बरखूरदार ये इमरान तालिबान खान है तुम्हारा क्रिकेटर नहीं.. रोहित

क्रिकेटर, प्लेबॉय अब है इमरान तालीबान खान

पाकिस्तान में लोकतंत्र का ढकोसला


आखिरकार एक बार फिर साबित हो गया कि पाकिस्तान में सेना की ही चलेगी। नए पीएम बनने जा रहे इमरान खां भी सिर्फ कठपुतली हैं। पाकिस्तानी सेना ने कश्मीर में #LOC पर 600 से ज्यादा आतंकवादी जमा कर रखे हैं। कल ही घुसपैठ करते इन आतंकवादियों से हुई मुठभेड़ में हमारे मेजर राणे समेत 4 जवान शहीद हुए हैं। मुठभेड़ में दो आतंकी मारे गए, बाकि वापस पाकिस्तान भाग गए। कुछ आतंकी गद्दारों के भरोसे अंदर छुपने में कामयाब हुए हैं। ऐसी घटनाएं सबूत हैं कि पाकिस्तान में लोकतंत्र पूरी तरह से खोखला है।


हमारे भांड सेक्युलर बड़े वाले वो हैं

 पाकिस्तान में इमरान के पीएम बनने के आसार होते ही हमारे यहां हवाबाज सेक्युलर भांड ठुमके लगाने लगे थे। इनका कहना है कि पाकिस्तानी जनता ने आतंकियों को नक्कार दिया है। सही मायने में भारतीय सेक्युलर भांड इतने बड़े वाले वो हैं, कि क्या कहना। जबकि हकीकत ये है कि पाकिस्तानी सेना ही आतंकी मानसिकता की है। वहां जनता की क्या औकात जो वो आतंकियों को नक्कार दे। 

    किसी जमाने में हमारे सेक्युलर भांडों ने हिन्दी-चीनी भाई-भाई के नारे पर भी मटक-मटक कर कमर लचकाई थी। नतीजा क्या निकला था सबको पता है। पहली बार हिमालय पार से हमें धोखा मिला था। हमारी पीठ में छूरा घोंपा गया, जिसका जख्म आजतक नहीं भरा है। असल में भूखी बिल्ली को देखकर कबूतर की तरह आंखे बंद कर लेना भारतीय सेक्युलर भांडों की फितरत है। 


पाकिस्तान में आतंकवादी चुनाव जीते हैं

पाकिस्तान में इमरान को मिला बहुमत तालिबानी सोच वालों की जीत है। सेना की मदद से वोटों की जमकर धांधली हुई है। आतंकी समर्थकों के वोट इमरान को मिले हैं। हार के बाद भी आतंकवादी हाफिज सईद और उसके जैसे आतंकियों की पार्टियों को 9 फीसदी वोट मिले हैं। ज्यादातर देशों में 9 से 10 फीसदी ही लोग हत्यारे-दरिंदे होते हैं, जो 90 फीसदी शांत रहने वालों को दबा देते हैं। 


किक्रेटर इमरान खां रंगीन थे

इसमें कोई शक नहीं कि इमरान खान बेहतरीन क्रिकेटर रहे हैं। क्रिकेट की दुनिया के द ग्रेट 4 आलराउंडर में से एक। क्रिकेटर इमरान खान ने बिंदास जिंदगी जी है। इमरान के ही शब्दों में उनकी जैसी जिंदगी का सपना कई क्रिकेटर देखते थे। इमरान ही थे जिन्होंने 1992 में पाकिस्तान को अपने दम पर वनडे क्रिकेट का वर्ल्ड कप दिलाया था। हैंडसम पर्सनेल्टी, सफल क्रिकेटर इमरान के पीछे लाखों लड़कियां दीवानी थीं। क्या पाकिस्तान, क्या भारत, दूसरे देशों में भी उनपर जान छिड़कने वाली लड़कियों की कमी नहीं थी। सीधे-सीधे कहें तो इमरान एक शानदार क्रिकेटर होने के साथ ही फेमस प्लेबॉय भी थे। कई लड़कियों से उनके सेक्स रिलेशन थे। बेनजीर भुट्टो, जीनत तमाम से लेकर अनेक विदेशी बालाओं से उनका नाम जुड़ा। कुछ से उनके बच्चे भी हुए, जो डीएनए रिपोर्ट से साबित भी हुए। इतने अफेयर के अलावा इमरान खान ने तीन-तीन शादियां भी की।


राजनीति में बन गए इमरान तालिबान खां

जी हां, राजनीति में आकर इमरान खान कट्टर मुस्लिम का चोला ओढ़ते चले गए। 22 साल की राजनीति में जब वो वांछित कामयाबी न पा सके, तो उन्होंने पाकिस्तानी चोला पहन लिया। यानि उस नफरत का चोला, जिसकी बुनियाद पर पाकिस्तान बना था। वो किक्रेटर और नेता इमरान खां से बदलकर इमरान तालिबान खान हो गए। ये नाम भी उन्हें पाकिस्तान के बुद्धिजीवियों ने दिया है, न कि किसी मुस्लिम विरोधी सोच वाले ने। जैसा कि हमारे देश के पाकिस्तान परस्त गद्दार सोचते हैं।


क्रिकेटर से तालिबानी बनने का सफर 
ये बदलाव इमरान खां ने सोच समझ कर ही किया। जब क्रिकेटर के तौर पर मिली मशहूरी से इतने साल कामयाबी नहीं मिली, तो उन्होंने रंग-ढंग बदल लिए। पंजाबी न होने के कारण वो पाकिस्तानी पंजाबी प्रभुत्व वाली राजनीति में बाहरी ही लगते रहे। अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने के लिए इमरान ने मुस्लिम कट्टरपंथियों का समर्थन करना शुरू किया। फिर सत्ता के लिए पाकिस्तानी सेना की गोद में जा बैठे और सेना की आतंकी हरकतों पर चुप्पी ओढ़ ली।

तालिबानी इमरान के काम

  • इमरान ने 2013 में अमेरिकी ड्रोन हमले में मारे गए आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के कमांडर वली-उर-रहमान को 'शांति समर्थक' कहा

  • उत्तर पश्चिमी प्रांत खैबर पख्तुनख्वा में इमरान की गठबंधन सरकार ने पिछले साल हक्कानी मदरसे को 30 लाख डॉलर दिए।

  • हक्कानी मदरसा तालिबान की रीढ़ की हड्डी है। पूर्व तालिबान आतंकी सरगना मुल्ला उमर समेत अनेक आतंकी यहीं की पैदाइश हैं। 

  • जब क्रिकेटर इमरान खां आतंकवादियों का खुलेआम समर्थन देने लगे, तो पाकिस्तानी उन्हें 'इमरान तालिबान खान' के नाम से पुकारने लगे। 

क्रिकेटर इमरान भी भारत विरोधी थे

    भले सुनील गावस्कर को इमरान खान अपने अच्छे दोस्तों में मानते हों। भले ही गावस्कर ने पाकिस्तान के वनडे वर्ल्ड कप जीतने और इमरान के वजीर-ए-आजम बनने की भविष्याणी की हो। फिर भी भारतीय टीम से हारना इमरान खां को कभी बर्दाश्त नहीं हुआ। ये कई मौकों पर दिखा भी। एक मैच सबको याद होगा, जिसमें पाकिस्तान भारत से हारा, तो कमेंटरी करते इमरान गुस्से में उठकर मैदान में बैठी पाकिस्तानी टीम के पास चले गए थे। उस टीम में किसी में इमरान की शख्सियत की, उस हरकत की खिलाफत करने की हिम्मत न थी। वो हरकत इसकी तरफ इशारा करती है कि उनकी नजर में उनकी टीम भारत से नहीं, हिंदू भारत से हारी थी।


भारतियों ने दुश्मन को भी इज्जत दी

   टीम इंडिया पर पाकिस्तान की जीत पर भारत में पटाखे फोड़ने वाली जमात के लिए इमरान आज भी खुदा ही हैं। उनसे इतर भारतीय खेल प्रशंसकों ने क्रिकेटर इमरान को हमेशा इज्जत दी है। जब भी वो भारत आए हैं, उनका स्वागत ही हुआ। इसलिए भारत में आकर इमरान भारत के खिलाफ बोलते नजर नहीं आए।


चुनाव प्रचार में भारत के खिलाफ जहर उगला  

   इस बार चुनाव प्रचार में इमरान खान ने जमकर भारत के खिलाफ जहर उगला। उन्होंने पाकिस्तानी सेना की नापसंद नवाज शरीफ को एक तरह से भारत का पिठ्ठू कहा। नवाज पर लगाए इमरान के इल्जामों की बानगी-

  • इमरान ने कहा कि नवाज शरीफ भारत के खिलाफ बहुत सॉफ्ट हैं। इमरान ने लोगों को उकसाया कि, 'भारत और मोदी को नवाज प्यारे हैं, लेकिन वे हमारी सेना से नफरत करते हैं। अब उन्हें इस बात की चिंता है कि अगर इमरान सत्ता में आया तो पाकिस्तान के लिए काम करेगा।

  • इमरान नवाज शरीफ को आधुनिक मीर जाफर कह चुके हैं।

  • नवाज को इमरान ने मोदी की भाषा बोलने वाला कहा है।

  • इमरान ने अपने प्रचार में काफी उग्र तरीके से कश्मीर का मुद्दा उठाया है।

  • भारत को कश्मीर में हिंसा का जिम्मेदार बताया है।

  • सर्जिकल स्ट्राइक के बाद इमरान ने काफी तीखे तेवर दिखाते हुए कहा था कि 'मैं नवाज शरीफ को बताऊंगा कि मोदी को कैसे जवाब देना है।' 

  • 2015 में मोदी की अचानक पाकिस्तान जाकर नवाज शरीफ से की गई मुलाकात को इमरान ने 'हितों का टकराव' बताया था।

  • चुनाव नतीजे आते ही इमरान ने कश्मीर में हिंसा के लिए भारतीय सेना को दोषी बता दिया। 

   तो ये था इमरान का भारत विरोधी चुनाव प्रचार अभियान। नवाज को निशाने पर लेकर पाकिस्तानी सेना और इस्लामिक आतंकी कट्टरपंथियों का चहेता बनने की कोशिशें। जिसमें नेता इमरान खान कामयाब भी हो गया। यानि गद्दार आधुनिक जिन्ना की तरह सत्ता के लिए इस्लामिक कट्टरपन का चोला पहन लिया।


नवाज नापसंद हैं सेना को

 असल में नवाज शरीफ भारत के साथ बातचीत और शांति के समर्थक रहे हैं। पाकिस्तानी सेना के न चाहने पर भी नवाज शरीफ ने पीएम मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में शिरकत की थी। पिछली बार नवाज की शांति कोशिश को करगिल में घुसपैठ करके पाकिस्तान सेना ने पलीता लगा दिया था। इसबार नवाज किसी तरह से सत्ता में न आ पाएं, इसका पक्का इतंजाम पाकिस्तानी सेना ने कर दिया। आईएसआई और सेना के दवाब में पाकिस्तानी अदालत ने नवाज शरीफ और उनकी बेटी को जेल में डाल दिया।

चुनाव बाद इमरान और पाकिस्तानी सेना की हरकत

  चुनाव बाद इमरान ने कश्मीर में तीस साल से जारी हिंसा के लिए हमारी सेना को जिम्मेदार ठहरा दिया। तालीबान खान का ये बयान ही बताता है कि उनकी औकात नहीं है कि वो शांति के लिए कोई कदम उठा पाएं। कश्मीर में #LOC पर आतंकियों की फौज जमा करके पाकिस्तानी सेना ने भी बता दिया है कोई हो नृप, वो बाज नहीं आएंगे।


पाकिस्तान से बातचीत की नौटंकी बंद हो

 चालक की सीट पर खुशी-खुशी हाथ-पैर बंधवा कर बैठे इमरान तालीबान खान से बातचीत करके कोई फायदा नहीं है। पाकिस्तान की बातचीत की पेशकश की किसी भी नौटंकी को हमारी सरकार को मानना नहीं चाहिए। न ही भांड सेक्युलरों पर सरकार ध्यान दे। हमारी सरकार को पूरा ध्यान पाकिस्तानी सेना से निपटने और गद्दारों को फांसी के तख्ते पर पहुंचाने पर होना चाहिए।

चलते-चलते

अब इसके बाद भी कोई भांड सेक्युलर इमरान तालिबान खान से शांति की उम्मीद रखे तो उससे बड़े वाला चू#@या कोई नहीं। बस वो किसी भारतीय को बरगलाने की कोशिश न करे, वैसे भी हम में से ज्यादातर लोग जानते हैं कि भांड सेक्यूलर से बड़ा ..समझ गए न, अरे वही, जो ऊपर लिखा है।

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