शहीदों के हत्यारे से मिलते शर्म नहीं आई मिस्टर सिद्धू

तो सिद्धू साहब आप गावस्कर और कपिल देव से भी बड़े क्रिकेटर हो गए। जो तालिबान खान से दोस्ती निभाने पहुंच गए पाकिस्तान। दोस्ती भी इस हद तक कि वाजपेयी साहब को आखिर तक विदाई भी न दे सके। वाजपेयी साहब के सिपाही थे तुस्सी तां। फेर की हो गया? या खास मणिशंकर अय्यर वाला पट्टा पाकिस्तान खींच ले गया। आपको तो मणिशंकर अय्यर की तरह पाकिस्तान से मोहब्बत हो गई है? सिद्धू साहब वैसे तो आपको कहावतें बहुत याद रहती हैं। हैरत है कि सरहद पार जाकर आपको 'भेड़ की खाल में छुपे भेड़िए' वाली कहावत याद नहीं आई। खासकर गले मिलते हुए। 
  सिद्धू साहब ऐसा क्या हो गया है, जो पाकिस्तानी जनरल के आप कसीदे पढ़ने लगे। चलिए मान लेते हैं कि वो आपसे गले मिलने आ गया, तो आपको गले मिलना पड़ा। फिर भी, आपको उस वक्त वो दिन याद नहीं आया, जब वाजपेयी साहब ने हाथ मिलाने को बढ़ रहे पाकिस्तानी जनरल मुशर्रफ की तरफ से मुंह फेरकर बाकियों सार्क देशों के प्रमुखों से दुआ सलाम की थी। चलिए एक बारगी मान लेते हैं कि ये पाकिस्तानी जनरल आपके गले पड़ गया था। तो उससे गले मिलने की सफाई देते वक्त उसकी तारीफ करने क्यों लगे हैं आप। क्या नापाक परस्त नेताओं से ये सीखा है?
   वैसे सिद्धू साब, पाकिस्तानी जनरल ने कह दिया कि वो शांति चाहता है, और आपने विश्वास कर लिया। वाह असि तां वारे जाएं त्वाडे भोलेपन ते। जो हरामी जनरल रोज सरहद पर गोलाबारी करवा रहा हो। जो रोज आतंकवादियों की घुसपैठ कराता हो। जिसकी वजह से हमारे सैनिक शहीद हो रहे हों, उसकी बात पर त्हाणु विश्वास किवें हो गया? दस्सोगे कदी?
  सिद्धू साहब वो जनरल एक तरफ एक तरफ तीर्थ यात्रा के रास्ते खुलवाने की बात करता है। दूसरी तरफ आतंकवादियों की घुसपैठ कराता है। उस हरामी जनरल की बात का भरोसा कर रहे हो आप? उस हत्यारे दरिंदे की बात का प्रचार करते वक्त आपको जरा भी शर्म नहीं आ रही?
    सिद्धू साहब आपका कहना है कि आप दोस्त होने के नाते गए। तो जनाब जरा बताएंगे कि आपके दोस्त क्रिकेटर इमरान खान ने कब आपको न्योता भेजा? वहां तो इमरान तालिबान खान शपथ ले रहा था। तालिबान खान ने कह दिया एक कदम उठाओ तो, आप गद्गद हो गए। ऐसा ही शांति का पुजारी है आपका ये दोस्त, तो कश्मीर के बॉर्डर पर आतंकवादियों की घुसैपठ क्यों नहीं रुकवाता? क्यों नहीं सीजफायर को रोकता? कश्मीर में पाकिस्तानी आतंकियों की करतूत आपके दोस्त को क्यों नहीं दिखाई देती? वड्डे आए तुस्सी दोस्ती दी मिसाल देण वास्ते। वैसे भी इन तालिबान खान के हाथ तो बंधे हुए हैं।
   एक बता बताऐं सिद्दू साब, वाजपेयी से लेकर मनमोहन सिंह और मोदी साहब ने शांति के लिए जो कई कदम उठाए उसका सिला क्या मिला अबतक? कभी करगिल, कभी उरी, कभी पठानकोट। इतना भी समझ नहीं आता आपको कि नफ़रत की बुनियाद पर बने उस देश की बागडोर आतंकियों के रहनुमाओं के हाथ में है। ये वो लोग हैं जो भारत से नफरत करते हैं, हिंदूओं से नफरत करते हैं, सिखों से नफरत करते हैं। ये बात आपको मालूम न हो, ऐसा तो हो ही नहीं सकता जनाब।    
    असल बात ये है सिद्धू साहब कि अब आप भी घटिया राजनीति करने लगे हैं। अय्यर ने पाकिस्तानियों से भारत सरकार गिराने की मदद मांगी। आप वहां जाकर पंजाब बॉर्डर खोलने की वकालत करने लगे। वाह कमाल है। याद रखिए सरहद के उसपार उनके हाथ में ताकत है, जो सिर्फ हमसे, आपसे नफरत करते हैं। 47 का दौर आप भूल सकते हैं, सदियों को याद है, और हमेशा याद रहेगा।
  माफ कीजिएगा, मिस्टर नवजोत सिंह सिद्धू, अब आपको सिद्धू साहब कहने का मन नहीं रहा। एक क्रिकेटर होने के नाते जो हमारे दिलों में आपको लेकर इज्जत थी, उसपर खुद आपने पानी फेर दिया है। आज से आप वो सिद्धू हैं, जो अब एक निम्न स्तर का नेता हो गया है। वो सिद्धू हैं, जो हमारे शहीद सैनिकों की लाशों पर चढ़कर सरहद पार उनके हत्यारे के समर्थक के शपथ समारोह में शामिल होने गया। हमारे शहीदों के हत्यारे से बगलगीर होकर मिला। मिस्टर सिद्धू थोड़ी सी शर्म बची हो आपमें, तो अपने पर खुद ही लानत लानत भेज मारिए।

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