका मन उन्हें आपके सामने सलीके से पेश कर देता है। देखा जाए तो ये एक तरह की साधना है। लिखने-पढ़ने वाले लोगो के साथ ये समस्या अक्सर आती है। उसमें विरला ही कोई होता है जो इन सबके बीच रास्ता निकाल लेता है। जो ऐसा कर लेता है, वो प्रेमचंद बन जाता है। 
    अनजाने में ये साधना हर कोई कभी-न-कभी करता ही है। जब अंदर चलने वाली उधेड़बुन बेचैन कर देती है। ऐसे में इंसान कई बार कड़वे निर्णय लेे लेता है। ये निर्णय कभी कभी किसी न किसी करीबी को नाराज कर देता है। वैसे कहते हैं कि जो अपने होते हैं, वो नाराज नहीं होते। मगर 21वीं सदी में ये बात लगभग दम तोड़ चुकी है। 
    कठिन समय में आपका व्यवहार लोगो को अजीब लगने लगता है। आपको समझने वाला नहीं मिलता। कहने को कर्मठ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए आपको बहुत लोग भाषण पिला देंगे। मगर ये शब्द भी ज्यादा मदद नहीं करते। मैं ऐसे शब्दों को स्वंयसिद्ध शब्द कहता हूं। ये शब्द तब जादूई प्रभाव डालना शुरू करते हैं, जब आप अपने को इसके लिए तैयार करते हैं। यानि एक तरह से कर्म की साधना। 
  इस स्थिती में मुझे बुद्ध का कहा याद आ रहा है-अप्प दीपो भव:। यानि अपने दीपक आप बनो। सवाल ये है कि क्या हर कोई ऐसा कर पाता है ? जवाब है नहीं। आम इंसान जीवन के छोटे-छोटे पल में ऐसा करने में कभी-कभी कामयाब होता है। इस साधना का ऊपर का स्तर इंसान को बुद्ध बना देता है, पर सच ये है कि बुद्ध सदियों में एक होते हैं। अब हर कोई बुद्ध नहीं हो सकता। अगर ऐसा होता तो न आज सीरिया होता, न अरब में खूनखराबा होता। खैर अपने अंदर का हाल कई दिन से बेहाल चल रहा है।

मां..काश कुछ फिल्मी फरिश्ते मिलते

   पुरानी फिल्मों में फैमली डॉक्टर के हाथ में एक जादू का बक्सा होता था। कैसी भी बीमारी हो , एक गोली देता था , या इंजेक्शन लगाता था और ब...