मंगलवार, सितंबर 27, 2016

ओ गाइड आपके सपने, अब हमारे हैं

देवानंद साहब जब तक जिए, तब तक जिंदादिल रहे। स्टार का रूतबा उनसे कभी नहीं छिना। मरते दम तक वो स्टार हीरो ही रहे। अमूमन दुनिया को इसकी कोई परवाह नहीं होती कि उनके जाने के बाद दुनिया का क्या होता है। लेकिन देवसाहब उन लोगो में थे, जो चाहते थे कि वो हमेशा अपने चाहने वालों की नजर में जिंदादिल, हंसते, मुस्कुराते रहें। जब भी लोग उन्हें याद करें, हमेशा ऊर्जा से भरा हुआ पाए। यही कारण रहा कि जब उन्होंने दुनिया छोड़ी तो उनकी इच्छा अनुसार उनका दाहसंस्कार लंदन में ही कर दिया गया। वो भी बिना किसी तामझाम के। इस बहाने वो हिंदुस्तानी फिल्मों के दर्शकों के जेहन में देवानंद हमेशा के लिए हंसते मुस्कुराते रूप में बस गए। जब भी कोई उन्हें याद करेगा, फिल्मों में, पत्रिकाओं में, या प्रेस वीडियो में, कहीं भी उनको चिर निद्रा में सोया नहीं पाएगा। ये उस पीढ़ी के अधिकांश सितारों का अपनी याद बनाए रखने का एक खास स्टाइल रहा है। उस पीढ़ी के स्टारों का जो तरीका था, जो स्टाइल था, वो कब उनके प्रशंसकों का हिस्सा बन जाता था, उनको भी पता ही नहीं चलता था। इसी स्टाइल को, इसी ऊर्जा से भरी यादों को उनके प्रशंसक अपनी अगली पीढ़ी को धरोहर के रूप में सौंप देते हैं। याद कीजिए फिल्म स्टार साधना को। जिनकी सादगी उनका स्टाइल बन गई थी। उन्होंने अपने जीवन में सिर्फ हीरोइन का ही रोल किया। जब उन्हें लगा कि अब उम्र हीरोइन बनने की नहीं रह गई, तो उन्होंने बहन, भाभी या मां के रोल करने की जगह फिल्मों को अलविदा कहना बेहतर समझा। इस तरह उनकी याद हमेशा लोगो के जेहन में हीरोइन के तौर पर रही। इसी तरह राजकुमार की इच्छा के अनुसार उनकी मौत के बाद ही इस दुखद खबर की जानकारी प्रेस और प्रशंसकों को दी गई। 
    यहां पर देवानंद के दौर के तीन बड़ों में ही शामिल राजकपूर की एक बात याद हो आई। उन्होंने अपने इंटरव्यू में कहा था कि उन्होंने चीन का अपना दौरा इसलिए टाल दिया था कि अब वो हीरो नहीं रहे थे। उनका कहना था कि चीन के लोग उस राजकपूर को जानते हैं, जो आवारा है, जवान है। इस राजकपूर को देखकर चीन के लोगो को अच्छा नहीं लगेगा। इसलिए वो कभी चीन नहीं गए। हालांकि खुद चेयरमैन माओ ने उन्हें निमंत्रण दिया था। 
    उन तीन बड़ों में शामिल देवानंद का आज जन्मदिन है। जो कभी रिटायर नहीं हुए। देवसाहब का कहना था कि कोई कितनी देर आराम कर सकता है। सपने कभी नहीं मरते, सपने कभी खत्म नहीं होते। उनके स्टाइल को तो कई लोगो ने अपनाया। देवसाहब हम तो यही चाहते हैं कि सपने हम देखना न भूलें। कोई सपना पूरा हो, तो अगला सपना देखना शूरु करें। रूकें कभी नहीं, जब तक सांस है, तबतक काम है। देवसाहब आप हमेशा अपने चाहने वालों के दिलों में इसी तरह से जिंदा रहने वाले हैं। सदाबहार, जवान, मुस्कुराते, जिंदादिल और ऊर्जा से भरे काम करते हुए।

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