शुक्रवार, जून 30, 2017

GST क्या सस्ता क्या महंगा..ब्लॉग दिवस से पहले

ताऊ रामपुरिया ( https://www.youtube.com/watch?v=R-wBy14X0zU&t=2s) का आदेश है कि 1 जुलाई को ब्लॉगिंग जरूर करना। उस दिन ब्लॉग दिवस है। हिंदी के ब्लॉगर भाई तो जरूर ब्लॉग पर पोस्ट डालना। चाहे तो ब्लॉग को वेबसाइट बना लेना। कैसे बनाना है ये बाद में बता दूंगा। संपर्क कीजिएगा। ताऊ के आदेश का तो पालन करना ही पड़ेगा 1 जुलाई को। वरना ताई से जितने लठ्ठ उन्हें पड़ते हैं, उतने हर ब्लॉगर को ताऊ लठ्ठ जड़ सकते हैं। 

तब तक क्यों न दिनांक एक जुलाई से लागू होने वाले जीएसटी में सस्ता-महंगा पर कुछ बात करें लें। महंगा-सस्ता होना तो जब से पैदा हुए हैं तब से देख रहे हैं। जाहिर है कुछ महंगा होगा, तो कुछ सस्ता होगा। आखिर सरकार चलाने के लिए पैसा तो चाहिए ही। ये पैसा टैक्स से ही आता है। 

दुनिया में कई देशों में जीएसटी का रेट पहले देख लें
साभार-@askGST_GoI

फिलहाल तो जीएसटी पर हल्ला मचाने वालों के शोर को दरकिनार करते हैं। अब जानते हैं कि किन चीजों पर जीएसटी यानि टैक्स नहीं लगेगा।  वो हैं --
ताज़ी सब्ज़ी, खुला पनीर
नमक, गुड़
दूध, दही और लस्सी (जमकर पिएं)
खुला शहद (बहुत काम की चीज है)
आटा, खुला बेसन (रोटी महंगी न होगी, बेसन के पकौड़ों पर मार नहीं)
खुला अनाज 
अंडे (संडे-मंडे या जब मर्जी खाएं)
खुला मैदा (मैदा तो मैदा है)
चावल, ब्रेड, पापड़ पर कोई टैक्स नहीं लगेगा, (चाय के साथ ब्रेड-चावल-पापड़ कॉम्बीनेशन निर्बाध चालू रखें) 
काजल  (यानी तीरे नजर चलाती रहें)
फूल झाड़ू (स्वच्छ अभियान में बैफ्रिक होकर योगदान करें, बस भगवान शादी शुदा मर्दों पर जरूरत के हिसाब से बरसे, यानि बेहिसाब न बरसे)
एजुकेशन सर्विस (पढ़ों दबा कर, फिलहाल तो टैक्स नहीं है)
हेल्थ सर्विस (योग करें और सेहत बनाए रखें, इसके अलावा भगवान न ही करे बीमार हों आप)
सिनेमा, थिएटर, केबल और डीटीएच सर्विस सस्ते होंगे (सस्ते होने का मतलब ये नहीं कि बस टीवी देखते रहें और चीप्स खाते रहें, मोटापे से बचना आपको ही है, वरना लाइन नहीं मिलेगी)
दवाइयों की कीमतें भी घटेंगी(इससे राहत तो मिली न)
चार मीटर की लंबाई की छोटी कारें सस्ती होंगी (कार का सपना साकार करने कि हिम्मत करते रहें)
फ्लाइट टिकट (जी भरकर उड़िए) 
स्मार्ट फोन (सस्ता होने के चक्कर में बेमतलब न खरीद लें, नेटपैक और बिल पर सर्विस टैक्स (3%बःतो देना ही पड़ेगा)
सबसे ज़्यादा फ़ायदा SUV को फायदा होगा, SUV 12% तक सस्ती होंगी(जे जमीन बेचकर लोग खरीदेंगे ही)

वैसे महंगे होने वाली चीजों पर अधिकतर 3 प्रतिशत ही टैक्स बड़ा है। कई चीजों पर टैक्स बढ़ा ही नहीं है।मसलन खाद्य तेल पर 5-6 प्रतिशत टैक्स था, जो 5 हो गया है। चीनी पर 5 प्रतिशत टैक्स को नहीं बढ़ाया है। फ्रूट जूस भी पहले की तरह पीते रहें, टैक्स नहीं बढ़ा है इसपर।  एसी, कोल्ड ड्रिंक, लग्जरी होटल,  मोबाइल बिल पर 2 से 3 प्रतिशत टैक्स बढ़ा है। इसी तरह बैंकों की सर्विस चार्ज पर 15-18 प्रतिशत था, जिसे फिक्स 18 कर दिया गया है, यानि ज्यादा ऊंच-नीच नहीं हुई है। 

अब इतनी सी जो चीजें महंगी हुई हैं, तो साल-दर-साल व्यापारियों की बदौलत तो वैसे ही महंगी हो जाती है। अब इससे ज्यादा क्या महंगा हुआ है, उसपर क्या बात करनी।  चलो फिर भी बता देता हूं प्रतिशत के हिसाब से। 
लेदर बैग पर अब 6 की जगह 28 प्रतिशत टैक्स लगेगा। (इब महिला विरोधी सरकार की तोहमत तो झेलनी पड़ेगी सरकार को)
बाकी नीचे देख लें। क्या कहूं, आप अपना-अपना देख लो।
मोबाइल फोन 6% 18%
अगरबत्ती 0% 12%
ड्राय फ्रूट 6% 12%
ब्रांडेड पनीर 0% 5%

कुछ चीजें बहुत सस्ती हुई हैं।  वो नीचे देख लें। 
हेयर ऑयल 26% 18% (लंबे बाल लहरा-लहरा के चलिए, अब)
LED लाइट्स 26% 12% (पूरे घर के बदल डालिए)
मिल्क पॉउडर 26% 12% (बच्चे को पिलाते हैं, पर मां के बाद गाय का दूध ही अच्छा होता है)
टूथ पाउडर 26% 12% ( हुआ सस्ता तो घिसे जाओ दांतो, बत्तीसी दिखाकर जमकर हंसिए)
मीट 19.5% 12% (नो कमेंट, क्योंकि खाता नहीं)
स्टील के बर्तन 18.5% 6% (धनतेरस पर दबा कर खरीदें अब)

तो भाई लोग, जो बता सकता था वो बता दिया। बाकि खुद-बखुद चेक कर लें। आखिर थोड़ी मेहनत आप भी करो, जानने के लिए, जैसे कच्छा बनियान सस्ता, अंडरवियर ब्रा-पैंटी सस्ती हुई हैं या नहीं। 
सवाल ये है कि इतनी कवायद से  सरकार को कितना फायदा होगा? जितने लोग टैक्स रिटर्न भरते हैं उनमें से सिर्फ एकाध प्रतिशत ही टैक्स देते हैं। देश में दो-तीन करोड़ लोग टैक्स रिटर्न भरने के बाद भी टैक्स नहीं देते।  मेरे हिसाब से टैक्स चोरों के देश में इसका ज्यादा असर पड़ेगा क्या? नहीं न, क्योंकि हम लोग तो जल्दी सुधरने से रहे। 

अब बताइए ऐसे में सरकार के पास पैसा कहाँ से आएगा। ये कड़वा सच है कि कई नुक्कड़ों पर छोटी सी दुकान लगाने वाले नौकरी वालों से कहीं ज्यादा बचाते हैं। अगर वो टैक्स में महज एकाध हजार टैक्स भर देंगे तो, कोई आफत नहीं आ जाएगी। ये एकाध हजार भी जोड़ने पर अरबों की रकम बन सकती है। ऐसे में हो टैक्स में कमी आ सकती है। जो कि फिलहाल तो होने से रहा। यानि 'हम न सुधरेंगे' का टैग हम पर लगा रहेगा। हां नोटबंदी में दस रूपए की चाय और पान-मसाले की ऑनलाइन पेमेंट से उन दिनों सरकारी खजाने में कुछ तो गया ही होगा। 

लब्बोलुबाव ये तो हम क्यों परेशान हों, सरकार एक साल बाद आंकड़ों में फायदा तो बता ही देगी। विपक्ष पढ़े-या बिना पढ़े-जांचे, इसकी धज्जियां तो उड़ाने की कोशिश करेगा ही। तो तब तक के लिए सस्ता-महंगा के चक्कर से अलविदा। 

अब सीधे ब्लॉग पर प्रगट होंगे ब्लॉग दिवस पर, यानि एक जुलाई को, जैसा की ताऊ रामपुरिया जी का आदेश है। 

#हिन्दी_ब्लॉगिंग
#हिंदी_ब्लॉग
#अतंर्रराष्ट्रीय_हिंदी_ब्लॉगिंग
#हिंदी_ब्लॉगर

https://www.youtube.com/watch?v=R-wBy14X0zU&t=2s

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