बुधवार, मार्च 14, 2018

चांदनी यूं बिना बताए कोई जाता है क्या?

  बीते दिनों महिला दिवस था। दिनभर टीवी चैनल महिलामंडन करते रहे। खासकर रक्षा क्षेत्र में परचम फहराती महिलाओं के इंटरव्यू दिखाए गये। अखबार भी महिला दिवस और महिलाओं को लुभाने वाले विज्ञापनों से भरे पड़े थे।मैंने अपने आसपास अनेक लड़कियां देखी हैं, जिन्होंने बंदिशों के बाद भी काफी सफलता अर्जित की है। इन लोगो ने अपनी मर्जी से करियर बनाया। अपनी मर्जी से शादी की। इसलिए आगे बढ़ती लड़कियां या महिलाएं मेरे लिए अजनबी कभी नहीं रहीं। ये भी सच है कि 20-30 साल पहले तक कई घरों में लड़कों को भी मनमर्जी की इजाजत नहीं थी। हालांकि तब के हालात जुदा थे। तब से अबतक काफी कुछ बदल चुका है।   
    महिला दिवस के शोर के बीच मुझे वो महिलाएं याद आ रहीं थी, जिन्होंने इतिहास रचा। इनमें खासकर अभिनेत्री श्रीदेवी का ख्याल ज्यादा आ रहा था। उनका ध्यान इसलिए भी बार-बार आ रहा था क्योंकि उन्होंने महिला दिवस से चंद दिन पहले ही असमय अचानक ही दुनिया को अलविदा कह दिय था। ये वो अदाकार थी, जिन्होंने रजत पटल पर इतिहास रचा था। उनकी अचानक मौत ने उनके करोडों चाहने वालों को सदमे में डाल दिया था। 
         श्रीदेवी का सुपरस्टारडम जितना बड़ा था, उतनी ही चौंकाने वाली उनकी मौत थी। 53 साल की उम्र जाने की नहीं होती। वो तो अगली फिल्म की तैयारी कर रहीं थीं। अपनी बेटी को फिल्मों में लॉच करने की तैयारी कर रही थीं। बेटी को उन प्रोफेशलनल तरीके से रूबरू करा रही थी, जो किसी यूनिवर्सिटी में, किसी किताब के जरिए नहीं सीखा जा सकता। वो अचानक बाथरुम में गिरती हैं और अलविदा कह देती हैं। भारत में आमतौर पर बाथटब में गिरकर हुई मौतों की खबरें नहीं आती। खासकर किसी सेलिब्रिटी की इसतरह अचानक, मौत हो जाए, जबकि वो भलीचंगी रही हों।
   श्रीदेवी की मौत पर कई तरह के कयास लगाए गए। दुबई के एक अखबार ने कई तरह की रिपोर्ट फाइल की। कहीं से खबर आई कि बार-बार कराई गई कॉस्मेटिक सर्जरी उनकी मौत का कारण बनी। जिसके कारण वो कमजोर हो गई थीं और बेहोश होकर गिर गईं बाथटब में। कभी ये खबर उछली कि उनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शराब का अंश मिला। जितने लोग, उतनी बातें। इस कारण दो दिन से ज्यादा जांच हुई। आखिर में दुबई पुलिस ने श्रीदेवी की मौत को एक्सीडेंटल मौत माना। 
   दरअसल मारे यहां सितारों और बड़े नेताओं की बीमारी छुपाने की आदत रही है। जिस कारण अच्छे भले-चंगे लगते स्टार या नेता की अचानक मौत होती है, तो लोग भौंचके रह जाते हैं। ऐसा ही तब हुआ था, जब सुपरस्टार हैंडसम विनोद खन्ना की अस्पताल में ली गई तस्वीर आई थी। बेहद कमजोर विनोद खन्ना को देखकर लोग चौंक गये थे। उनकी बीमारी को लेकर तमाम कयास लगने लगे थे। उनके परिवार ने सही जानकारी लोगो से साझा नहीं की थी। अभी उस झटके से लोग उबरे भी नहीं थे, कि विनोद खन्ना की मौत की खबर आ गई। ठीक है कि हर किसी की प्राइवेट लाइफ होती है, लेकिन सितारों के करोड़ों फैन उन्हें घर का सदस्य मानते हैं। भले ही कई लोग जीवनभर उनकी एक झलक भी न देख पाएं हों। इसलिए बीमारी छुपाने की ये आदत सुधरनी चाहिए। 
  श्रीदेवी के अलविदा कहने के साथ ही भारतीय सिनेमा का एक चलता-फिरता एक चमकदार पन्ना बंद हो गया है। दक्षिण से चलकर मुंबई पहुंची श्री अमा अयंगर अप्पन ने सही मायने में संघर्ष की मिसाल पेश की। हिंदी फिल्मों के जरिए उन्होंने ऐसा सुपरस्टारडम पाया जो, सरहद पार करके अरब के रेगिस्तान से होकर, अफ्रीकी महाद्वीप तक छा गया। ऐसे सुपरस्टारडम का कोई उत्तराधिकारी दूर-दूर तक नहीं दिखता। 
चांदनी आपको भरे मन से हमने विदाई तो दे दी है। पर क्या यूं बिना बताए कोई जाता है क्या? 


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