सोमवार, नवंबर 28, 2016

पीएम मोदी को पूर्व पीएम का साथ?

आखिरकार मनमोहन सिंह जी भी बोल ही पड़े। कई दिन बाद संसद को ठप करने और शोर शराबा मचाने वाले सांसदों को किनारे कर, कांग्रेस को पूर्व पीएम मनमोहन सिंह को आगे करना ही पड़ा। मोर्चे पर तैनाती के बाद मनमोहन सिंह को बोलना पड़ा, और जब वो बोले तो लोगो को सुनना पड़ा। मनमोहन सिंह ने किंतु-परंतु करके नोटबंदी के फैसले का समर्थन कर दिया। लगे हाथ जी़डीपी पर पड़ने वाले निगेटिव असर को लेकर चेतावनी भी दे दी। साथ ही पूर्व पीएम ने वर्तमान पीएम की नोटबंदी लागू करने के तरीके की तीखी आलोचना भी कर डाली। यानि एक साथ मनमोहन सिंह जी ने अर्थशास्त्री और विपक्षी पार्टी का नेता होने का धर्म निभा दिया। क्या इसके बाद भी आपको लगता है कि वो सबसे पढ़े-लिखे नेता (जी हां, नेता बन गए हैं) नहीं हैं?
   लस्त-पस्त कांग्रेस के पास इस वक्त मनमोहन सिंह से बेहतर, संयमित भाषा का इस्तेमाल करने वाला और राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय छवि वाला नेता नहीं है। ऐसे में हंगामा करने में एक्सपर्ट सांसदों को किनारे करके बात रखने की बारी आई, तो कांग्रेस को पूर्व प्रधानमंत्री को आगे करना पड़ा। वरना मनमोहन सिंह जी कि कांग्रेस कितनी इज्जत करती है, ये उनके पीएम की दूसरी पारी के दौरान लोगो ने कई बार देखा था। बावजूद इसके मनमोहन सिंह ने कभी सीमा नहीं लांघी।  
  मनमोहन सिंह जी हजारों उत्तर देने से ज्यादा एक खामोशी को अच्छा समझते हैं। जो कि भले मानस की पहचान भी है। आज जो हरी, गुलाबी, पीली, नीली, संतरी अर्थव्यवस्था है उसके जनक तो मनमोहन सिंह जी ही हैं। उन्होंने ही 25 साल पहले सड़ती साम्यावदी विचारधारा वाले लोकतंत्र के तरीके को उलट दिया था। दुनिया के सबसे ब़ड़े लोकतंत्र को पूंजीवादी विचारधारा में बदल दिया था। उन्हीं की बनाई इसी मनमोहनी डगर पर पिछले 25 साल से देश चल रहा है। इसिलए जब अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह संसद में बोल रहे थे, तो पीएम मोदी उन्हें सुन रहे थे। जबकि खुद मोदी ने पीएम पद की मुहिम के दौारन राजनीतिक घमासान के दौरान मनमोहन सिंह की चुप्पी पर बड़े व्यंग्य बाण मारे थे। यानि विपक्ष के मोदी का ये एक और बदला रूप कहा जा सकता है।
   नोटबंदी पर बोलते मनमोहन सिंह ने कांग्रेस की हालत उजगार कर दी है। 2014 की हार से कांग्रेस अबतक उबर नहीं पाई है। यानि लेदेकर नोटबंदी पर पीएम मोदी को पूर्व पीएम मनमोहन सिंह का समर्थन मिल गया है। अब उस फैसले को लागू करने के तरीके, और पैसे को लेकर लंबी कतारों में लगे लोगो की नाराजगी का जो हथियार विपक्ष इस्तेमाल कर रहा है, उस नाराजगी को मोदी ने जनता के दरबार में जाकर अपने ऊपर ले लिया है, जिससे विपक्ष खासकर कांग्रेस सकते में है।  

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