रविवार, जनवरी 07, 2018

नववर्ष में दर्द का मलहम और किताबें


 कहानी की किताबें मिल जाएं, तो फिर बात ही क्या है। दुनिया में किताबें पढ़ने का सबसे बढ़िया मौसम सर्दी, गर्मी और बरसात है। प्यार करने के मौसम भले पांच हों, पर किताबें इन्हीं तीन मौसम के इर्द-गिर्द पढ़ी जाती हैं। सर्दी की धूप हो, फिर छत हो या पार्क, कहीं भी लेट जाइए किताब लेकर। जी हां, पार्क में भी लेट कर पढ़ने का सुख हासिल किया जा सकता है।  हां, सर्दी के दिनों में घास पर कोई चादर बिछा कर ही लेंटे।  
    पहले छतों पर नारियल की रस्सी वाली खाट होती थी। जिसपर एक चादर बिछाकर सोने से शरीर को कई दर्दों से छुटकारा भी मिल जाता था।  किताबों की आड़ में कई बार पड़ोसी- से आंखे भी चार हो जाती थीं। सर्दी की धूप, या गर्मी की शाम अड्डा छत पर ही जमता था। कोर्स की किताबें भी पड़ोसी-पड़ोसन से बातें करने का खूबसूरत बहाना देती थीं। 
   धीरे-धीरे नारियल की रस्सी की चुभन लोगो को चुभने लगी, और प्लास्टिक की रस्सी वाले फोल्डिंग पलंग आने लगे। जिससे धूप में बैठकर पढ़ने का सुख तो मिला, पर छोटे-मोटे दर्द से निजात पाने का नुस्खा घरों से विदा हो गया। खैर दुनिया गोल है, चीजें लौटती हैं, खासकर वो, जो आपको दर्द से छुटकारा दिलाए। 
    दर्द से याद आया, उससे छुटकारा तो किताबें भी दिलाती हैं। नकारात्मक विचारों के दुष्प्रभाव आजकल तन-मन दोनों पर दिखाई दे रहे हैं। बच्चों और माता-पिता के बीच भी तनाव बढ़ रहा है। इस तनाव को झेलने का माद्दा कम हो गया है। डॉक्टर भी अब नॉर्मल लाइफ की ओर लौटने की सलाह दे रहे हैं। वैसे ये सलाह तो किताबें भी देती थीं न। 
  समझे कुछ। अरे यार, देश की राजधानी दिल्ली में पुस्तक मेला चल रहा है। 14 जनवरी तक अभी चलेगा। आज संडे है, यानि अगले रविवार तक तो है ही। तो मैं तो आज चला, ऑफिस से निकलने के बाद, पुस्तक मेले में आवारगी करने। आप भी निकलिए, थामिए अपनी बीबी और बच्चों का हाथ, और किताबों की दुनिया में सैर करने निकल पड़िए। चाहें तो आप गर्लफ्रैंड का हाथ थाम कर भी बेझिझक जा सकते हैं, बिना टेंशन के। हां शादीशुदा अपने रिस्क पर ये सलाह अमल में लाएं। अगर गए, और कुछ हुआ तो, पहले ही बताए देता हूं कि किसी टूटफूट की जिम्मेदारी मेरी नहीं होगी। 

  और हाँ चलते-चलते मेर पोस्ट पढ़ने वाले सभी दोस्तों को(अब 100 ही सहीं) नववर्ष 2018 की हार्दिक शुभकामनाएँ......देर से ही सही....ले लें....दिल से दी हैं

मां..काश कुछ फिल्मी फरिश्ते मिलते

   पुरानी फिल्मों में फैमली डॉक्टर के हाथ में एक जादू का बक्सा होता था। कैसी भी बीमारी हो , एक गोली देता था , या इंजेक्शन लगाता था और ब...